अल-फुरकान · 11/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
بَلْ كَذَّبُوا بِالسَّاعَةِ ۖ وَأَعْتَدْنَا لِمَن كَذَّبَ بِالسَّاعَةِ سَعِيرًا ۝١١
Bal kazzaboo bis Saa`ati wa a`tadnaa liman kazzaba bis Saa`ati sa`eeraa
📖 हिंदी अर्थ
(ये सब कुछ नहीं) बल्कि (सच यूँ है कि) उन लोगों ने क़यामत ही को झूठ समझा है और जिस शख्स ने क़यामत को झूठ समझा उसके लिए हमने जहन्नुम को (दहका के) तैयार कर रखा है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • السَّاعَةِ (अस-साआह): क़यामत, वह घड़ी जिसमें सभी प्राणियों का हिसाब होगा।
  • أَعْتَدْنَا (अ'तदना): हमने तैयार कर रखा है।
  • سَعِيرًا (सईरन): भड़कती हुई आग, जो बहुत तेज़ी से जलती है।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को दिलासा देते हुए फ़रमाते हैं कि ये लोग आपकी बात नहीं मानते, न इसलिए कि आपकी दलीलें कमज़ोर हैं या आपका पैग़ाम सच्चा नहीं, बल्कि इसका असली कारण यह है कि इन्होंने क़यामत के दिन को ही झुठला दिया है। यानी इनका इनकार सिर्फ़ आपसे नहीं, बल्कि अल्लाह की पूरी व्यवस्था से है। ये लोग उस दिन को नहीं मानते जब सभी अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब होगा, इसलिए इन्हें लगता है कि जो कुछ भी कर रहे हैं, उसका कोई नतीजा नहीं निकलेगा।

अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि हमने उन लोगों के लिए, जो क़यामत के दिन को झुठलाते हैं, एक ऐसी आग तैयार कर रखी है जो बहुत भड़की हुई और तेज़ लपटों वाली है। यह आग उन्हें अपनी लपटों में घेर लेगी और उनके लिए कोई राहत नहीं होगी। यह सज़ा उनके उस इनकार का नतीजा है जो उन्होंने अल्लाह के दीन और उसके रसूल के साथ किया।

दावती पहलू:

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त की याद दिलाती है कि क़यामत का दिन बिल्कुल सच है। जो लोग इस दिन पर ईमान रखते हैं, वे अपनी ज़िंदगी को संवारते हैं, अच्छे काम करते हैं और अल्लाह की रज़ा के लिए जीते हैं। लेकिन जो लोग इस दिन को भूल जाते हैं या झुठलाते हैं, वे अपनी ज़िंदगी को बर्बाद कर लेते हैं। अल्लाह तआला ने अपनी रहमत से हमें यह दुनिया दी है ताकि हम अच्छे काम करें और उसकी रहमत के हक़दार बनें। क़यामत का डर हमें बुराइयों से रोकता है और अच्छाइयों की तरफ ले जाता है। हमें चाहिए कि इस दिन पर पक्का ईमान रखें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की बताई हुई राह पर चलाएं, ताकि उस भड़कती आग से बच सकें और जन्नत की नेमतें पा सकें। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है, उसने हमें मौका दिया है कि हम अपने कर्मों को सुधार लें और उसकी रहमत के साये में आ जाएं।



📜 आयत 9-13 — सूरा अल-फुरकान

9انظُرْ كَيْفَ ضَرَبُوا لَكَ الْأَمْثَالَ فَضَلُّوا فَلَا يَسْتَطِيعُونَ سَبِيلًا
(ऐ रसूल) ज़रा देखो तो कि इन लोगों ने तुम्हारे वास्ते कैसी कैसी फबत्तियां गढ़ी हैं और गुमराह हो गए तो अब ये लोग किसी तरह राह पर आ ही नहीं सकते
10تَبَارَكَ الَّذِي إِن شَاءَ جَعَلَ لَكَ خَيْرًا مِّن ذَٰلِكَ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ وَيَجْعَل لَّكَ قُصُورًا
ख़ुदा तो ऐसा बारबरकत है कि अगर चाहे तो (एक बाग़ क्या चीज़ है) इससे बेहतर बहुतेरे ऐसे बाग़ात तुम्हारे वास्ते पैदा करे जिन के नीचे नहरें जारी हों और (बाग़ात के अलावा उनमें) तुम्हारे वास्ते महल बना दे
11بَلْ كَذَّبُوا بِالسَّاعَةِ ۖ وَأَعْتَدْنَا لِمَن كَذَّبَ بِالسَّاعَةِ سَعِيرًا
(ये सब कुछ नहीं) बल्कि (सच यूँ है कि) उन लोगों ने क़यामत ही को झूठ समझा है और जिस शख्स ने क़यामत को झूठ समझा उसके लिए हमने जहन्नुम को (दहका के) तैयार कर रखा है
12إِذَا رَأَتْهُم مِّن مَّكَانٍ بَعِيدٍ سَمِعُوا لَهَا تَغَيُّظًا وَزَفِيرًا
जब जहन्नुम इन लोगों को दूर से दखेगी तो (जोश खाएगी और) ये लोग उसके जोश व ख़रोश की आवाज़ सुनेंगें
13وَإِذَا أُلْقُوا مِنْهَا مَكَانًا ضَيِّقًا مُّقَرَّنِينَ دَعَوْا هُنَالِكَ ثُبُورًا
और जब ये लोग ज़ज़ीरों से जकड़कर उसकी किसी तंग जगह मे झोंक दिए जाएँगे तो उस वक्त मौत को पुकारेंगे
अल-फुरकानकुरान सूची
77आयत
मक्कीअवतरण स्थान
11आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 11

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Saturday, October 3, 2026

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