अल-अंकबूत · 18/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
وَإِن تُكَذِّبُوا فَقَدْ كَذَّبَ أُمَمٌ مِّن قَبْلِكُمْ ۖ وَمَا عَلَى الرَّسُولِ إِلَّا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ ۝١٨
Wa in tukazziboo faqad kazzaba umamum min qablikum wa maa`alar Rasooli illal balaaghul mubeen
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ अहले मक्का) अगर तुमने (मेरे रसूल को) झुठलाया तो (कुछ परवाह नहीं) तुमसे पहले भी तो बहुतेरी उम्मते (अपने पैग़म्बरों को) झुठला चुकी हैं और रसूल के ज़िम्मे तो सिर्फ (एहक़ाम का) पहुँचा देना है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تُكَذِّبُوا: तुम झुठलाओ
  • أُمَمٌ: समुदाय, पिछली उम्मतें
  • الْبَلَاغُ الْمُبِينُ: स्पष्ट रूप से संदेश पहुँचा देना

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ लोगों! अगर तुम हमारे रसूल मुहम्मद ﷺ को झुठलाते हो और उनके द्वारा लाए गए सत्य को नकारते हो, तो यह कोई नई बात नहीं है। तुमसे पहले भी कई उम्मतें अपने नबियों को झुठला चुकी हैं। नूह की क़ौम, आद और समूद के लोग, और उनके बाद आने वाली अन्य उम्मतों ने भी अपने रसूलों को झुठलाया था। उन्होंने भी यही कहा था कि ये लोग हमारे जैसे ही इंसान हैं, और उन पर ईमान लाने से इनकार कर दिया था। लेकिन देखो उनका अंजाम क्या हुआ! अल्लाह का क्रोध उन पर नाज़िल हुआ और वे सब के सब तबाह कर दिए गए।

अल्लाह के रसूल का काम केवल यह है कि वह अल्लाह का संदेश लोगों तक स्पष्ट रूप से पहुँचा दे। उन्होंने यह काम पूरी अमानतदारी और स्पष्टता के साथ अंजाम दिया है। उन्होंने तुम्हें सच्चाई बता दी, सीधा रास्ता दिखा दिया, और जो कुछ अल्लाह ने उन्हें आदेश दिया था, वह सब तुम तक पहुँचा दिया। अब हर इंसान अपने कर्मों का जिम्मेदार खुद है। जो ईमान लाएगा और अच्छे कर्म करेगा, उसका इनाम अल्लाह के पास है, और जो झुठलाएगा और सत्य से मुँह मोड़ेगा, उसका अंजाम वही होगा जो पिछली उम्मतों का हुआ।

दावती पहलू:

यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक देती है कि सत्य को झुठलाने वालों का अंजाम हमेशा बुरा रहा है। अल्लाह के रसूलों ने कभी भी लोगों को मजबूर नहीं किया, बल्कि उन्होंने केवल स्पष्ट रूप से संदेश पहुँचाया और लोगों को सही रास्ता दिखाया। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने हमें रसूल भेजे और किताबें उतारीं, ताकि हम अंधेरे में न भटकें। आज भी हमारे पास कुरआन और सुन्नत है, जो हमें सीधा रास्ता दिखाते हैं। हमें चाहिए कि हम इस नेमत की क़द्र करें, उस पर अमल करें, और अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें। याद रखिए, रसूल का काम पहुँचाना था और उन्होंने पहुँचा दिया, अब हमारा काम है कि हम उसे सुनें, समझें और उस पर चलें। यही हमारी कामयाबी और नजात का ज़रिया है।

🎧 सुनें

📜 आयत 16-20 — अल-अंकबूत

16وَإِبْرَاهِيمَ إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ اعْبُدُوا اللَّهَ وَاتَّقُوهُ ۖ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
और इबराहीम को (याद करो) जब उन्होंने कहा कि (भाईयों) ख़ुदा की इबादत करो और उससे डरो अगर तुम समझते बूझते हो तो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है
17إِنَّمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ أَوْثَانًا وَتَخْلُقُونَ إِفْكًا ۚ إِنَّ الَّذِينَ تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ لَا يَمْلِكُونَ لَكُمْ رِزْقًا فَابْتَغُوا عِندَ اللَّهِ الرِّزْقَ وَاعْبُدُوهُ وَاشْكُرُوا لَهُ ۖ إِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
(मगर) तुम लोग तो ख़ुदा को छोड़कर सिर्फ बुतों की परसतिश करते हैं और झूठी बातें (अपने दिल से) गढ़ते हो इसमें तो शक ही नहीं कि ख़ुदा को छोड़कर जिन लोगों की तुम परसतिश करते हो वह तुम्हारी रोज़ी का एख्तेयार नही रखते-बस ख़ुदा ही से रोज़ी भी माँगों और उसकी इबादत भी करो उसका शुक्र करो (क्योंकि) तुम लोग (एक दिन) उसी की तरफ लौटाए जाओगे
18وَإِن تُكَذِّبُوا فَقَدْ كَذَّبَ أُمَمٌ مِّن قَبْلِكُمْ ۖ وَمَا عَلَى الرَّسُولِ إِلَّا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ
और (ऐ अहले मक्का) अगर तुमने (मेरे रसूल को) झुठलाया तो (कुछ परवाह नहीं) तुमसे पहले भी तो बहुतेरी उम्मते (अपने पैग़म्बरों को) झुठला चुकी हैं और रसूल के ज़िम्मे तो सिर्फ (एहक़ाम का) पहुँचा देना है
19أَوَلَمْ يَرَوْا كَيْفَ يُبْدِئُ اللَّهُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرٌ
बस क्या उन लोगों ने इस पर ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा किस तरह मख़लूकात को पहले पहल पैदा करता है और फिर उसको दोबारा पैदा करेगा ये तो ख़ुदा के नज़दीक बहुत आसान बात है
20قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ بَدَأَ الْخَلْقَ ۚ ثُمَّ اللَّهُ يُنشِئُ النَّشْأَةَ الْآخِرَةَ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
(ऐ रसूल इन लोगों से) तुम कह दो कि ज़रा रुए ज़मीन पर चलफिर कर देखो तो कि ख़ुदा ने किस तरह पहले पहल मख़लूक को पैदा किया फिर (उसी तरह वही) ख़ुदा (क़यामत के दिन) आखिरी पैदाइश पैदा करेगा- बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीRevelation
18आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 18

सूरा अल-अंकबूत आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ अहले मक्का) अगर तुमने (मेरे रसूल को) झुठलाया…

सूरा आयत 18/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए