अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ظُلُمَاتِ الْبَرِّ وَالْبَحْرِ: ज़मीन और समुद्र के अंधेरे, यानी रात के समय जब रास्ते भटक जाते हैं।
- بُشْرًا: ख़ुशख़बरी देने वाली (हवाएँ)।
- رَحْمَتِهِ: उसकी रहमत, यानी बारिश जो उसकी रहमत से आती है।
- تَعَالَى: वह पाक और बुलंद है, हर कमी से पाक।
तफ़सीर:
यह आयत उन लोगों से सवाल करती है जो अल्लाह के साथ दूसरों को पूजते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है: "क्या तुम्हारे ये माबूद (जिन्हें तुम पूजते हो) बेहतर हैं, या वह अल्लाह जो तुम्हें ज़मीन और समुदर के अंधेरों में रास्ता दिखाता है?" जब तुम रात के अंधेरे में ज़मीन पर भटक जाते हो, या समुद्र की गहराइयों में रास्ता खो देते हो, तो वही तुम्हें सितारों और ज़मीन की निशानियों के ज़रिए मंज़िल तक पहुँचाता है। वही है जो अपनी रहमत (बारिश) से पहले हवाओं को ख़ुशख़बरी देने वाली बनाकर भेजता है, ताकि वे बादलों को उठाएँ और बारिश की ख़ुशख़बरी लेकर आएँ, जिससे मुर्दा ज़मीन ज़िंदा हो जाती है।
फिर अल्लाह तआला सवाल करता है: "क्या अल्लाह के साथ कोई और माबूद भी है जो ये काम कर सके?" बिल्कुल नहीं! ये सब काम सिर्फ़ अल्लाह ही करता है। फिर भी तुम उसके साथ दूसरों को क्यों पूजते हो? अल्लाह उन सब चीज़ों से पाक और बुलंद है जिन्हें लोग उसका साझी बनाते हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें उस अल्लाह की तरफ़ ध्यान दिलाती है जिसकी रहमत और मेहरबानी हर जगह हमें घेरे हुए है। जब हम सफ़र में होते हैं और रास्ता भटक जाते हैं, तो कौन हमें रास्ता दिखाता है? जब हम मुसीबत में होते हैं, तो कौन हमें निकालता है? यही अल्लाह है। वह हमसे इतना प्यार करता है कि उसने हवाओं को भी अपनी रहमत का पैग़ाम बना दिया। तो क्या हमें उसी की इबादत नहीं करनी चाहिए? क्या उसी का शुक्र अदा नहीं करना चाहिए? यह आयत हमें तौहीद (एकेश्वरवाद) की तरफ़ बुलाती है और शिर्क से बचाती है। जो व्यक्ति अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसे हर अंधेरे से निकालकर रोशनी की तरफ़ ले जाता है। आओ, हम सब अपने दिलों को सिर्फ़ अल्लाह से जोड़ें और उसी से मदद माँगें, क्योंकि वही सब कुछ करने की क़ुदरत रखता है।
📜 आयत 61-65 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 63
सूरा अन-नमल आयत 63 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : भला वह कौन है जो तुम लोगों की ख़़ुश्की और…सूरा आयत 63/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 61–65. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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