अल-मोमिनुन · 77/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
حَتَّىٰ إِذَا فَتَحْنَا عَلَيْهِم بَابًا ذَا عَذَابٍ شَدِيدٍ إِذَا هُمْ فِيهِ مُبْلِسُونَ ۝٧٧
Hattaaa izaa fatahnaa `alaihim baaban zaa `azaabin shadeedin izaa hum feehi mublisoon
📖 हिंदी अर्थ
यहाँ तक कि जब हमने उनके सामने एक सख्त अज़ाब का दरवाज़ा खोल दिया तो उस वक्त फ़ौरन ये लोग बेआस होकर बैठ रहे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَتَحْنَا: हमने खोल दिया
  • بَابًا ذَا عَذَابٍ شَدِيدٍ: सख्त अज़ाब का दरवाज़ा
  • مُبْلِسُونَ: निराश, हैरान-परेशान, हर भलाई से मायूस

तफ़सीर:

जब ये ज़ालिम और मुकर्रिब लोग हक़ को नकारते रहे और अपनी सरकशी पर अड़े रहे, तो अल्लाह तआला ने उनके लिए एक ऐसा दरवाज़ा खोल दिया जो सख्त अज़ाब का दरवाज़ा था। यह अज़ाब दुनिया में भी आ सकता है — जैसा कि बद्र के दिन काफ़िरों पर आया — और आख़िरत में भी उनका इंतज़ार कर रहा है। जब यह अज़ाब आ जाता है, तो वे ऐसे हैरान और निराश हो जाते हैं कि उन्हें किसी भी तरह की राहत या भलाई की कोई उम्मीद नहीं रहती। वे चारों तरफ़ से घिर जाते हैं, कोई रास्ता नहीं दिखता, और वे पूरी तरह मायूसी में डूब जाते हैं।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। जब वह किसी क़ौम पर अज़ाब लाता है, तो कोई उसे टाल नहीं सकता। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह की रहमत के दरवाज़े को खटखटाता रहे, तौबा और इस्तिग़फ़ार करता रहे, क्योंकि अज़ाब आने से पहले तौबा का दरवाज़ा खुला है। जो लोग आज अल्लाह के हुक्म से ग़ाफ़िल हैं, वे कल उस दिन पछताएँगे जब पछतावा किसी काम नहीं आएगा। अल्लाह की रहमत असीम है, और वह चाहता है कि बंदे उसकी तरफ़ रुजू करें। यही सबसे बड़ी कामयाबी है कि इंसान दुनिया में ही अपने रब की तरफ़ लौट आए, और उस अज़ाब से बच जाए जो काफ़िरों और ज़ालिमों के लिए तैयार है।

🎧 सुनें

📜 आयत 75-79 — अल-मोमिनुन

75۞ وَلَوْ رَحِمْنَاهُمْ وَكَشَفْنَا مَا بِهِم مِّن ضُرٍّ لَّلَجُّوا فِي طُغْيَانِهِمْ يَعْمَهُونَ
और अगर हम उन पर तरस खायें और जो तकलीफें उनको (कुफ्र की वजह से) पहुँच रही हैं उन को दफा कर दें तो यक़ीनन ये लोग (और भी) अपनी सरकशी पर अड़ जाए और भटकते फिरें
76وَلَقَدْ أَخَذْنَاهُم بِالْعَذَابِ فَمَا اسْتَكَانُوا لِرَبِّهِمْ وَمَا يَتَضَرَّعُونَ
और हमने उनको अज़ाब में गिरफ्तार किया तो भी वे लोग न तो अपने परवरदिगार के सामने झुके और गिड़गिड़ाएँ
77حَتَّىٰ إِذَا فَتَحْنَا عَلَيْهِم بَابًا ذَا عَذَابٍ شَدِيدٍ إِذَا هُمْ فِيهِ مُبْلِسُونَ
यहाँ तक कि जब हमने उनके सामने एक सख्त अज़ाब का दरवाज़ा खोल दिया तो उस वक्त फ़ौरन ये लोग बेआस होकर बैठ रहे
78وَهُوَ الَّذِي أَنشَأَ لَكُمُ السَّمْعَ وَالْأَبْصَارَ وَالْأَفْئِدَةَ ۚ قَلِيلًا مَّا تَشْكُرُونَ
हालाँकि वही वह (मेहरबान खुदा) है जिसने तुम्हारे लिए कान और ऑंखें और दिल पैदा किये (मगर) तुम लोग हो ही बहुत कम शुक्र करने वाले
79وَهُوَ الَّذِي ذَرَأَكُمْ فِي الْأَرْضِ وَإِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
और वह वही (ख़ुदा) है जिसने तुम को रुए ज़मीन में (हर तरफ) फैला दिया और फिर (एक दिन) सब के सब उसी के सामने इकट्ठे किये जाओगे
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीRevelation
77आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 77

सूरा अल-मोमिनुन आयत 77 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : यहाँ तक कि जब हमने उनके सामने एक सख्त अज़ाब…

सूरा आयत 77/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए