अल-अंकबूत · 41/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
مَثَلُ الَّذِينَ اتَّخَذُوا مِن دُونِ اللَّهِ أَوْلِيَاءَ كَمَثَلِ الْعَنكَبُوتِ اتَّخَذَتْ بَيْتًا ۖ وَإِنَّ أَوْهَنَ الْبُيُوتِ لَبَيْتُ الْعَنكَبُوتِ ۖ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ ۝٤١
Masalul lazeenat takhazoo min doonil laahi awliyaaa`a kamasalil `ankaboot, ittakhazat baitaa; wa inna awhanal buyooti la baitul `ankaboot; law kaanoo ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
जिन लोगों ने ख़ुदा के सिवा दूसरे कारसाज़ बना रखे हैं उनकी मसल उस मकड़ी की सी है जिसने (अपने ख्याल नाक़िस में) एक घर बनाया और उसमें तो शक ही नहीं कि तमाम घरों से बोदा घर मकड़ी का होता है मगर ये लोग (इतना भी) जानते हो
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अवलिया (أَوْلِيَاءَ): मददगार, सहायक और संरक्षक।
  • अल-अंकबूत (الْعَنكَبُوتِ): मकड़ी।
  • ओहन (أَوْهَنَ): सबसे कमज़ोर, सबसे निर्बल।
  • बैत (بَيْتًا): घर, आश्रय स्थल।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में मुशरिकों की मिसाल बयान की है जो अल्लाह को छोड़कर दूसरों को अपना संरक्षक और मददगार बनाते हैं। वे मूर्तियों और झूठे देवताओं से उम्मीद लगाते हैं कि वे उनकी मदद करेंगे, उन्हें नुक़सान से बचाएंगे और उनकी सिफ़ारिश करेंगे। अल्लाह ने उनकी इस हालत की तुलना मकड़ी के घर से की है।

मकड़ी एक बहुत ही कमज़ोर जीव है। वह अपने लिए एक घर बनाती है, लेकिन उसका घर कितना नाज़ुक और बेकार होता है! वह न तो उसे गर्मी से बचा सकता है, न सर्दी से, न बारिश से और न ही किसी दुश्मन के हमले से। जब ज़रूरत पड़ती है तो वह घर उसके किसी काम नहीं आता। यह घर सबसे कमज़ोर और बेकार घरों में से एक है।

ठीक इसी तरह वे लोग हैं जो अल्लाह को छोड़कर दूसरों को अपना वली और मददगार बनाते हैं। उनके यह तथाकथित मददगार न तो उन्हें कोई फ़ायदा पहुँचा सकते हैं और न ही नुक़सान से बचा सकते हैं। जिस दिन उन्हें इनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होगी — यानी क़ियामत के दिन — उस दिन ये उनके किसी काम न आएंगे। जिस तरह मकड़ी का घर उसे किसी मुसीबत से नहीं बचा सकता, उसी तरह ये झूठे माबूद अपने पूजने वालों को किसी मुसीबत से नहीं बचा सकते।

अल्लाह फ़रमाता है: "काश वे जानते!" यानी अगर इन मुशरिकों को यह हक़ीक़त मालूम होती कि उनके ये माबूद कितने बेबस और कमज़ोर हैं, और उनसे मदद की उम्मीद करना कितनी बड़ी भूल है, तो वे कभी इन्हें अपना संरक्षक न बनाते। वे समझते हैं कि ये मूर्तियाँ उन्हें फ़ायदा पहुँचाएँगी, लेकिन हक़ीक़त यह है कि ये तो मकड़ी के जाले से भी ज़्यादा कमज़ोर हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को चाहिए कि वह अपनी उम्मीदें और भरोसा सिर्फ़ अल्लाह पर रखे। जो लोग अल्लाह के सिवा दूसरों पर भरोसा करते हैं, वे उस मकड़ी की तरह हैं जो अपने कमज़ोर जाले पर नाज़ करती है, लेकिन हक़ीक़त में वह जाला हवा के एक झोंके से उड़ जाता है। अल्लाह सबसे ताक़तवर है, सबसे मेहरबान है और वही हर मुसीबत में इंसान की मदद कर सकता है। जो इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए काफ़ी है। आइए हम अपने दिलों से हर उस चीज़ का भरोसा निकाल दें जो अल्लाह के सिवा है, और सिर्फ़ अल्लाह ही की तरफ़ रुजू करें — वही हमारा असली वली और मददगार है।

