अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْكِتَابَ: तौरात (मूसा अलैहिस्सलाम को दी गई पवित्र किताब)।
- الْقُرُونَ الْأُولَىٰ: पहले ज़माने की उम्मतें, जैसे क़ौमे नूह, आद, समूद, क़ौमे लूत और मदयन के लोग।
- بَصَائِرَ: यह 'बसीरत' का बहुवचन है, जिसका अर्थ है दिल की रोशनी (जैसे आँख की रोशनी को बसर कहते हैं)। यानी ऐसी चीज़ें जिनसे लोग सत्य को देख सकें और समझ सकें।
- هُدًى: मार्गदर्शन, गुमराही से निकालकर सीधे रास्ते पर लाने वाली चीज़।
- رَحْمَةً: रहमत, यानी अल्लाह की विशेष दया और कृपा।
- يَتَذَكَّرُونَ: वे नसीहत हासिल करें, सीख लें और याद रखें।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी बड़ी मेहरबानी और हिकमत का ज़िक्र किया है। उसने मूसा अलैहिस्सलाम को तौरात जैसी अज़ीम किताब उस समय अता की, जब पहले की कई उम्मतों को उनके कुफ्र और नबियों को झुठलाने की वजह से हलाक (विनष्ट) कर दिया गया था। यानी अल्लाह ने पहले उन लोगों को सज़ा दी जिन्होंने हक़ को नकारा, और फिर मूसा अलैहिस्सलाम को किताब देकर बनी इस्राईल पर अपनी रहमत का दरवाज़ा खोला।
यह किताब (तौरात) लोगों के लिए 'बसीरत' यानी दिलों की रोशनी बनकर आई, ताकि वे भलाई और बुराई में फर्क कर सकें। जो चीज़ उनके लिए फायदेमंद थी, उसे अपनाएँ और जो नुकसानदेह थी, उसे छोड़ दें। यह 'हिदायत' (मार्गदर्शन) थी, जो उन्हें गुमराही और अंधेरे से निकालकर सीधे रास्ते पर लाती थी। और यह 'रहमत' थी, क्योंकि इसमें दुनिया और आख़िरत की भलाईयाँ मौजूद थीं — जो कोई इस पर अमल करता, उसके लिए यह दोनों जहान की कामयाबी का ज़रिया बनती।
अल्लाह का मक़सद यह था कि लोग उसकी नेअमतों को याद करें, उसका शुक्र अदा करें और उसकी इबादत में लग जाएँ। वह चाहता था कि वे उन पिछली उम्मतों के अंजाम से सबक लें जिन्होंने हक़ को ठुकराया और हलाक हो गईं।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों पर कितना मेहरबान है। जब भी इंसान गुमराही में डूबता है, अल्लाह उसे निकालने के लिए हिदायत का ज़रिया भेजता है। आज हमारे पास कुरआन है, जो तौरात से भी बढ़कर पूरी इंसानियत के लिए रहमत और हिदायत है। यह हमारे लिए बसीरत है — अगर हम इसे पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, तो यह हमारे दिलों को रोशन करेगी, हमारी ज़िंदगी को सँवारेगी और हमें दुनिया व आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाएगी।
अल्लाह ने हमें यह नेअमत इसलिए दी है ताकि हम उसकी याद करें, उसका शुक्र अदा करें और उसकी राह पर चलें। आइए, हम कुरआन को अपनी ज़िंदगी में उतारें, उसकी तालीमात पर अमल करें और उस रहमत का हक़ अदा करें जो अल्लाह ने हम पर की है। यही हमारी कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 41-45 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 43
सूरा अल-क़सस आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने बहुतेरी अगली उम्मतों को हलाक कर डाला उसके…सूरा आयत 43/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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