अल-क़सस · 44/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
وَمَا كُنتَ بِجَانِبِ الْغَرْبِيِّ إِذْ قَضَيْنَا إِلَىٰ مُوسَى الْأَمْرَ وَمَا كُنتَ مِنَ الشَّاهِدِينَ ۝٤٤
Wa maa kunta bijaanibil gharbiyyi iz qadainaaa ilaa Moosal amra wa maa kunta minash shaahideen
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) जिस वक्त हमने मूसा के पास अपना हुक्म भेजा था तो तुम (तूर के) मग़रिबी जानिब मौजूद न थे और न तुम उन वाक्यात को चश्मदीद देखने वालों में से थे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِجَانِبِ الْغَرْبِيِّ: पश्चिमी दिशा की ओर (पर्वत के पश्चिमी किनारे पर)
  • قَضَيْنَا: हमने निर्धारित किया, आदेश दिया, या वचन दिया
  • الْأَمْر: यहाँ अर्थ है रिसालत (पैग़म्बरी) का मामला, यानी मूसा (अलैहिस्सलाम) को फ़िरऔन की ओर भेजने का आदेश
  • الشَّاهِدِينَ: उपस्थित लोग, गवाह

तफ़सीर:

ऐ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)! आप उस पश्चिमी पहाड़ के किनारे मौजूद नहीं थे, जब हमने मूसा (अलैहिस्सलाम) को अपना आदेश सौंपा था—यानी उन्हें रिसालत का महान कार्यभार देकर फ़िरऔन और उसकी क़ौम की ओर भेजा था। न ही आप उन गवाहों में से थे जो उस ऐतिहासिक घटना के समय वहाँ उपस्थित थे। तो फिर आपको यह सब ज्ञान कैसे हुआ? यह केवल उसी का बताया हुआ है जो हर चीज़ का जानने वाला है—अल्लाह तआला।

यह आयत नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सच्चाई का एक जीता-जागता प्रमाण है। आप न पढ़े-लिखे थे, न किसी किताब के जानकार थे, न उन इलाक़ों में गए थे, और न ही उन लोगों से मिले थे जो यहूदी इतिहास और पुरानी किताबों के जानकार थे। फिर भी आपने मूसा (अलैहिस्सलाम) की कहानी के वे बारीक विवरण बयान किए जो केवल उसी समय के गवाहों को मालूम हो सकते थे। यह इस बात का स्पष्ट सबूत है कि यह क़ुरआन अल्लाह का कलाम है और आप सच्चे रसूल हैं।

इस आयत में हमारे लिए एक बड़ी सीख है कि अल्लाह तआला अपने नबी को वे बातें सिखाता है जो उन्होंने कभी देखी या सुनी नहीं थीं। यह उसकी क़ुदरत की निशानी है और उसके इल्म की असीमितता का प्रमाण है। जिस अल्लाह ने अपने नबी को यह ग़ैबी ख़बरें दीं, वही हमें भी सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ देता है।

ऐ मुसलमानों! जब हम यह देखते हैं कि अल्लाह ने अपने नबी को इतनी बड़ी नेमत दी—ग़ैब की ख़बरें और वही का इल्म—तो हमें चाहिए कि हम क़ुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह तआला हम सबको क़ुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 42-46 — अल-क़सस

42وَأَتْبَعْنَاهُمْ فِي هَٰذِهِ الدُّنْيَا لَعْنَةً ۖ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ هُم مِّنَ الْمَقْبُوحِينَ
और हमने दुनिया में भी तो लानत उन के पीछे लगा दी है और क़यामत के दिन उनके चेहरे बिगाड़ दिए जायेंगे
43وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ مِن بَعْدِ مَا أَهْلَكْنَا الْقُرُونَ الْأُولَىٰ بَصَائِرَ لِلنَّاسِ وَهُدًى وَرَحْمَةً لَّعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
और हमने बहुतेरी अगली उम्मतों को हलाक कर डाला उसके बाद मूसा को किताब (तौरैत) अता की जो लोगों के लिए अजसरतापा बसीरत और हिदायत और रहमत थी ताकि वह लोग इबरत व नसीहत हासिल करें
44وَمَا كُنتَ بِجَانِبِ الْغَرْبِيِّ إِذْ قَضَيْنَا إِلَىٰ مُوسَى الْأَمْرَ وَمَا كُنتَ مِنَ الشَّاهِدِينَ
और (ऐ रसूल) जिस वक्त हमने मूसा के पास अपना हुक्म भेजा था तो तुम (तूर के) मग़रिबी जानिब मौजूद न थे और न तुम उन वाक्यात को चश्मदीद देखने वालों में से थे
45وَلَٰكِنَّا أَنشَأْنَا قُرُونًا فَتَطَاوَلَ عَلَيْهِمُ الْعُمُرُ ۚ وَمَا كُنتَ ثَاوِيًا فِي أَهْلِ مَدْيَنَ تَتْلُو عَلَيْهِمْ آيَاتِنَا وَلَٰكِنَّا كُنَّا مُرْسِلِينَ
मगर हमने (मूसा के बाद) बहुतेरी उम्मतें पैदा की फिर उन पर एक ज़माना दराज़ गुज़र गया और न तुम मदैन के लोगों में रहे थे कि उनके सामने हमारी आयते पढ़ते (और न तुम को उन के हालात मालूम होते) मगर हम तो (तुमको) पैग़म्बर बनाकर भेजने वाले थे
46وَمَا كُنتَ بِجَانِبِ الطُّورِ إِذْ نَادَيْنَا وَلَٰكِن رَّحْمَةً مِّن رَّبِّكَ لِتُنذِرَ قَوْمًا مَّا أَتَاهُم مِّن نَّذِيرٍ مِّن قَبْلِكَ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
और न तुम तूर की किसी जानिब उस वक्त मौजूद थे जब हमने (मूसा को) आवाज़ दी थी (ताकि तुम देखते) मगर ये तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी है ताकि तुम उन लोगों को जिनके पास तुमसे पहले कोई डराने वाला आया ही नहीं डराओ ताकि ये लोग नसीहत हासिल करें
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अनुवाद — अल-क़सस 44

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Tuesday, August 18, 2026

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