अल-अंकबूत · 40/69
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंकबूत
فَكُلًّا أَخَذْنَا بِذَنبِهِ ۖ فَمِنْهُم مَّنْ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِ حَاصِبًا وَمِنْهُم مَّنْ أَخَذَتْهُ الصَّيْحَةُ وَمِنْهُم مَّنْ خَسَفْنَا بِهِ الْأَرْضَ وَمِنْهُم مَّنْ أَغْرَقْنَا ۚ وَمَا كَانَ اللَّهُ لِيَظْلِمَهُمْ وَلَٰكِن كَانُوا أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ ۝٤٠
Fakullan akhaznaa bizam bihee faminhum man arsalnaa `alaihi haasibaa; wa minhum man akhazat hus saihatu wa minhum man khasafnaa bihil arda wa minhum man aghraqnaa; wa maa kaanal laahu li yazlimahum wa laakin kaanoo anfusahum yazlimoon
📖 हिंदी अर्थ
तो हमने सबको उनके गुनाह की सज़ा में ले डाला चुनांन्चे उनमे से बाज़ तो वह थे जिन पर हमने पत्थर वाली ऑंधी भेजी और बाज़ उनमें से वह थे जिन को एक सख्त चिंघाड़ ने ले डाला और बाज़ उनमें से वह थे जिनको हमने ज़मीन मे धॅसा दिया और बाज़ उनमें से वह थे जिन्हें हमने डुबो मारा और ये बात नहीं कि ख़ुदा ने उन पर ज़ुल्म किया हो बल्कि (सच युं है कि) ये लोग ख़ुद (ख़ुदा की नाफ़रमानी करके) आप अपने ऊपर ज़ुल्म करते रहे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَاصِبًا (हासिबन): वह आँधी जो छोटे-छोटे पत्थरों को उड़ाकर लाती है।
  • الصَّيْحَةُ (अस-सैहा): भयानक चीख़ या आकाशीय ध्वनि जिससे कान पट जाएँ और प्राण निकल जाएँ।
  • خَسَفْنَا (ख़सफ़ना): हमने धरती में धँसा दिया।
  • أَغْرَقْنَا (अग़रक़ना): हमने पानी में डुबोकर हलाक किया।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में उन गिरोहों का ज़िक्र किया है जिन्होंने अपने नबियों को झुठलाया और हरकतों से बाज़ न आए। अल्लाह ने हर एक को उसके गुनाह के हिसाब से पकड़ा — किसी को एक अज़ाब से, किसी को दूसरे अज़ाब से।

  • क़ौमे-लूत (हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की क़ौम) पर अल्लाह ने पत्थर बरसाने वाली आँधी भेजी, जिसने उन्हें तबाह कर दिया।
  • क़ौमे-सालेह (समूद) और क़ौमे-शुऐब को भयानक चीख़ (सैहा) ने आ पकड़ा, जिससे उनके दिल फट गए और वे मर गए।
  • क़ारून को, जो माल और ठाठ-बाट में इतराता था, अल्लाह ने उसके घर सहित ज़मीन में धँसा दिया।
  • क़ौमे-नूह (हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की क़ौम) और फ़िरऔन व उसके लोगों को पानी में डुबोकर हलाक किया गया।

अल्लाह तआला ने यह सब उनके अपने गुनाहों की वजह से किया। अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता — वह तो बिल्कुल न्यायी है। अगर वह किसी को सज़ा देता है, तो उसके अपने कर्मों के कारण। ये लोग ख़ुद अपनी नफ़्स पर ज़ुल्म कर रहे थे, क्योंकि उन्होंने अल्लाह की नेअमतों का कृतघ्नता से जवाब दिया, उसकी इबादत छोड़ दी और दूसरों की पूजा करने लगे।


दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन वह जल्दबाज़ी नहीं करता। वह मौका देता है, ताकि इंसान सुधर जाए। जो लोग अल्लाह के नबियों के पैग़ाम को ठुकराते हैं, वे अंजाम-ए-कार तबाह होते हैं। आज हमें चाहिए कि हम अल्लाह के हुक्मों पर अमल करें, अपने गुनाहों से तौबा करें और उस रास्ते पर चलें जो हमें जन्नत तक पहुँचाए। अल्लाह रहीम और ग़फ़ूर है — जो कोई उसकी ओर लौट आए, वह उसे माफ़ कर देता है। लेकिन जो सरकशी और ज़ुल्म पर अड़ा रहे, उसका अंजाम उन्हीं पिछली क़ौमों जैसा होगा। हमें इतिहास से सबक लेना चाहिए और अल्लाह की रहमत के दामन को थाम लेना चाहिए।



