अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَلَّا تَعْلُوا عَلَيَّ — मुझ पर घमंड न करो, अहंकार न करो।
- وَأْتُونِي مُسْلِمِينَ — मेरे पास आओ, आज्ञाकारी और आत्मसमर्पण करने वाले बनकर।
व्याख्या:
यह आयत हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) के उस पत्र का अंश है जो उन्होंने रानी बिल्क़ीस (सबा की रानी) को भेजा था। इस पत्र में उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि अल्लाह की ओर से दी गई नबुव्वत और राज्य के नाते वे किसी भी प्रकार का अहंकार या घमंड बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा: "मुझ पर अहंकार मत करो, और मेरे पास आओ, अल्लाह के आज्ञाकारी और उसकी एकता को स्वीकार करने वाले बनकर।"
इस आयत में दो महत्वपूर्ण बातें हैं:
पहली: "अल्ला तअलू अलैय्य" — यानी मुझ पर घमंड न करो। यह एक चेतावनी है कि जो लोग सत्य को स्वीकार करने से इनकार करते हैं और अपनी शक्ति या धन-दौलत पर इतराते हैं, वे वास्तव में अल्लाह के आदेशों का उल्लंघन करते हैं। घमंड और अहंकार वह बीमारी है जो इंसान को सत्य से दूर कर देती है और उसे विनाश की ओर ले जाती है।
दूसरी: "वअतूनी मुस्लिमीन" — यानी मेरे पास आओ, अल्लाह के आज्ञाकारी और उसकी एकता को स्वीकार करने वाले बनकर। यह न केवल एक आदेश है, बल्कि एक निमंत्रण भी है। हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) चाहते थे कि सबा की रानी और उसकी क़ौम अल्लाह की एकता को स्वीकार करें, सूर्य की पूजा छोड़ें और सच्चे धर्म की ओर लौटें।
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा नेतृत्व वही है जो अल्लाह के आदेशों के अनुसार चले और लोगों को सत्य की ओर बुलाए। साथ ही, यह भी शिक्षा देती है कि इंसान को अपनी शक्ति, धन या पद पर घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि अल्लाह के सामने विनम्र होना चाहिए। जब हम अल्लाह के आगे झुकते हैं, तो हमें सच्ची शांति और सफलता मिलती है।
यह पत्र उस समय भेजा गया जब रानी बिल्क़ीस और उसकी क़ौम सूर्य की पूजा करती थी। हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें अल्लाह की ओर बुलाया, और यही अल्लाह के पैग़म्बरों का काम है — लोगों को अंधकार से प्रकाश की ओर लाना, शिर्क से तौहीद की ओर, और अहंकार से विनम्रता की ओर। यह आयत हमें याद दिलाती है कि हमें अपने जीवन में घमंड से बचना चाहिए और अल्लाह के आगे पूरी तरह समर्पित हो जाना चाहिए, क्योंकि यही सच्ची सफलता का मार्ग है।
📜 आयत 29-33 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 31
सूरा अन-नमल आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और मज़मून) यह है कि मुझ से सरकशी न करो…सूरा आयत 31/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