🎧 सुनें

📜 आयत 39-43 — अल-अंकबूत

39وَقَارُونَ وَفِرْعَوْنَ وَهَامَانَ ۖ وَلَقَدْ جَاءَهُم مُّوسَىٰ بِالْبَيِّنَاتِ فَاسْتَكْبَرُوا فِي الْأَرْضِ وَمَا كَانُوا سَابِقِينَ
और (हम ही ने) क़ारुन व फिरऔन व हामान को भी (हलाक कर डाला) हालॉकि उन लोगों के पास मूसा वाजेए व रौशन मौजिज़े लेकर आए फिर भी ये लोग रुए ज़मीन में सरकशी करते फिरे और हमसे (निकल कर) कहीं आगे न बढ़ सके
40فَكُلًّا أَخَذْنَا بِذَنبِهِ ۖ فَمِنْهُم مَّنْ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِ حَاصِبًا وَمِنْهُم مَّنْ أَخَذَتْهُ الصَّيْحَةُ وَمِنْهُم مَّنْ خَسَفْنَا بِهِ الْأَرْضَ وَمِنْهُم مَّنْ أَغْرَقْنَا ۚ وَمَا كَانَ اللَّهُ لِيَظْلِمَهُمْ وَلَٰكِن كَانُوا أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
तो हमने सबको उनके गुनाह की सज़ा में ले डाला चुनांन्चे उनमे से बाज़ तो वह थे जिन पर हमने पत्थर वाली ऑंधी भेजी और बाज़ उनमें से वह थे जिन को एक सख्त चिंघाड़ ने ले डाला और बाज़ उनमें से वह थे जिनको हमने ज़मीन मे धॅसा दिया और बाज़ उनमें से वह थे जिन्हें हमने डुबो मारा और ये बात नहीं कि ख़ुदा ने उन पर ज़ुल्म किया हो बल्कि (सच युं है कि) ये लोग ख़ुद (ख़ुदा की नाफ़रमानी करके) आप अपने ऊपर ज़ुल्म करते रहे
41مَثَلُ الَّذِينَ اتَّخَذُوا مِن دُونِ اللَّهِ أَوْلِيَاءَ كَمَثَلِ الْعَنكَبُوتِ اتَّخَذَتْ بَيْتًا ۖ وَإِنَّ أَوْهَنَ الْبُيُوتِ لَبَيْتُ الْعَنكَبُوتِ ۖ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ
जिन लोगों ने ख़ुदा के सिवा दूसरे कारसाज़ बना रखे हैं उनकी मसल उस मकड़ी की सी है जिसने (अपने ख्याल नाक़िस में) एक घर बनाया और उसमें तो शक ही नहीं कि तमाम घरों से बोदा घर मकड़ी का होता है मगर ये लोग (इतना भी) जानते हो
42إِنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا يَدْعُونَ مِن دُونِهِ مِن شَيْءٍ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
ख़ुदा को छोड़कर ये लोग जिस चीज़ को पुकारते हैं उससे ख़ुदा यक़ीनी वाक़िफ है और वह तो (सब पर) ग़ालिब (और) हिकमत वाला है
43وَتِلْكَ الْأَمْثَالُ نَضْرِبُهَا لِلنَّاسِ ۖ وَمَا يَعْقِلُهَا إِلَّا الْعَالِمُونَ
और हम ये मिसाले लोगों के (समझाने) के वास्ते बयान करते हैं और उन को तो बस उलमा ही समझते हैं
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीRevelation
41आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 41

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Tuesday, August 18, 2026

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