अन-नमल · 29/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
قَالَتْ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ إِنِّي أُلْقِيَ إِلَيَّ كِتَابٌ كَرِيمٌ ۝٢٩
Qaalat yaaa aiyuhal mala`u innee ulqiya ilaiya kitaabun kareem
📖 हिंदी अर्थ
(ग़रज़) हुद हुद ने मलका के पास ख़त पहुँचा दिया तो मलका बोली ऐ (मेरे दरबार के) सरदारों ये एक वाजिबुल एहतराम ख़त मेरे पास डाल दिया गया है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الْمَلَأُ: किसी क़ौम के बड़े-बड़े सरदार, रईस और मशविरा देने वाले लोग।
  • أُلْقِيَ إِلَيَّ: मेरी तरफ फेंका गया, यानी मुझे पहुँचाया गया।
  • كِتَابٌ كَرِيمٌ: बड़ी इज़्ज़त वाला, महान और सम्मानित ख़त।

तफ़सीर:

जब हुदहुद ने वह ख़त मलिका बिल्क़ीस (सबा की रानी) के पास पहुँचाया और उसने उसे पढ़ा, तो वह उसकी अहमियत और अज़मत को भाँप गई। उसने फ़ौरन अपनी क़ौम के बड़े-बड़े सरदारों और मशविरा देने वाले लोगों को इकट्ठा किया और उनसे कहा: "ऐ मेरी क़ौम के बुज़ुर्गो और सरदारो! मेरी तरफ एक बहुत ही इज़्ज़त वाला और महान ख़त पहुँचाया गया है।"

यह ख़त इसलिए करीम (महान) था क्योंकि वह मुहरबंद था, और उस ज़माने में ख़त की मुहर उसकी इज़्ज़त और अहमियत की निशानी हुआ करती थी। साथ ही, यह ख़त किसी आम इंसान की तरफ से नहीं, बल्कि एक अज़ीम शख्सियत की तरफ से आया था, जिसकी अज़मत और बुलंदी उसके अल्फ़ाज़ से ज़ाहिर थी। मलिका ने यह मामला अपने मशविरा देने वालों के सामने रखा, क्योंकि वह अकेले फ़ैसला नहीं करना चाहती थी, बल्कि अपनी क़ौम के सरदारों की राय लेना चाहती थी — यह उसकी समझदारी और हिकमत की दलील थी।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि बड़े मामलों में मशविरा करना सुन्नत और अक़्लमंदी की बात है। साथ ही, यह भी सीख मिलती है कि अल्लाह के दीन की दावत जब किसी बादशाह या हाकिम तक पहुँचे, तो उसे अदब और हिकमत के साथ पेश किया जाए, ताकि दिल नरम हों और सच्चाई क़बूल करने का रास्ता आसान हो। यह ख़त आख़िरकार तौहीद और अल्लाह की इबादत की दावत था, और मलिका ने उसे करीम कहकर उसकी अज़मत का इज़हार किया — यह दिखाता है कि हक़ की बात चाहे दुश्मन के हाथ से आए, उसे इज़्ज़त देनी चाहिए और ग़ौर से सुनना चाहिए।



📜 आयत 27-31 — अन-नमल

27۞ قَالَ سَنَنظُرُ أَصَدَقْتَ أَمْ كُنتَ مِنَ الْكَاذِبِينَ
(ग़रज़) सुलेमान ने कहा हम अभी देखते हैं कि तूने सच सच कहा या तू झूठा है
28اذْهَب بِّكِتَابِي هَٰذَا فَأَلْقِهْ إِلَيْهِمْ ثُمَّ تَوَلَّ عَنْهُمْ فَانظُرْ مَاذَا يَرْجِعُونَ
(अच्छा) हमारा ये ख़त लेकर जा और उसको उन लोगों के सामने डाल दे फिर उन के पास से जाना फिर देखते रहना कि वह लोग अख़िर क्या जवाब देते हैं
29قَالَتْ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ إِنِّي أُلْقِيَ إِلَيَّ كِتَابٌ كَرِيمٌ
(ग़रज़) हुद हुद ने मलका के पास ख़त पहुँचा दिया तो मलका बोली ऐ (मेरे दरबार के) सरदारों ये एक वाजिबुल एहतराम ख़त मेरे पास डाल दिया गया है
30إِنَّهُ مِن سُلَيْمَانَ وَإِنَّهُ بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
सुलेमान की तरफ से है (ये उसका सरनामा) है बिस्मिल्लाहिररहमानिरहीम
31أَلَّا تَعْلُوا عَلَيَّ وَأْتُونِي مُسْلِمِينَ
(और मज़मून) यह है कि मुझ से सरकशी न करो और मेरे सामने फरमाबरदार बन कर हाज़िर हो
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अनुवाद — अन-नमल 29

सूरा अन-नमल आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ग़रज़) हुद हुद ने मलका के पास ख़त पहुँचा दिया…

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Tuesday, August 18, 2026

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