अन-नमल · 61/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
أَمَّن جَعَلَ الْأَرْضَ قَرَارًا وَجَعَلَ خِلَالَهَا أَنْهَارًا وَجَعَلَ لَهَا رَوَاسِيَ وَجَعَلَ بَيْنَ الْبَحْرَيْنِ حَاجِزًا ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ ۝٦١
Ammann ja`alal arda qaraaranw wa ja`ala khilaalahaaa anhaaranw wa ja`ala lahaa rawaasiya wa ja`ala bainal bahraini haajizaa; `a-ilaahumma`allah; bal aksaruhum la ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
भला वह कौन है जिसने ज़मीन को (लोगों के) ठहरने की जगह बनाया और उसके दरमियान जा बजा नहरें दौड़ायी और उसकी मज़बूती के वास्ते पहाड़ बनाए और (मीठे खारी) दरियाओं के दरमियान हदे फासिल बनाया तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) बल्कि उनमें के अकसर कुछ जानते ही नहीं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قَرَارًا: स्थिर रहने की जगह, ठहरने के लिए पृथ्वी को स्थिर बनाया।
  • خِلَالَهَا: उसके बीचों-बीच, अंदरूनी हिस्से में।
  • رَوَاسِيَ: पहाड़, जो पृथ्वी को जमाए रखते हैं।
  • حَاجِزًا: रोकने वाली दीवार या सीमा, जो दोनों समुद्रों को मिलने से रोकती है।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत मुशरिकों (बहुदेववादियों) को उनके गलत विश्वास पर टोकती है और उन्हें सोचने पर मजबूर करती है। अल्लाह तआला फरमाता है: क्या वे माबूद (पूज्य) जिन्हें तुम अल्लाह के साथ शरीक ठहराते हो, बेहतर हैं या वह अल्लाह जिसने इस धरती को तुम्हारे लिए स्थिर और ठहरने योग्य बनाया? उसने इस धरती के बीचों-बीच नदियाँ जारी कीं, ताकि तुम्हें पीने का साफ पानी मिले और खेती-बाग़ सींचे जा सकें। उसने इस धरती पर पहाड़ों को मजबूत खूँटों की तरह गाड़ दिया, ताकि वह तुम्हें लेकर डगमगाए नहीं और तुम सुरक्षित रहो। और उसने मीठे और खारे समुद्रों के बीच एक ऐसा पर्दा और रुकावट बना दी है जो उन्हें आपस में मिलने से रोकती है, ताकि मीठा पानी खारा न हो जाए और खारा पानी मीठे को खराब न कर दे।

फिर अल्लाह तआला पूछता है: क्या इन सारे कामों को करने वाला कोई और माबूद है जो अल्लाह के साथ पूजा का हक़दार हो? हरगिज़ नहीं! ये सारे काम सिर्फ़ अल्लाह ही कर सकता है। लेकिन इनमें से अधिकतर लोग जानते नहीं, यानी वे अल्लाह की क़ुदरत और अज़मत को नहीं समझते। अगर वे समझते, तो कभी किसी मख़लूक़ (पैदा की हुई चीज़) को अल्लाह का शरीक नहीं बनाते।

दावती पहलू:

यह आयत हमें प्रकृति की हर चीज़ में अल्लाह की निशानियाँ देखने की तालीम देती है। जब हम धरती पर चलते हैं, नदियों का बहाव देखते हैं, पहाड़ों की बुलंदी देखते हैं, और समुद्रों के बीच अल्लाह का बनाया हुआ पर्दा देखते हैं, तो हमारा दिल अपने रब की महानता के आगे झुक जाता है। यह आयत हमें बुलाती है कि हम अपनी फ़ितरत (स्वभाव) की तरफ लौटें, सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करें, और उसके साथ किसी को शरीक न करें। जो व्यक्ति इन निशानियों पर ग़ौर करता है, उसका ईमान मज़बूत होता है और वह दुनिया की हर चीज़ में अपने रब की रहमत और हिकमत देखता है। यही सच्ची कामयाबी है — कि हम अल्लाह को पहचानें, उसकी नेमतों का शुक्र अदा करें, और उसी की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें।

🎧 सुनें

📜 आयत 59-63 — अन-नमल

59قُلِ الْحَمْدُ لِلَّهِ وَسَلَامٌ عَلَىٰ عِبَادِهِ الَّذِينَ اصْطَفَىٰ ۗ آللَّهُ خَيْرٌ أَمَّا يُشْرِكُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो (उनके हलाक़ होने पर) खुदा का शुक्र और उसके बरगुज़ीदा बन्दों पर सलाम भला ख़ुदा बेहतर है या वह चीज़ जिसे ये लोग शरीके ख़ुदा कहते हैं
60أَمَّنْ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَنبَتْنَا بِهِ حَدَائِقَ ذَاتَ بَهْجَةٍ مَّا كَانَ لَكُمْ أَن تُنبِتُوا شَجَرَهَا ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ يَعْدِلُونَ
भला वह कौन है जिसने आसमान और ज़मीन को पैदा किया और तुम्हारे वास्ते आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने पानी से दिल चस्प (ख़ुशनुमा) बाग़ उठाए तुम्हारे तो ये बस की बात न थी कि तुम उनके दरख्तों को उगा सकते तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) बल्कि ये लोग खुद अपने जी से गढ़ के बुतो को उसके बराबर बनाते हैं
61أَمَّن جَعَلَ الْأَرْضَ قَرَارًا وَجَعَلَ خِلَالَهَا أَنْهَارًا وَجَعَلَ لَهَا رَوَاسِيَ وَجَعَلَ بَيْنَ الْبَحْرَيْنِ حَاجِزًا ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
भला वह कौन है जिसने ज़मीन को (लोगों के) ठहरने की जगह बनाया और उसके दरमियान जा बजा नहरें दौड़ायी और उसकी मज़बूती के वास्ते पहाड़ बनाए और (मीठे खारी) दरियाओं के दरमियान हदे फासिल बनाया तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) बल्कि उनमें के अकसर कुछ जानते ही नहीं
62أَمَّن يُجِيبُ الْمُضْطَرَّ إِذَا دَعَاهُ وَيَكْشِفُ السُّوءَ وَيَجْعَلُكُمْ خُلَفَاءَ الْأَرْضِ ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ قَلِيلًا مَّا تَذَكَّرُونَ
भला वह कौन है कि जब मुज़तर उसे पुकारे तो दुआ क़ुबूल करता है और मुसीबत को दूर करता है और तुम लोगों को ज़मीन में (अपना) नायब बनाता है तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद है (हरगिज़ नहीं) उस पर भी तुम लोग बहुत कम नसीहत व इबरत हासिल करते हो
63أَمَّن يَهْدِيكُمْ فِي ظُلُمَاتِ الْبَرِّ وَالْبَحْرِ وَمَن يُرْسِلُ الرِّيَاحَ بُشْرًا بَيْنَ يَدَيْ رَحْمَتِهِ ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ تَعَالَى اللَّهُ عَمَّا يُشْرِكُونَ
भला वह कौन है जो तुम लोगों की ख़़ुश्की और तरी की तारिक़ियों में राह दिखाता है और कौन उसकी बाराने रहमत के आगे आगे (बारिश की) ख़ुशखबरी लेकर हवाओं को भेजता है-क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) ये लोग जिन चीज़ों को ख़ुदा का शरीक ठहराते हैं ख़ुदा उससे बालातर है
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अनुवाद — अन-नमल 61

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Tuesday, August 18, 2026

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