अल-अंकबूत · 19/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
أَوَلَمْ يَرَوْا كَيْفَ يُبْدِئُ اللَّهُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرٌ ۝١٩
Awa lam yaraw kaifa yubdi`ul laahul khalqa summa yu`eeduh; inna zaalika `alal laahi yaseer
📖 हिंदी अर्थ
बस क्या उन लोगों ने इस पर ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा किस तरह मख़लूकात को पहले पहल पैदा करता है और फिर उसको दोबारा पैदा करेगा ये तो ख़ुदा के नज़दीक बहुत आसान बात है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُبْدِئُ الْخَلْقَ: सृष्टि की शुरुआत करना, पैदा करना।
  • يُعِيدُهُ: उसे दोबारा (जीवित) करना, पुनर्जीवित करना।
  • يَسِيرٌ: आसान, सरल।

तफ़सीर (व्याख्या):

क्या इन लोगों ने कभी अपनी आँखों से यह नहीं देखा कि अल्लाह किस प्रकार सृष्टि की शुरुआत करता है? वह मनुष्य को नुत्फ़े (बूँद) से पैदा करता है, फिर उसे जमा हुआ खून बनाता है, फिर मांस का टुकड़ा, फिर हड्डियाँ, फिर उसे पूरा इंसान बना देता है। यही अल्लाह की क़ुदरत का नमूना है जो हर पल हमारे सामने है। और जब वह पहली बार पैदा कर सकता है, तो क्या वह दोबारा जीवित करने पर क़ादिर नहीं? बिल्कुल! जिसने पहली बार पैदा किया, उसके लिए दोबारा पैदा करना उतना ही आसान है। यह बात अल्लाह के लिए बिल्कुल सरल है — उसे किसी औज़ार या मदद की ज़रूरत नहीं, बस वह कहता है "हो जा" और वह हो जाता है।

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि जिस अल्लाह ने हमें पहली बार पैदा किया, उसकी क़ुदरत से हमें कभी इनकार नहीं करना चाहिए। जो इंसान अपने जिस्म की बनावट पर ग़ौर करे, वह समझ जाएगा कि यह सब किसी खुदा के बिना नहीं हो सकता। और जब वही खुदा हमें मौत के बाद दोबारा ज़िंदा करेगा, तो यह उसके लिए कोई मुश्किल काम नहीं। यही वह दिन है जब हम अपने अमलों का हिसाब देंगे — अच्छे अमल करने वालों को जन्नत मिलेगी और बुरे अमल करने वालों को जहन्नम। तो आओ, हम अपने रब की क़ुदरत पर यक़ीन करें और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें, ताकि उस दिन हम कामयाब हों।

🎧 सुनें

📜 आयत 17-21 — अल-अंकबूत

17إِنَّمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ أَوْثَانًا وَتَخْلُقُونَ إِفْكًا ۚ إِنَّ الَّذِينَ تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ لَا يَمْلِكُونَ لَكُمْ رِزْقًا فَابْتَغُوا عِندَ اللَّهِ الرِّزْقَ وَاعْبُدُوهُ وَاشْكُرُوا لَهُ ۖ إِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
(मगर) तुम लोग तो ख़ुदा को छोड़कर सिर्फ बुतों की परसतिश करते हैं और झूठी बातें (अपने दिल से) गढ़ते हो इसमें तो शक ही नहीं कि ख़ुदा को छोड़कर जिन लोगों की तुम परसतिश करते हो वह तुम्हारी रोज़ी का एख्तेयार नही रखते-बस ख़ुदा ही से रोज़ी भी माँगों और उसकी इबादत भी करो उसका शुक्र करो (क्योंकि) तुम लोग (एक दिन) उसी की तरफ लौटाए जाओगे
18وَإِن تُكَذِّبُوا فَقَدْ كَذَّبَ أُمَمٌ مِّن قَبْلِكُمْ ۖ وَمَا عَلَى الرَّسُولِ إِلَّا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ
और (ऐ अहले मक्का) अगर तुमने (मेरे रसूल को) झुठलाया तो (कुछ परवाह नहीं) तुमसे पहले भी तो बहुतेरी उम्मते (अपने पैग़म्बरों को) झुठला चुकी हैं और रसूल के ज़िम्मे तो सिर्फ (एहक़ाम का) पहुँचा देना है
19أَوَلَمْ يَرَوْا كَيْفَ يُبْدِئُ اللَّهُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرٌ
बस क्या उन लोगों ने इस पर ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा किस तरह मख़लूकात को पहले पहल पैदा करता है और फिर उसको दोबारा पैदा करेगा ये तो ख़ुदा के नज़दीक बहुत आसान बात है
20قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ بَدَأَ الْخَلْقَ ۚ ثُمَّ اللَّهُ يُنشِئُ النَّشْأَةَ الْآخِرَةَ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
(ऐ रसूल इन लोगों से) तुम कह दो कि ज़रा रुए ज़मीन पर चलफिर कर देखो तो कि ख़ुदा ने किस तरह पहले पहल मख़लूक को पैदा किया फिर (उसी तरह वही) ख़ुदा (क़यामत के दिन) आखिरी पैदाइश पैदा करेगा- बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
21يُعَذِّبُ مَن يَشَاءُ وَيَرْحَمُ مَن يَشَاءُ ۖ وَإِلَيْهِ تُقْلَبُونَ
जिस पर चाहे अज़ाब करे और जिस पर चाहे रहम करे और तुम लोग (सब के सब) उसी की तरफ लौटाए जाओगे
अल-अंकबूतकुरान सूची
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अनुवाद — अल-अंकबूत 19

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Tuesday, August 18, 2026

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