अल-फुरकान · 13/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
وَإِذَا أُلْقُوا مِنْهَا مَكَانًا ضَيِّقًا مُّقَرَّنِينَ دَعَوْا هُنَالِكَ ثُبُورًا ۝١٣
Wa izaaa ulqoo minhaa makaanan daiyiqam muqar raneena da`aw hunaalika subooraa
📖 हिंदी अर्थ
और जब ये लोग ज़ज़ीरों से जकड़कर उसकी किसी तंग जगह मे झोंक दिए जाएँगे तो उस वक्त मौत को पुकारेंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أُلْقُوا – डाल दिए जाएँ, फेंक दिए जाएँ
  • مَكَانًا ضَيِّقًا – अत्यंत संकीर्ण/तंग जगह
  • مُقَرَّنِينَ – जिनके हाथ गर्दनों से जंजीरों से बंधे हों
  • ثُبُورًا – विनाश, हलाकत, मौत की पुकार

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दृश्य को चित्रित करती है जो क़ियामत के दिन काफ़िरों का इंतज़ार कर रहा है। जब ये लोग जहन्नम में डाले जाएँगे, तो वहाँ की जगह इतनी तंग और संकीर्ण होगी कि उनका दम घुट जाएगा। उनके हाथ उनकी गर्दनों से जंजीरों के साथ बाँध दिए जाएँगे, ताकि वे हिल-डुल भी न सकें। इस क़ैद और तंगी के बीच, जब उन पर अज़ाब की हर तरफ़ से बौछारें होंगी, तो वे अपनी ही हलाकत और विनाश को पुकारेंगे, कहेंगे: "हाय! हमारी मौत आ जाए, हमारा विनाश हो जाए!" — लेकिन वहाँ मौत भी नसीब नहीं होगी, और न ही उनकी पुकार का कोई जवाब होगा।

इस आयत में अल्लाह तआला ने जहन्नम की तंगी का ज़िक्र करके उसकी विशालता और दयालुता की याद दिलाई है — जैसे जन्नत की चौड़ाई आसमानों और ज़मीन के बराबर है, वैसे ही जहन्नम की तंगी उसके अज़ाब की सख़्ती को और बढ़ा देती है। जब इंसान दुनिया में किसी तंग जगह में फँस जाता है, तो उसे साँस लेने में भी तकलीफ़ होती है, तो सोचिए उस जगह का क्या हाल होगा जहाँ हाथ-पैर बँधे हों, जंजीरें गर्दनों में हों, और आग की लपटें चारों ओर से घेर रही हों!

यह आयत हमारे लिए एक सख़्त चेतावनी है कि हम उन कामों से बचें जो हमें इस अंजाम तक पहुँचाएँ। साथ ही, यह अल्लाह की रहमत की तरफ़ इशारा है — कि उसने हमें दुनिया में मौका दिया है, तौबा का दरवाज़ा खुला रखा है, और हिदायत की राह दिखाई है। जो लोग इस दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं, उनके लिए जन्नत है जिसकी चौड़ाई आसमानों और ज़मीन के बराबर है — वहाँ कोई तंगी नहीं, कोई क़ैद नहीं, बल्कि हमेशा की खुशियाँ और आराम है। अल्लाह हमें उस राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे, जो उसकी रज़ा और जन्नत तक पहुँचाए। आमीन।



📜 आयत 11-15 — सूरा अल-फुरकान

11بَلْ كَذَّبُوا بِالسَّاعَةِ ۖ وَأَعْتَدْنَا لِمَن كَذَّبَ بِالسَّاعَةِ سَعِيرًا
(ये सब कुछ नहीं) बल्कि (सच यूँ है कि) उन लोगों ने क़यामत ही को झूठ समझा है और जिस शख्स ने क़यामत को झूठ समझा उसके लिए हमने जहन्नुम को (दहका के) तैयार कर रखा है
12إِذَا رَأَتْهُم مِّن مَّكَانٍ بَعِيدٍ سَمِعُوا لَهَا تَغَيُّظًا وَزَفِيرًا
जब जहन्नुम इन लोगों को दूर से दखेगी तो (जोश खाएगी और) ये लोग उसके जोश व ख़रोश की आवाज़ सुनेंगें
13وَإِذَا أُلْقُوا مِنْهَا مَكَانًا ضَيِّقًا مُّقَرَّنِينَ دَعَوْا هُنَالِكَ ثُبُورًا
और जब ये लोग ज़ज़ीरों से जकड़कर उसकी किसी तंग जगह मे झोंक दिए जाएँगे तो उस वक्त मौत को पुकारेंगे
14لَّا تَدْعُوا الْيَوْمَ ثُبُورًا وَاحِدًا وَادْعُوا ثُبُورًا كَثِيرًا
(उस वक्त उनसे कहा जाएगा कि) आज एक मौत को न पुकारो बल्कि बहुतेरी मौतों को पुकारो (मगर इससे भी कुछ होने वाला नहीं)
15قُلْ أَذَٰلِكَ خَيْرٌ أَمْ جَنَّةُ الْخُلْدِ الَّتِي وُعِدَ الْمُتَّقُونَ ۚ كَانَتْ لَهُمْ جَزَاءً وَمَصِيرًا
(ऐ रसूल) तुम पूछो तो कि जहन्नुम बेहतर है या हमेशा रहने का बाग़ (बेहश्त) जिसका परहेज़गारों से वायदा किया गया है कि वह उन (के आमाल) का सिला होगा और आख़िरी ठिकाना
अल-फुरकानकुरान सूची
77आयत
मक्कीअवतरण स्थान
13आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 13

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Friday, October 2, 2026

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