Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- قَرَارًا: स्थिर रहने की जगह, ठहरने के लिए पृथ्वी को स्थिर बनाया।
- خِلَالَهَا: उसके बीचों-बीच, अंदरूनी हिस्से में।
- رَوَاسِيَ: पहाड़, जो पृथ्वी को जमाए रखते हैं।
- حَاجِزًا: रोकने वाली दीवार या सीमा, जो दोनों समुद्रों को मिलने से रोकती है।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत मुशरिकों (बहुदेववादियों) को उनके गलत विश्वास पर टोकती है और उन्हें सोचने पर मजबूर करती है। अल्लाह तआला फरमाता है: क्या वे माबूद (पूज्य) जिन्हें तुम अल्लाह के साथ शरीक ठहराते हो, बेहतर हैं या वह अल्लाह जिसने इस धरती को तुम्हारे लिए स्थिर और ठहरने योग्य बनाया? उसने इस धरती के बीचों-बीच नदियाँ जारी कीं, ताकि तुम्हें पीने का साफ पानी मिले और खेती-बाग़ सींचे जा सकें। उसने इस धरती पर पहाड़ों को मजबूत खूँटों की तरह गाड़ दिया, ताकि वह तुम्हें लेकर डगमगाए नहीं और तुम सुरक्षित रहो। और उसने मीठे और खारे समुद्रों के बीच एक ऐसा पर्दा और रुकावट बना दी है जो उन्हें आपस में मिलने से रोकती है, ताकि मीठा पानी खारा न हो जाए और खारा पानी मीठे को खराब न कर दे।
फिर अल्लाह तआला पूछता है: क्या इन सारे कामों को करने वाला कोई और माबूद है जो अल्लाह के साथ पूजा का हक़दार हो? हरगिज़ नहीं! ये सारे काम सिर्फ़ अल्लाह ही कर सकता है। लेकिन इनमें से अधिकतर लोग जानते नहीं, यानी वे अल्लाह की क़ुदरत और अज़मत को नहीं समझते। अगर वे समझते, तो कभी किसी मख़लूक़ (पैदा की हुई चीज़) को अल्लाह का शरीक नहीं बनाते।
दावती पहलू:
यह आयत हमें प्रकृति की हर चीज़ में अल्लाह की निशानियाँ देखने की तालीम देती है। जब हम धरती पर चलते हैं, नदियों का बहाव देखते हैं, पहाड़ों की बुलंदी देखते हैं, और समुद्रों के बीच अल्लाह का बनाया हुआ पर्दा देखते हैं, तो हमारा दिल अपने रब की महानता के आगे झुक जाता है। यह आयत हमें बुलाती है कि हम अपनी फ़ितरत (स्वभाव) की तरफ लौटें, सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करें, और उसके साथ किसी को शरीक न करें। जो व्यक्ति इन निशानियों पर ग़ौर करता है, उसका ईमान मज़बूत होता है और वह दुनिया की हर चीज़ में अपने रब की रहमत और हिकमत देखता है। यही सच्ची कामयाबी है — कि हम अल्लाह को पहचानें, उसकी नेमतों का शुक्र अदा करें, और उसी की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें।
📜 आयत 59-63 — सूरा अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 61
सूरा अन-नमल आयत 61 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : भला वह कौन है जिसने ज़मीन को (लोगों के) ठहरने…सूरा आयत 61/93 — सूरा अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नमल सुनें, सूरा अन-नमल अनुवाद, सूरा अन-नमल mp3, सूरा अन-नमल pdf. आयत 59–63. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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