अन-नमल · 62/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
أَمَّن يُجِيبُ الْمُضْطَرَّ إِذَا دَعَاهُ وَيَكْشِفُ السُّوءَ وَيَجْعَلُكُمْ خُلَفَاءَ الْأَرْضِ ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ قَلِيلًا مَّا تَذَكَّرُونَ ۝٦٢
Ammany-yujeebul mud tarra izaa da`aahu wa yakshifussooo`a wa yaj`alukum khula faaa`al ardi `a-ilaahum ma`al laahi qaleelam maa tazak karoon
📖 हिंदी अर्थ
भला वह कौन है कि जब मुज़तर उसे पुकारे तो दुआ क़ुबूल करता है और मुसीबत को दूर करता है और तुम लोगों को ज़मीन में (अपना) नायब बनाता है तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद है (हरगिज़ नहीं) उस पर भी तुम लोग बहुत कम नसीहत व इबरत हासिल करते हो

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • मुज़्तर (المضطر): वह व्यक्ति जो कठिनाई और संकट में फँस गया हो, जिसकी सारी सामर्थ्य समाप्त हो गई हो और वह केवल अल्लाह ही से उम्मीद लगाए।
  • कश्फ़ुस्सू (يكشف السوء): कष्ट, बीमारी, ग़रीबी या किसी भी प्रकार की तकलीफ़ को दूर करना।
  • ख़ुलफ़ा (خلفاء): उत्तराधिकारी, एक दूसरे की जगह लेने वाले, पृथ्वी पर बसने वाले।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों को सम्बोधित करती है जो अल्लाह के साथ दूसरों को पूजते हैं। अल्लाह तआला उनसे पूछता है: क्या तुम्हारे ये झूठे माबूद बेहतर हैं, या वह अल्लाह जो सच्चे दिल से पुकारने वाले की पुकार सुनता है? जब कोई इंसान मुसीबत में घिर जाता है, जब उसकी सारी उम्मीदें टूट जाती हैं, जब कोई सहारा नहीं मिलता, तो वह सहज रूप से केवल अल्लाह को ही पुकारता है। अल्लाह ही उसकी पुकार सुनता है और उसकी मुसीबत दूर करता है। वही बीमारी को शिफ़ा में, ग़रीबी को रिज़्क़ में और दुख को सुख में बदल देता है।

यह अल्लाह ही है जो तुम्हें धरती पर पिछली उम्मतों का उत्तराधिकारी बनाता है, तुम्हें ताक़त और इज़्ज़त देता है, और तुम्हें ज़मीन पर बसाता है। तो क्या इन सब नेमतों के बाद भी कोई और माबूद है जो अल्लाह के साथ पूजा का हक़दार हो? हरगिज़ नहीं! ये सब नेमतें केवल अल्लाह की तरफ़ से हैं, फिर तुम उसके साथ दूसरों को क्यों शरीक करते हो?

अफ़सोस की बात है कि तुम बहुत कम सोचते-समझते हो। अगर तुम ज़रा भी ग़ौर करते, तो इन नेमतों को देखकर अल्लाह की यकताई (एकता) को पहचान लेते और उसी की इबादत करते। लेकिन तुम्हारी समझ पर ग़ाफ़िलियत (लापरवाही) हावी है, इसलिए तुम सच्चाई से दूर हो गए हो।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि जब भी हम किसी मुसीबत में फँसें, तो सीधे अल्लाह से जुड़ें। वही है जो सुनता है, वही है जो दूर करता है। यही ईमान की मिठास है कि इंसान को यक़ीन हो कि उसका रब उसके बहुत करीब है, उसकी पुकार सुनता है और उसकी मदद करता है। जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ा जाता। यही वह रिश्ता है जो इंसान को सुकून देता है और उसे ज़िन्दगी की हर मुश्किल में हिम्मत देता है।



📜 आयत 60-64 — अन-नमल

60أَمَّنْ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَنبَتْنَا بِهِ حَدَائِقَ ذَاتَ بَهْجَةٍ مَّا كَانَ لَكُمْ أَن تُنبِتُوا شَجَرَهَا ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ يَعْدِلُونَ
भला वह कौन है जिसने आसमान और ज़मीन को पैदा किया और तुम्हारे वास्ते आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने पानी से दिल चस्प (ख़ुशनुमा) बाग़ उठाए तुम्हारे तो ये बस की बात न थी कि तुम उनके दरख्तों को उगा सकते तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) बल्कि ये लोग खुद अपने जी से गढ़ के बुतो को उसके बराबर बनाते हैं
61أَمَّن جَعَلَ الْأَرْضَ قَرَارًا وَجَعَلَ خِلَالَهَا أَنْهَارًا وَجَعَلَ لَهَا رَوَاسِيَ وَجَعَلَ بَيْنَ الْبَحْرَيْنِ حَاجِزًا ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
भला वह कौन है जिसने ज़मीन को (लोगों के) ठहरने की जगह बनाया और उसके दरमियान जा बजा नहरें दौड़ायी और उसकी मज़बूती के वास्ते पहाड़ बनाए और (मीठे खारी) दरियाओं के दरमियान हदे फासिल बनाया तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) बल्कि उनमें के अकसर कुछ जानते ही नहीं
62أَمَّن يُجِيبُ الْمُضْطَرَّ إِذَا دَعَاهُ وَيَكْشِفُ السُّوءَ وَيَجْعَلُكُمْ خُلَفَاءَ الْأَرْضِ ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ قَلِيلًا مَّا تَذَكَّرُونَ
भला वह कौन है कि जब मुज़तर उसे पुकारे तो दुआ क़ुबूल करता है और मुसीबत को दूर करता है और तुम लोगों को ज़मीन में (अपना) नायब बनाता है तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद है (हरगिज़ नहीं) उस पर भी तुम लोग बहुत कम नसीहत व इबरत हासिल करते हो
63أَمَّن يَهْدِيكُمْ فِي ظُلُمَاتِ الْبَرِّ وَالْبَحْرِ وَمَن يُرْسِلُ الرِّيَاحَ بُشْرًا بَيْنَ يَدَيْ رَحْمَتِهِ ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ تَعَالَى اللَّهُ عَمَّا يُشْرِكُونَ
भला वह कौन है जो तुम लोगों की ख़़ुश्की और तरी की तारिक़ियों में राह दिखाता है और कौन उसकी बाराने रहमत के आगे आगे (बारिश की) ख़ुशखबरी लेकर हवाओं को भेजता है-क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) ये लोग जिन चीज़ों को ख़ुदा का शरीक ठहराते हैं ख़ुदा उससे बालातर है
64أَمَّن يَبْدَأُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ وَمَن يَرْزُقُكُم مِّنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ قُلْ هَاتُوا بُرْهَانَكُمْ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
भला वह कौन हैं जो ख़िलकत को नए सिरे से पैदा करता है फिर उसे दोबारा (मरने के बाद) पैदा करेगा और कौन है जो तुम लोगों को आसमान व ज़मीन से रिज़क़ देता है- तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरग़िज़ नहीं) (ऐ रसूल) तुम (इन मुशरेकीन से) कहा दो कि अगर तुम सच्चे हो तो अपनी दलील पेश करो
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीRevelation
62आयत

अनुवाद — अन-नमल 62

सूरा अन-नमल आयत 62 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : भला वह कौन है कि जब मुज़तर उसे पुकारे तो…

सूरा आयत 62/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 60–64. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए