अल-अंकबूत · 37/69
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंकबूत
فَكَذَّبُوهُ فَأَخَذَتْهُمُ الرَّجْفَةُ فَأَصْبَحُوا فِي دَارِهِمْ جَاثِمِينَ ۝٣٧
Fakazzaboohu fa akhazat humur rajfatu fa asbahoo fee daarihim jaasimeen
📖 हिंदी अर्थ
तो उन लोगों ने शुऐब को झुठलाया पस ज़लज़ले (भूचाल) ने उन्हें ले डाला- तो वह लोग अपने घरों में औंधे ज़ानू के बल पड़े रह गए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الرَّجْفَةُ: भयंकर भूकंप या ज़लज़ला।
  • جَاثِمِينَ: घुटनों के बल गिरे हुए, मृत, बेजान होकर ज़मीन पर पड़े हुए।

तफ़सीर:

जब हज़रत शुऐब (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम "मदयन" के लोगों को तौहीद का पैग़ाम दिया, उन्हें अल्लाह की इबादत की दावत दी और उन्हें उनके बुरे कामों—जैसे नाप-तौल में कमी करना, लोगों को रास्ते से रोकना और फ़साद फैलाना—से डराया, तो उन्होंने उन्हें झुठला दिया। उन्होंने न सिर्फ़ उनकी बात मानने से इनकार किया, बल्कि उनका मज़ाक़ उड़ाया और उन्हें धमकियाँ भी दीं।

अल्लाह तआला का अज़ाब उन पर इस तरह नाज़िल हुआ कि एक भयंकर भूकंप ने उन्हें अपनी लपेट में ले लिया। यह ज़लज़ला इतना सख़्त था कि उनकी ज़मीन उनके पैरों तले हिल गई, और वे अपने ही घरों में घुटनों के बल गिरकर मर गए। सुबह हुई तो वे सब के सब बेजान पड़े थे, उनके चेहरे ज़मीन पर लगे हुए थे, और उनमें कोई हरकत नहीं थी। उनका कोई बचाव न कर सका, और न ही उनकी दौलत या ताक़त उनके किसी काम आई।

यह वाक़िया हमारे लिए एक बड़ी सीख है। अल्लाह तआला की रसूलों को झुठलाने का अंजाम हमेशा तबाही होता है। जब कोई क़ौम हक़ को नकारती है और अपनी सरकशी पर अड़ी रहती है, तो अल्लाह का अज़ाब उन्हें उस वक़्त आ घेरता है जब उन्हें इसकी उम्मीद नहीं होती। यही वजह है कि हमें चाहिए कि हम अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की लाई हुई हिदायत को क़बूल करें, उनकी सुन्नत पर अमल करें, और अल्लाह की नाफ़रमानी से बचें। अल्लाह बड़ा मेहरबान है, वह तौबा करने वालों को माफ़ कर देता है, लेकिन जब उसका अज़ाब आ जाता है, तो कोई उसे टाल नहीं सकता। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्मों को मानें, और उस रास्ते पर चलें जो हमें जन्नत तक पहुँचाए।



📜 आयत 35-39 — सूरा अल-अंकबूत

35وَلَقَد تَّرَكْنَا مِنْهَا آيَةً بَيِّنَةً لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
और हमने यक़ीनी उस (उलटी हुई बस्ती) में से समझदार लोगों के वास्ते (इबरत की) एक वाज़ेए व रौशन निशानी बाक़ी रखी है
36وَإِلَىٰ مَدْيَنَ أَخَاهُمْ شُعَيْبًا فَقَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ وَارْجُوا الْيَوْمَ الْآخِرَ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْأَرْضِ مُفْسِدِينَ
और (हमने) मदियन के रहने वालों के पास उनके भाई शुएब को पैग़म्बर बनाकर भेजा उन्होंने (अपनी क़ौम से) कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की इबादत करो और रोज़े आखेरत की उम्मीद रखो और रुए ज़मीन में फ़साद न फैलाते फिरो
37فَكَذَّبُوهُ فَأَخَذَتْهُمُ الرَّجْفَةُ فَأَصْبَحُوا فِي دَارِهِمْ جَاثِمِينَ
तो उन लोगों ने शुऐब को झुठलाया पस ज़लज़ले (भूचाल) ने उन्हें ले डाला- तो वह लोग अपने घरों में औंधे ज़ानू के बल पड़े रह गए
38وَعَادًا وَثَمُودَ وَقَد تَّبَيَّنَ لَكُم مِّن مَّسَاكِنِهِمْ ۖ وَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ أَعْمَالَهُمْ فَصَدَّهُمْ عَنِ السَّبِيلِ وَكَانُوا مُسْتَبْصِرِينَ
और क़ौम आद और समूद को (भी हलाक कर डाला) और (ऐ अहले मक्का) तुम को तो उनके (उजड़े हुए) घर भी (रास्ता आते जाते) मालूम हो चुके और शैतान ने उनकी नज़र में उनके कामों को अच्छा कर दिखाया था और उन्हें (सीधी) राह (चलने) से रोक दिया था हालॉकि वह बड़े होशियार थे
39وَقَارُونَ وَفِرْعَوْنَ وَهَامَانَ ۖ وَلَقَدْ جَاءَهُم مُّوسَىٰ بِالْبَيِّنَاتِ فَاسْتَكْبَرُوا فِي الْأَرْضِ وَمَا كَانُوا سَابِقِينَ
और (हम ही ने) क़ारुन व फिरऔन व हामान को भी (हलाक कर डाला) हालॉकि उन लोगों के पास मूसा वाजेए व रौशन मौजिज़े लेकर आए फिर भी ये लोग रुए ज़मीन में सरकशी करते फिरे और हमसे (निकल कर) कहीं आगे न बढ़ सके
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीअवतरण स्थान
37आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 37

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Friday, October 2, 2026

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