अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- خَائِفًا — डरा हुआ, भयभीत।
- يَتَرَقَّبُ — इंतज़ार करना, टोह लेना, देखते रहना कि क्या होता है।
- يَسْتَصْرِخُهُ — चिल्ला कर मदद माँगना, फ़रियाद करना।
- لَغَوِيٌّ — बड़ा गुमराह, भटका हुआ, झगड़ालू।
- مُبِينٌ — स्पष्ट, ज़ाहिर।
तफ़सीर:
जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उस क़िब्ती (मिस्री) को मुक्का मारा और वह मर गया, तो वे रातों-रात उस शहर में डरते हुए सुबह तक पहुँचे। उनका दिल ख़ौफ़ से काँप रहा था, और वे हर पल यह देखते रहते थे कि कहीं फ़िरऔन के लोग उन्हें पकड़ने न आ जाएँ। वे इस बात की टोह में थे कि लोग उनके बारे में क्या कह रहे हैं और उनके इस क़त्ल का क्या अंजाम होगा।
तभी अचानक वही इस्राईली (बनी इस्राईल का आदमी) जिसने कल उनसे मदद माँगी थी, आज फिर चिल्लाता हुआ दौड़ा आया और दूसरे क़िब्ती से लड़ते हुए मूसा (अलैहिस्सलाम) से फिर मदद की गुहार लगाने लगा। यह देखकर मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उससे कहा: "तू तो साफ़ तौर पर बड़ा ही झगड़ालू और गुमराह इंसान है! कल तूने एक आदमी की जान का बाइस बना, और आज फिर दूसरे से लड़ने पर आमादा है। तेरी यह हरकतें तो यही बताती हैं कि तू हमेशा फ़साद और झगड़े पर उतारू रहता है।"
इस आयत में हमें मूसा (अलैहिस्सलाम) की बेहद सूझ-बूझ और हक़ की बात कहने का सबक़ मिलता है। वे एक नबी थे, फिर भी उन्होंने साफ़-साफ़ उस शख़्स को उसकी ग़लती बता दी, क्योंकि सच बोलना और ग़लत काम पर टोकना हर हाल में ज़रूरी है। साथ ही यह भी सीख मिलती है कि इंसान को चाहिए कि वह झगड़ों और लड़ाई-झगड़े से बचे, क्योंकि झगड़ा इंसान को बड़ी मुसीबतों में डाल सकता है। मूसा (अलैहिस्सलाम) की यह हालत देखकर हमें यह भी समझना चाहिए कि नेक लोग भी जब ग़लत माहौल में होते हैं तो उन्हें एहतियात बरतनी पड़ती है, और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि मुसीबत के वक़्त अल्लाह ही सबसे बड़ा सहारा है, और वही अपने नेक बंदों को राह दिखाता है।
📜 आयत 16-20 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 18
सूरा अल-क़सस आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ग़रज़ (रात तो जो त्यों गुज़री) सुबह को उम्मीदो बीम…सूरा आयत 18/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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