अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- अवलिया (أَوْلِيَاءَ): मददगार, सहायक और संरक्षक।
- अल-अंकबूत (الْعَنكَبُوتِ): मकड़ी।
- ओहन (أَوْهَنَ): सबसे कमज़ोर, सबसे निर्बल।
- बैत (بَيْتًا): घर, आश्रय स्थल।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने इस आयत में मुशरिकों की मिसाल बयान की है जो अल्लाह को छोड़कर दूसरों को अपना संरक्षक और मददगार बनाते हैं। वे मूर्तियों और झूठे देवताओं से उम्मीद लगाते हैं कि वे उनकी मदद करेंगे, उन्हें नुक़सान से बचाएंगे और उनकी सिफ़ारिश करेंगे। अल्लाह ने उनकी इस हालत की तुलना मकड़ी के घर से की है।
मकड़ी एक बहुत ही कमज़ोर जीव है। वह अपने लिए एक घर बनाती है, लेकिन उसका घर कितना नाज़ुक और बेकार होता है! वह न तो उसे गर्मी से बचा सकता है, न सर्दी से, न बारिश से और न ही किसी दुश्मन के हमले से। जब ज़रूरत पड़ती है तो वह घर उसके किसी काम नहीं आता। यह घर सबसे कमज़ोर और बेकार घरों में से एक है।
ठीक इसी तरह वे लोग हैं जो अल्लाह को छोड़कर दूसरों को अपना वली और मददगार बनाते हैं। उनके यह तथाकथित मददगार न तो उन्हें कोई फ़ायदा पहुँचा सकते हैं और न ही नुक़सान से बचा सकते हैं। जिस दिन उन्हें इनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होगी — यानी क़ियामत के दिन — उस दिन ये उनके किसी काम न आएंगे। जिस तरह मकड़ी का घर उसे किसी मुसीबत से नहीं बचा सकता, उसी तरह ये झूठे माबूद अपने पूजने वालों को किसी मुसीबत से नहीं बचा सकते।
अल्लाह फ़रमाता है: "काश वे जानते!" यानी अगर इन मुशरिकों को यह हक़ीक़त मालूम होती कि उनके ये माबूद कितने बेबस और कमज़ोर हैं, और उनसे मदद की उम्मीद करना कितनी बड़ी भूल है, तो वे कभी इन्हें अपना संरक्षक न बनाते। वे समझते हैं कि ये मूर्तियाँ उन्हें फ़ायदा पहुँचाएँगी, लेकिन हक़ीक़त यह है कि ये तो मकड़ी के जाले से भी ज़्यादा कमज़ोर हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को चाहिए कि वह अपनी उम्मीदें और भरोसा सिर्फ़ अल्लाह पर रखे। जो लोग अल्लाह के सिवा दूसरों पर भरोसा करते हैं, वे उस मकड़ी की तरह हैं जो अपने कमज़ोर जाले पर नाज़ करती है, लेकिन हक़ीक़त में वह जाला हवा के एक झोंके से उड़ जाता है। अल्लाह सबसे ताक़तवर है, सबसे मेहरबान है और वही हर मुसीबत में इंसान की मदद कर सकता है। जो इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए काफ़ी है। आइए हम अपने दिलों से हर उस चीज़ का भरोसा निकाल दें जो अल्लाह के सिवा है, और सिर्फ़ अल्लाह ही की तरफ़ रुजू करें — वही हमारा असली वली और मददगार है।
📜 आयत 39-43 — अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 41
सूरा अल-अंकबूत आयत 41 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिन लोगों ने ख़ुदा के सिवा दूसरे कारसाज़ बना रखे…सूरा आयत 41/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 39–43. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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