अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَبْطِشَ: पकड़ना, हमला करना, मारने के लिए झपटना
- عَدُوٌّ لَّهُمَا: उन दोनों (मूसा और इस्राईली) का दुश्मन
- جَبَّارًا: ज़ालिम, सरकश, जो बिना हक़ के लोगों को मारे
- الْمُصْلِحِينَ: सुधार करने वाले, लोगों के बीच भलाई और इंसाफ़ फैलाने वाले
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने देखा कि वह क़िब्ती (फ़िरऔन का आदमी) इस्राईली व्यक्ति पर ज़ुल्म कर रहा है और उसे मार रहा है, तो उन्होंने उस ज़ालिम को सबक़ सिखाने का इरादा किया। उन्होंने उस दुश्मन पर हमला करने के लिए हाथ बढ़ाया। लेकिन इस्राईली व्यक्ति, जो पहले ही मूसा अलैहिस्सलाम की मदद माँग चुका था, ने यह देखकर ग़लतफ़हमी में पड़ गया। उसने सोचा कि मूसा उसे ही मारने वाले हैं, क्योंकि उसने अभी-अभी मूसा को यह कहते सुना था: "तू तो बड़ा झगड़ालू है" (जब मूसा ने उसे डाँटा था)। इसलिए वह चिल्लाया: "ऐ मूसा! क्या तू मुझे मारना चाहता है, जैसे तूने कल एक व्यक्ति को मार डाला था? तू तो बस यही चाहता है कि धरती में ज़ालिम और सरकश बन जाए, और तू सुधार करने वालों में से नहीं बनना चाहता!"
यह बात सुनकर लोगों को पता चल गया कि कल जो व्यक्ति मारा गया था, उसे मूसा ने मारा था। यह ख़बर फ़िरऔन तक पहुँची और उसने मूसा को पकड़ने का इरादा किया। इस प्रकार यह घटना मूसा अलैहिस्सलाम के लिए मिस्र छोड़ने का कारण बनी, और अल्लाह ने उन्हें मदयन की ओर हिजरत करने का रास्ता दिखाया।
दीनी पैग़ाम:
इस आयत से हमें कई महत्वपूर्ण सबक़ मिलते हैं। पहला यह कि जल्दबाज़ी और ग़लतफ़हमी में किसी के बारे में बुरा गुमान नहीं करना चाहिए। इस्राईली व्यक्ति ने मूसा अलैहिस्सलाम के बारे में ग़लत अंदाज़ा लगाया, जबकि मूसा तो उसकी मदद करना चाहते थे। दूसरा यह कि इंसान को हमेशा इंसाफ़ और सुधार का रास्ता अपनाना चाहिए, जैसा मूसा अलैहिस्सलाम चाहते थे। वह ज़ुल्म के खिलाफ़ खड़े हुए, लेकिन उनका मक़सद किसी को मारना नहीं था, बल्कि मज़लूम की मदद करना था। तीसरा यह कि अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है और मुश्किल वक़्त में उनके लिए निकलने का रास्ता बनाता है। मूसा अलैहिस्सलाम ने जब दुश्मन के डर से मिस्र छोड़ा, तो अल्लाह ने उन्हें नबुव्वत से नवाज़ा और उन्हें फ़िरऔन जैसे ज़ालिम के मुक़ाबले में कामयाबी दी। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम ज़ुल्म के खिलाफ़ आवाज़ उठाएँ, लेकिन हमेशा अल्लाह पर भरोसा रखें, क्योंकि अल्लाह ही सबसे बड़ा मददगार है।
📜 आयत 17-21 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 19
सूरा अल-क़सस आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ग़रज़ जब मूसा ने चाहा कि उस शख्स पर जो…सूरा आयत 19/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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