Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- औसान (أوثانًا): मूर्तियाँ, बुत
- तख़्लुक़ून (تَخْلُقُونَ): तुम गढ़ते हो, रचते हो
- इफ़्क़ (إفكًا): झूठ, असत्य बात
- यम्लिकून (يَمْلِكُونَ): वे अधिकार नहीं रखते
- रिज़्क़ (رِزْقًا): आजीविका, रोज़ी
- फ़ब्तग़ू (فَابْتَغُوا): तो तलाश करो, खोजो
- तुरजऊन (تُرْجَعُونَ): तुम लौटाए जाओगे
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यह बड़े अफ़सोस की बात है कि तुम अल्लाह को छोड़कर सिर्फ़ उन मूर्तियों की पूजा करते हो जिन्हें तुमने खुद अपने हाथों से बनाया है। और साथ ही तुम झूठ गढ़ते हो कि ये मूर्तियाँ पूजा की हक़दार हैं और ये तुम्हारी मदद कर सकती हैं। यह सबसे बड़ा झूठ और असत्य है।
ज़रा सोचो — जिन मूर्तियों को तुम पूजते हो, क्या वे तुम्हें रोज़ी दे सकती हैं? क्या वे तुम्हारे लिए खाना, पानी, धन-दौलत या कोई भी चीज़ मुहैया कर सकती हैं? हरगिज़ नहीं! वे तो न तो किसी को नुक़सान पहुँचा सकती हैं और न ही किसी को फ़ायदा। वे तो बेजान हैं, उनमें कोई ताक़त ही नहीं।
तो फिर रोज़ी किससे माँगो? रोज़ी तो सिर्फ़ अल्लाह ही देता है। वही रिज़्क़ देने वाला है, वही पालने वाला है। उसी के पास सारे ख़ज़ाने हैं। इसलिए रोज़ी की तलाश अल्लाह ही से करो, उसी से माँगो, और उसी पर भरोसा रखो।
और साथ ही, उसी की इबादत करो — अकेले उसी की, बिना किसी साझी के। और उसका शुक्र अदा करो — उसकी नेमतों के लिए, उसकी रहमत के लिए, उसकी दी हुई हर चीज़ के लिए। क्योंकि शुक्र अदा करने से अल्लाह और नेमतें बढ़ाता है।
और याद रखो — आख़िरकार तुम सबको उसी की तरफ़ लौटकर जाना है। क़यामत के दिन तुम सब उसी के सामने हाज़िर होगे। वही तुम्हारा हिसाब लेगा। तुम्हारी मूर्तियाँ उस दिन तुम्हारे किसी काम न आएँगी। इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को सही रास्ते पर लाओ, अल्लाह की इबादत करो, उसका शुक्र अदा करो, और उसी की राह में अपने कदम बढ़ाओ।
यही सच्ची कामयाबी है — कि तुम अल्लाह को पहचानो, उसी की इबादत करो, और उसी से रोज़ी माँगो। यही वह रास्ता है जो तुम्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देगा। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है, वह अपने बंदों की दुआएँ सुनता है और उन्हें रोज़ी देता है। बस ज़रूरत है सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करने की।
📜 आयत 15-19 — सूरा अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 17
सूरा अल-अंकबूत आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (मगर) तुम लोग तो ख़ुदा को छोड़कर सिर्फ बुतों की…सूरा आयत 17/69 — सूरा अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंकबूत सुनें, सूरा अल-अंकबूत अनुवाद, सूरा अल-अंकबूत mp3, सूरा अल-अंकबूत pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अंकबूत
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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