अल-फुरकान · 12/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
إِذَا رَأَتْهُم مِّن مَّكَانٍ بَعِيدٍ سَمِعُوا لَهَا تَغَيُّظًا وَزَفِيرًا ۝١٢
Izaa ra`at hum mim ma kaanim ba`eedin sami`oo lahaa taghaiyuzanw wa zafeeraa
📖 हिंदी अर्थ
जब जहन्नुम इन लोगों को दूर से दखेगी तो (जोश खाएगी और) ये लोग उसके जोश व ख़रोश की आवाज़ सुनेंगें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَغَيُّظًا: गुस्से की आवाज़, क्रोध से भरी हुई भयंकर आवाज़।
  • وَزَفِيرًا: सीने से निकलने वाली गहरी और भयानक आवाज़, जैसे आग की लपटों की गड़गड़ाहट।

तफ़सीर (व्याख्या):

क़यामत के दिन जब जहन्नम की आग उन काफ़िरों और मुन्किरों को देखेगी जिन्होंने दुनिया में अल्लाह के दीन को झुठलाया और उसके रसूलों की नाफ़रमानी की, तो वह उन्हें दूर से ही देख लेगी। और जब वे उसकी तरफ़ लाए जाएंगे, तो वह आग उन पर इस कदर ग़ुस्से से भड़केगी कि उसके अंदर से गुस्से की भयानक आवाज़ें और सीने से निकलने वाली ज़बरदस्त ज़फ़ीर (चिंघाड़) सुनाई देगी। यह आवाज़ इतनी दहशतनाक होगी कि उसे सुनते ही उनके दिल काँप उठेंगे और उन पर मौत की सियाही छा जाएगी।

यह आयत उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं और उसके अज़ाब को दूर समझते हैं। वे भूल जाते हैं कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है और उसकी आग उन लोगों का इंतज़ार कर रही है जो उसकी रहमत से महरूम हैं। लेकिन साथ ही यह भी याद रखें कि अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान और रहीम है। उसने अपने बंदों के लिए तौबा का दरवाज़ा खुला रखा है। जो कोई भी अपने गुनाहों से तौबा करके उसकी तरफ़ रुजू करेगा, अल्लाह उसे माफ़ कर देगा और उसे इस भयानक अज़ाब से बचा लेगा। इसलिए ऐ इंसान! अभी भी वक़्त है, अपने रब की तरफ़ लौट आओ, उसकी रहमत को ग़नीमत समझो और उस आग से बचने की कोशिश करो जिसकी चिंघाड़ें दूर से ही सुनाई देने लगती हैं। अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से कहीं ज़्यादा वसीअ है, और वह अपने तौबा करने वाले बंदों से बेहद मुहब्बत करता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 10-14 — अल-फुरकान

10تَبَارَكَ الَّذِي إِن شَاءَ جَعَلَ لَكَ خَيْرًا مِّن ذَٰلِكَ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ وَيَجْعَل لَّكَ قُصُورًا
ख़ुदा तो ऐसा बारबरकत है कि अगर चाहे तो (एक बाग़ क्या चीज़ है) इससे बेहतर बहुतेरे ऐसे बाग़ात तुम्हारे वास्ते पैदा करे जिन के नीचे नहरें जारी हों और (बाग़ात के अलावा उनमें) तुम्हारे वास्ते महल बना दे
11بَلْ كَذَّبُوا بِالسَّاعَةِ ۖ وَأَعْتَدْنَا لِمَن كَذَّبَ بِالسَّاعَةِ سَعِيرًا
(ये सब कुछ नहीं) बल्कि (सच यूँ है कि) उन लोगों ने क़यामत ही को झूठ समझा है और जिस शख्स ने क़यामत को झूठ समझा उसके लिए हमने जहन्नुम को (दहका के) तैयार कर रखा है
12إِذَا رَأَتْهُم مِّن مَّكَانٍ بَعِيدٍ سَمِعُوا لَهَا تَغَيُّظًا وَزَفِيرًا
जब जहन्नुम इन लोगों को दूर से दखेगी तो (जोश खाएगी और) ये लोग उसके जोश व ख़रोश की आवाज़ सुनेंगें
13وَإِذَا أُلْقُوا مِنْهَا مَكَانًا ضَيِّقًا مُّقَرَّنِينَ دَعَوْا هُنَالِكَ ثُبُورًا
और जब ये लोग ज़ज़ीरों से जकड़कर उसकी किसी तंग जगह मे झोंक दिए जाएँगे तो उस वक्त मौत को पुकारेंगे
14لَّا تَدْعُوا الْيَوْمَ ثُبُورًا وَاحِدًا وَادْعُوا ثُبُورًا كَثِيرًا
(उस वक्त उनसे कहा जाएगा कि) आज एक मौत को न पुकारो बल्कि बहुतेरी मौतों को पुकारो (मगर इससे भी कुछ होने वाला नहीं)
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अनुवाद — अल-फुरकान 12

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Tuesday, August 18, 2026

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