Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تُكَذِّبُوا: तुम झुठलाओ
- أُمَمٌ: समुदाय, पिछली उम्मतें
- الْبَلَاغُ الْمُبِينُ: स्पष्ट रूप से संदेश पहुँचा देना
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ लोगों! अगर तुम हमारे रसूल मुहम्मद ﷺ को झुठलाते हो और उनके द्वारा लाए गए सत्य को नकारते हो, तो यह कोई नई बात नहीं है। तुमसे पहले भी कई उम्मतें अपने नबियों को झुठला चुकी हैं। नूह की क़ौम, आद और समूद के लोग, और उनके बाद आने वाली अन्य उम्मतों ने भी अपने रसूलों को झुठलाया था। उन्होंने भी यही कहा था कि ये लोग हमारे जैसे ही इंसान हैं, और उन पर ईमान लाने से इनकार कर दिया था। लेकिन देखो उनका अंजाम क्या हुआ! अल्लाह का क्रोध उन पर नाज़िल हुआ और वे सब के सब तबाह कर दिए गए।
अल्लाह के रसूल का काम केवल यह है कि वह अल्लाह का संदेश लोगों तक स्पष्ट रूप से पहुँचा दे। उन्होंने यह काम पूरी अमानतदारी और स्पष्टता के साथ अंजाम दिया है। उन्होंने तुम्हें सच्चाई बता दी, सीधा रास्ता दिखा दिया, और जो कुछ अल्लाह ने उन्हें आदेश दिया था, वह सब तुम तक पहुँचा दिया। अब हर इंसान अपने कर्मों का जिम्मेदार खुद है। जो ईमान लाएगा और अच्छे कर्म करेगा, उसका इनाम अल्लाह के पास है, और जो झुठलाएगा और सत्य से मुँह मोड़ेगा, उसका अंजाम वही होगा जो पिछली उम्मतों का हुआ।
दावती पहलू:
यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक देती है कि सत्य को झुठलाने वालों का अंजाम हमेशा बुरा रहा है। अल्लाह के रसूलों ने कभी भी लोगों को मजबूर नहीं किया, बल्कि उन्होंने केवल स्पष्ट रूप से संदेश पहुँचाया और लोगों को सही रास्ता दिखाया। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने हमें रसूल भेजे और किताबें उतारीं, ताकि हम अंधेरे में न भटकें। आज भी हमारे पास कुरआन और सुन्नत है, जो हमें सीधा रास्ता दिखाते हैं। हमें चाहिए कि हम इस नेमत की क़द्र करें, उस पर अमल करें, और अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें। याद रखिए, रसूल का काम पहुँचाना था और उन्होंने पहुँचा दिया, अब हमारा काम है कि हम उसे सुनें, समझें और उस पर चलें। यही हमारी कामयाबी और नजात का ज़रिया है।
📜 आयत 16-20 — सूरा अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 18
सूरा अल-अंकबूत आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ अहले मक्का) अगर तुमने (मेरे रसूल को) झुठलाया…सूरा आयत 18/69 — सूरा अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंकबूत सुनें, सूरा अल-अंकबूत अनुवाद, सूरा अल-अंकबूत mp3, सूरा अल-अंकबूत pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अंकबूत
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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