Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَتَحْنَا: हमने खोल दिया
- بَابًا ذَا عَذَابٍ شَدِيدٍ: सख्त अज़ाब का दरवाज़ा
- مُبْلِسُونَ: निराश, हैरान-परेशान, हर भलाई से मायूस
तफ़सीर:
जब ये ज़ालिम और मुकर्रिब लोग हक़ को नकारते रहे और अपनी सरकशी पर अड़े रहे, तो अल्लाह तआला ने उनके लिए एक ऐसा दरवाज़ा खोल दिया जो सख्त अज़ाब का दरवाज़ा था। यह अज़ाब दुनिया में भी आ सकता है — जैसा कि बद्र के दिन काफ़िरों पर आया — और आख़िरत में भी उनका इंतज़ार कर रहा है। जब यह अज़ाब आ जाता है, तो वे ऐसे हैरान और निराश हो जाते हैं कि उन्हें किसी भी तरह की राहत या भलाई की कोई उम्मीद नहीं रहती। वे चारों तरफ़ से घिर जाते हैं, कोई रास्ता नहीं दिखता, और वे पूरी तरह मायूसी में डूब जाते हैं।
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। जब वह किसी क़ौम पर अज़ाब लाता है, तो कोई उसे टाल नहीं सकता। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह की रहमत के दरवाज़े को खटखटाता रहे, तौबा और इस्तिग़फ़ार करता रहे, क्योंकि अज़ाब आने से पहले तौबा का दरवाज़ा खुला है। जो लोग आज अल्लाह के हुक्म से ग़ाफ़िल हैं, वे कल उस दिन पछताएँगे जब पछतावा किसी काम नहीं आएगा। अल्लाह की रहमत असीम है, और वह चाहता है कि बंदे उसकी तरफ़ रुजू करें। यही सबसे बड़ी कामयाबी है कि इंसान दुनिया में ही अपने रब की तरफ़ लौट आए, और उस अज़ाब से बच जाए जो काफ़िरों और ज़ालिमों के लिए तैयार है।
📜 आयत 75-79 — सूरा अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 77
सूरा अल-मोमिनुन आयत 77 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : यहाँ तक कि जब हमने उनके सामने एक सख्त अज़ाब…सूरा आयत 77/118 — सूरा अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मोमिनुन सुनें, सूरा अल-मोमिनुन अनुवाद, सूरा अल-मोमिनुन mp3, सूरा अल-मोमिनुन pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मोमिनुन
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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