अन-नमल · 30/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
إِنَّهُ مِن سُلَيْمَانَ وَإِنَّهُ بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ ۝٣٠
Innahoo min Sulaimaana wa innahoo bismil laahir Rahmaanir Raheem
📖 हिंदी अर्थ
सुलेमान की तरफ से है (ये उसका सरनामा) है बिस्मिल्लाहिररहमानिरहीम

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِنَّهُ — यह (पत्र) निश्चित रूप से है।
  • مِن سُلَيْمَانَ — सुलेमान (अलैहिस्सलाम) की ओर से है।
  • بِسْمِ اللَّهِ — अल्लाह के नाम से (आरंभ है)।
  • الرَّحْمَٰنِ — अत्यंत दयालु (जिसकी रहमत सभी प्राणियों पर व्यापक है)।
  • الرَّحِيمِ — बड़ा मेहरबान (जो मोमिनों पर विशेष रहमत फरमाता है)।

तफ़सीर:

जब हुदहुद (पक्षी) ने सबा की रानी (बिल्क़ीस) का पत्र लाकर हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) को दिया, तो हज़रत सुलेमान ने उस पत्र को पढ़ा। यह पत्र अत्यंत प्रभावशाली और बुद्धिमत्तापूर्ण ढंग से लिखा गया था। रानी बिल्क़ीस ने अपनी सभा में जाकर कहा: "यह पत्र सुलेमान की ओर से है, और इसकी शुरुआत 'बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम' से होती है।"

इस पत्र का आरंभ अल्लाह के नाम से किया गया था, जो अत्यंत दयालु और मेहरबान है। यह आरंभ ही संदेश की नम्रता, सच्चाई और ईश्वरीय शक्ति का प्रतीक था। इस पत्र में न केवल सुलेमान (अलैहिस्सलाम) की ओर से संदेश था, बल्कि यह अल्लाह की ओर से एक दावत थी—एक ऐसी दावत जो लोगों को अल्लाह की वहदानियत (एकता) और उसकी इबादत की ओर बुलाती है।

इस पत्र का उद्देश्य घमंड और अहंकार को तोड़ना था। सुलेमान (अलैहिस्सलाम) ने अपनी दुनियावी ताकत और शक्ति के बावजूद, पत्र की शुरुआत अल्लाह के नाम से की, ताकि यह स्पष्ट हो जाए कि असली ताकत और बादशाही अल्लाह ही की है। यह पत्र सिखाता है कि जब भी हम कोई अच्छा काम शुरू करें, तो उसे 'बिस्मिल्लाह' से शुरू करें, क्योंकि यह बरकत और कामयाबी की कुंजी है।

इस आयत में हमारे लिए एक बहुत बड़ा सबक है: नेतृत्व, शक्ति और अधिकार होने पर भी नम्रता और अल्लाह की याद से काम शुरू करना चाहिए। सुलेमान (अलैहिस्सलाम) जैसे महान नबी और बादशाह ने अपने पत्र की शुरुआत अल्लाह के नाम से की, तो हमें भी चाहिए कि अपने हर काम—चाहे वह छोटा हो या बड़ा—की शुरुआत अल्लाह के नाम से करें। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।

यह पत्र उन सभी लोगों के लिए एक नसीहत है जो अल्लाह की इबादत से सरकशी करते हैं और अपनी दुनियावी ताकत पर घमंड करते हैं। अल्लाह की रहमत और मेहरबानी उन्हें बुलाती है कि वे अपने घमंड को छोड़कर अल्लाह की तरफ लौट आएं, क्योंकि अल्लाह रहमान और रहीम है—वह अपने बंदों पर रहमत फरमाता है और उन्हें माफ करने के लिए हमेशा तैयार है।



📜 आयत 28-32 — अन-नमल

28اذْهَب بِّكِتَابِي هَٰذَا فَأَلْقِهْ إِلَيْهِمْ ثُمَّ تَوَلَّ عَنْهُمْ فَانظُرْ مَاذَا يَرْجِعُونَ
(अच्छा) हमारा ये ख़त लेकर जा और उसको उन लोगों के सामने डाल दे फिर उन के पास से जाना फिर देखते रहना कि वह लोग अख़िर क्या जवाब देते हैं
29قَالَتْ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ إِنِّي أُلْقِيَ إِلَيَّ كِتَابٌ كَرِيمٌ
(ग़रज़) हुद हुद ने मलका के पास ख़त पहुँचा दिया तो मलका बोली ऐ (मेरे दरबार के) सरदारों ये एक वाजिबुल एहतराम ख़त मेरे पास डाल दिया गया है
30إِنَّهُ مِن سُلَيْمَانَ وَإِنَّهُ بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
सुलेमान की तरफ से है (ये उसका सरनामा) है बिस्मिल्लाहिररहमानिरहीम
31أَلَّا تَعْلُوا عَلَيَّ وَأْتُونِي مُسْلِمِينَ
(और मज़मून) यह है कि मुझ से सरकशी न करो और मेरे सामने फरमाबरदार बन कर हाज़िर हो
32قَالَتْ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ أَفْتُونِي فِي أَمْرِي مَا كُنتُ قَاطِعَةً أَمْرًا حَتَّىٰ تَشْهَدُونِ
तब मलका (विलक़ीस) बोली ऐ मेरे दरबार के सरदारों तुम मेरे इस मामले में मुझे राय दो (क्योंकि मेरा तो ये क़ायदा है कि) जब तक तुम लोग मेरे सामने मौजूद न हो (मशवरा न दे दो) मैं किसी अम्र में क़तई फैसला न किया करती
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अनुवाद — अन-नमल 30

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सूरा आयत 30/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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