अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- मुज़्तर (المضطر): वह व्यक्ति जो कठिनाई और संकट में फँस गया हो, जिसकी सारी सामर्थ्य समाप्त हो गई हो और वह केवल अल्लाह ही से उम्मीद लगाए।
- कश्फ़ुस्सू (يكشف السوء): कष्ट, बीमारी, ग़रीबी या किसी भी प्रकार की तकलीफ़ को दूर करना।
- ख़ुलफ़ा (خلفاء): उत्तराधिकारी, एक दूसरे की जगह लेने वाले, पृथ्वी पर बसने वाले।
तफ़सीर:
यह आयत उन लोगों को सम्बोधित करती है जो अल्लाह के साथ दूसरों को पूजते हैं। अल्लाह तआला उनसे पूछता है: क्या तुम्हारे ये झूठे माबूद बेहतर हैं, या वह अल्लाह जो सच्चे दिल से पुकारने वाले की पुकार सुनता है? जब कोई इंसान मुसीबत में घिर जाता है, जब उसकी सारी उम्मीदें टूट जाती हैं, जब कोई सहारा नहीं मिलता, तो वह सहज रूप से केवल अल्लाह को ही पुकारता है। अल्लाह ही उसकी पुकार सुनता है और उसकी मुसीबत दूर करता है। वही बीमारी को शिफ़ा में, ग़रीबी को रिज़्क़ में और दुख को सुख में बदल देता है।
यह अल्लाह ही है जो तुम्हें धरती पर पिछली उम्मतों का उत्तराधिकारी बनाता है, तुम्हें ताक़त और इज़्ज़त देता है, और तुम्हें ज़मीन पर बसाता है। तो क्या इन सब नेमतों के बाद भी कोई और माबूद है जो अल्लाह के साथ पूजा का हक़दार हो? हरगिज़ नहीं! ये सब नेमतें केवल अल्लाह की तरफ़ से हैं, फिर तुम उसके साथ दूसरों को क्यों शरीक करते हो?
अफ़सोस की बात है कि तुम बहुत कम सोचते-समझते हो। अगर तुम ज़रा भी ग़ौर करते, तो इन नेमतों को देखकर अल्लाह की यकताई (एकता) को पहचान लेते और उसी की इबादत करते। लेकिन तुम्हारी समझ पर ग़ाफ़िलियत (लापरवाही) हावी है, इसलिए तुम सच्चाई से दूर हो गए हो।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि जब भी हम किसी मुसीबत में फँसें, तो सीधे अल्लाह से जुड़ें। वही है जो सुनता है, वही है जो दूर करता है। यही ईमान की मिठास है कि इंसान को यक़ीन हो कि उसका रब उसके बहुत करीब है, उसकी पुकार सुनता है और उसकी मदद करता है। जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ा जाता। यही वह रिश्ता है जो इंसान को सुकून देता है और उसे ज़िन्दगी की हर मुश्किल में हिम्मत देता है।
📜 आयत 60-64 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 62
सूरा अन-नमल आयत 62 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : भला वह कौन है कि जब मुज़तर उसे पुकारे तो…सूरा आयत 62/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 60–64. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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