📜 आयत 38-42 — सूरा अल-अंकबूत

38وَعَادًا وَثَمُودَ وَقَد تَّبَيَّنَ لَكُم مِّن مَّسَاكِنِهِمْ ۖ وَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ أَعْمَالَهُمْ فَصَدَّهُمْ عَنِ السَّبِيلِ وَكَانُوا مُسْتَبْصِرِينَ
और क़ौम आद और समूद को (भी हलाक कर डाला) और (ऐ अहले मक्का) तुम को तो उनके (उजड़े हुए) घर भी (रास्ता आते जाते) मालूम हो चुके और शैतान ने उनकी नज़र में उनके कामों को अच्छा कर दिखाया था और उन्हें (सीधी) राह (चलने) से रोक दिया था हालॉकि वह बड़े होशियार थे
39وَقَارُونَ وَفِرْعَوْنَ وَهَامَانَ ۖ وَلَقَدْ جَاءَهُم مُّوسَىٰ بِالْبَيِّنَاتِ فَاسْتَكْبَرُوا فِي الْأَرْضِ وَمَا كَانُوا سَابِقِينَ
और (हम ही ने) क़ारुन व फिरऔन व हामान को भी (हलाक कर डाला) हालॉकि उन लोगों के पास मूसा वाजेए व रौशन मौजिज़े लेकर आए फिर भी ये लोग रुए ज़मीन में सरकशी करते फिरे और हमसे (निकल कर) कहीं आगे न बढ़ सके
40فَكُلًّا أَخَذْنَا بِذَنبِهِ ۖ فَمِنْهُم مَّنْ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِ حَاصِبًا وَمِنْهُم مَّنْ أَخَذَتْهُ الصَّيْحَةُ وَمِنْهُم مَّنْ خَسَفْنَا بِهِ الْأَرْضَ وَمِنْهُم مَّنْ أَغْرَقْنَا ۚ وَمَا كَانَ اللَّهُ لِيَظْلِمَهُمْ وَلَٰكِن كَانُوا أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
तो हमने सबको उनके गुनाह की सज़ा में ले डाला चुनांन्चे उनमे से बाज़ तो वह थे जिन पर हमने पत्थर वाली ऑंधी भेजी और बाज़ उनमें से वह थे जिन को एक सख्त चिंघाड़ ने ले डाला और बाज़ उनमें से वह थे जिनको हमने ज़मीन मे धॅसा दिया और बाज़ उनमें से वह थे जिन्हें हमने डुबो मारा और ये बात नहीं कि ख़ुदा ने उन पर ज़ुल्म किया हो बल्कि (सच युं है कि) ये लोग ख़ुद (ख़ुदा की नाफ़रमानी करके) आप अपने ऊपर ज़ुल्म करते रहे
41مَثَلُ الَّذِينَ اتَّخَذُوا مِن دُونِ اللَّهِ أَوْلِيَاءَ كَمَثَلِ الْعَنكَبُوتِ اتَّخَذَتْ بَيْتًا ۖ وَإِنَّ أَوْهَنَ الْبُيُوتِ لَبَيْتُ الْعَنكَبُوتِ ۖ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ
जिन लोगों ने ख़ुदा के सिवा दूसरे कारसाज़ बना रखे हैं उनकी मसल उस मकड़ी की सी है जिसने (अपने ख्याल नाक़िस में) एक घर बनाया और उसमें तो शक ही नहीं कि तमाम घरों से बोदा घर मकड़ी का होता है मगर ये लोग (इतना भी) जानते हो
42إِنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا يَدْعُونَ مِن دُونِهِ مِن شَيْءٍ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
ख़ुदा को छोड़कर ये लोग जिस चीज़ को पुकारते हैं उससे ख़ुदा यक़ीनी वाक़िफ है और वह तो (सब पर) ग़ालिब (और) हिकमत वाला है
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीअवतरण स्थान
40आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 40

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Wednesday, September 30, 2026

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