अन-नमल · 31/93
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नमल
أَلَّا تَعْلُوا عَلَيَّ وَأْتُونِي مُسْلِمِينَ ۝٣١
Allaa ta`loo `alaiya waa toonee muslimeen
📖 हिंदी अर्थ
(और मज़मून) यह है कि मुझ से सरकशी न करो और मेरे सामने फरमाबरदार बन कर हाज़िर हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَلَّا تَعْلُوا عَلَيَّ — मुझ पर घमंड न करो, अहंकार न करो।
  • وَأْتُونِي مُسْلِمِينَ — मेरे पास आओ, आज्ञाकारी और आत्मसमर्पण करने वाले बनकर।

व्याख्या:

यह आयत हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) के उस पत्र का अंश है जो उन्होंने रानी बिल्क़ीस (सबा की रानी) को भेजा था। इस पत्र में उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि अल्लाह की ओर से दी गई नबुव्वत और राज्य के नाते वे किसी भी प्रकार का अहंकार या घमंड बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा: "मुझ पर अहंकार मत करो, और मेरे पास आओ, अल्लाह के आज्ञाकारी और उसकी एकता को स्वीकार करने वाले बनकर।"

इस आयत में दो महत्वपूर्ण बातें हैं:

पहली: "अल्ला तअलू अलैय्य" — यानी मुझ पर घमंड न करो। यह एक चेतावनी है कि जो लोग सत्य को स्वीकार करने से इनकार करते हैं और अपनी शक्ति या धन-दौलत पर इतराते हैं, वे वास्तव में अल्लाह के आदेशों का उल्लंघन करते हैं। घमंड और अहंकार वह बीमारी है जो इंसान को सत्य से दूर कर देती है और उसे विनाश की ओर ले जाती है।

दूसरी: "वअतूनी मुस्लिमीन" — यानी मेरे पास आओ, अल्लाह के आज्ञाकारी और उसकी एकता को स्वीकार करने वाले बनकर। यह न केवल एक आदेश है, बल्कि एक निमंत्रण भी है। हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) चाहते थे कि सबा की रानी और उसकी क़ौम अल्लाह की एकता को स्वीकार करें, सूर्य की पूजा छोड़ें और सच्चे धर्म की ओर लौटें।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा नेतृत्व वही है जो अल्लाह के आदेशों के अनुसार चले और लोगों को सत्य की ओर बुलाए। साथ ही, यह भी शिक्षा देती है कि इंसान को अपनी शक्ति, धन या पद पर घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि अल्लाह के सामने विनम्र होना चाहिए। जब हम अल्लाह के आगे झुकते हैं, तो हमें सच्ची शांति और सफलता मिलती है।

यह पत्र उस समय भेजा गया जब रानी बिल्क़ीस और उसकी क़ौम सूर्य की पूजा करती थी। हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें अल्लाह की ओर बुलाया, और यही अल्लाह के पैग़म्बरों का काम है — लोगों को अंधकार से प्रकाश की ओर लाना, शिर्क से तौहीद की ओर, और अहंकार से विनम्रता की ओर। यह आयत हमें याद दिलाती है कि हमें अपने जीवन में घमंड से बचना चाहिए और अल्लाह के आगे पूरी तरह समर्पित हो जाना चाहिए, क्योंकि यही सच्ची सफलता का मार्ग है।



📜 आयत 29-33 — सूरा अन-नमल

29قَالَتْ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ إِنِّي أُلْقِيَ إِلَيَّ كِتَابٌ كَرِيمٌ
(ग़रज़) हुद हुद ने मलका के पास ख़त पहुँचा दिया तो मलका बोली ऐ (मेरे दरबार के) सरदारों ये एक वाजिबुल एहतराम ख़त मेरे पास डाल दिया गया है
30إِنَّهُ مِن سُلَيْمَانَ وَإِنَّهُ بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
सुलेमान की तरफ से है (ये उसका सरनामा) है बिस्मिल्लाहिररहमानिरहीम
31أَلَّا تَعْلُوا عَلَيَّ وَأْتُونِي مُسْلِمِينَ
(और मज़मून) यह है कि मुझ से सरकशी न करो और मेरे सामने फरमाबरदार बन कर हाज़िर हो
32قَالَتْ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ أَفْتُونِي فِي أَمْرِي مَا كُنتُ قَاطِعَةً أَمْرًا حَتَّىٰ تَشْهَدُونِ
तब मलका (विलक़ीस) बोली ऐ मेरे दरबार के सरदारों तुम मेरे इस मामले में मुझे राय दो (क्योंकि मेरा तो ये क़ायदा है कि) जब तक तुम लोग मेरे सामने मौजूद न हो (मशवरा न दे दो) मैं किसी अम्र में क़तई फैसला न किया करती
33قَالُوا نَحْنُ أُولُو قُوَّةٍ وَأُولُو بَأْسٍ شَدِيدٍ وَالْأَمْرُ إِلَيْكِ فَانظُرِي مَاذَا تَأْمُرِينَ
उन लोगों ने अर्ज़ की हम बड़े ज़ोरावर बडे लड़ने वाले हैं और (आइन्दा) हर अम्र का आप को एख्तियार है तो जो हुक्म दे आप (खुद अच्छी) तरह इसके अन्जाम पर ग़ौर कर ले
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीअवतरण स्थान
31आयत

अनुवाद — अन-नमल 31

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Friday, October 2, 2026

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