अल-अंकबूत · 42/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
إِنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا يَدْعُونَ مِن دُونِهِ مِن شَيْءٍ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ ۝٤٢
Innal laaha ya`lamu maa yad`oona min doonihee min shai`; wa Huwal `Azeezul Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा को छोड़कर ये लोग जिस चीज़ को पुकारते हैं उससे ख़ुदा यक़ीनी वाक़िफ है और वह तो (सब पर) ग़ालिब (और) हिकमत वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَدْعُونَ – वे पुकारते हैं / उन्हें पुकारते हैं (अर्थात् पूजा करते हैं)
  • مِن دُونِهِ – उस (अल्लाह) के अतिरिक्त
  • مِن شَيْءٍ – किसी भी चीज़ को (यहाँ "مِن" नकारात्मकता के लिए है, अर्थात् वे वस्तुतः कुछ भी नहीं हैं)
  • الْعَزِيزُ – सर्वशक्तिमान, जो सब पर ग़ालिब है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता
  • الْحَكِيمُ – सर्व बुद्धिमान, जो हर काम हिकमत (बुद्धि और योजना) के साथ करता है

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपने नबी ﷺ को और सभी मुसलमानों को सिखा रहे हैं कि वे मुशरिकों (बहुदेववादियों) से कहें: अल्लाह उन सब चीज़ों को भली-भाँति जानता है जिन्हें ये लोग उसके अतिरिक्त पुकारते हैं और जिनकी पूजा करते हैं। अल्लाह के ज्ञान से कुछ भी छिपा नहीं है—चाहे वह कोई मूर्ति हो, कोई देवता हो, कोई पत्थर हो, कोई पेड़ हो, या कोई और चीज़ जिसे वे अपना माबूद (पूज्य) बनाए हुए हैं। अल्लाह जानता है कि ये सब वास्तव में कुछ भी नहीं हैं—न उनमें कोई शक्ति है, न वे किसी को नुक़सान पहुँचा सकते हैं और न ही कोई लाभ दे सकते हैं। ये तो केवल नाम हैं जो उन्होंने खुद रख लिए हैं, जिनका कोई अस्तित्व नहीं है। अल्लाह का ज्ञान हर चीज़ को घेरे हुए है, और वह इनके झूठे माबूदों की सच्चाई को अच्छी तरह जानता है।

फिर अल्लाह तआला अपनी दो महान सिफ़तों (विशेषताओं) का ज़िक्र करते हुए फ़रमाता है: "और वही अल-अज़ीज़ है, अल-हकीम है।" यानी वह सर्वशक्तिमान है—ऐसा ज़बरदस्त और ग़ालिब कि उसे कोई मात नहीं दे सकता, उसके इरादे को कोई टाल नहीं सकता, और उसकी पकड़ से कोई बच नहीं सकता। वही सबसे बड़ी शक्ति है, और उसके मुक़ाबले में ये सारे तथाकथित देवता बिल्कुल बेबस और कमज़ोर हैं। साथ ही वह अल-हकीम है—अपनी हर मख़लूक़ (रचना) में, अपने हर फ़ैसले में और अपने हर काम में पूर्ण बुद्धि और हिकमत रखता है। वह कुछ भी बेकार या बिना किसी योजना के नहीं करता। उसकी शक्ति उसकी हिकमत के साथ मिली हुई है—वह जब चाहता है, जैसे चाहता है, और जिस पर चाहता है अपनी पकड़ बनाता है, लेकिन हमेशा हिकमत और न्याय के साथ।

इस आयत में मुशरिकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि अल्लाह उनके सारे कर्मों और उनके झूठे माबूदों से पूरी तरह वाक़िफ़ है, और वह अपनी शक्ति और हिकमत के साथ उन्हें उनके किए का बदला देने वाला है। साथ ही यह मोमिनों के लिए एक तसल्ली और इत्मिनान का पैग़ाम है कि तुम्हारा रब सब कुछ जानता है, वही सबसे ताक़तवर है, और वही सबसे बुद्धिमान है—इसलिए उसी पर भरोसा रखो, उसी से मदद माँगो, और उसी की इबादत करो। जो लोग अल्लाह के सिवा दूसरों को पुकारते हैं, वे दरअसल ऐसी चीज़ों का सहारा ले रहे हैं जो कुछ भी नहीं हैं—न उन्हें कोई जानकारी है, न कोई शक्ति। अल्लाह ही अकेला है जो सुनता है, जानता है, और हर चीज़ पर क़ादिर है।



📜 आयत 40-44 — अल-अंकबूत

40فَكُلًّا أَخَذْنَا بِذَنبِهِ ۖ فَمِنْهُم مَّنْ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِ حَاصِبًا وَمِنْهُم مَّنْ أَخَذَتْهُ الصَّيْحَةُ وَمِنْهُم مَّنْ خَسَفْنَا بِهِ الْأَرْضَ وَمِنْهُم مَّنْ أَغْرَقْنَا ۚ وَمَا كَانَ اللَّهُ لِيَظْلِمَهُمْ وَلَٰكِن كَانُوا أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
तो हमने सबको उनके गुनाह की सज़ा में ले डाला चुनांन्चे उनमे से बाज़ तो वह थे जिन पर हमने पत्थर वाली ऑंधी भेजी और बाज़ उनमें से वह थे जिन को एक सख्त चिंघाड़ ने ले डाला और बाज़ उनमें से वह थे जिनको हमने ज़मीन मे धॅसा दिया और बाज़ उनमें से वह थे जिन्हें हमने डुबो मारा और ये बात नहीं कि ख़ुदा ने उन पर ज़ुल्म किया हो बल्कि (सच युं है कि) ये लोग ख़ुद (ख़ुदा की नाफ़रमानी करके) आप अपने ऊपर ज़ुल्म करते रहे
41مَثَلُ الَّذِينَ اتَّخَذُوا مِن دُونِ اللَّهِ أَوْلِيَاءَ كَمَثَلِ الْعَنكَبُوتِ اتَّخَذَتْ بَيْتًا ۖ وَإِنَّ أَوْهَنَ الْبُيُوتِ لَبَيْتُ الْعَنكَبُوتِ ۖ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ
जिन लोगों ने ख़ुदा के सिवा दूसरे कारसाज़ बना रखे हैं उनकी मसल उस मकड़ी की सी है जिसने (अपने ख्याल नाक़िस में) एक घर बनाया और उसमें तो शक ही नहीं कि तमाम घरों से बोदा घर मकड़ी का होता है मगर ये लोग (इतना भी) जानते हो
42إِنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا يَدْعُونَ مِن دُونِهِ مِن شَيْءٍ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
ख़ुदा को छोड़कर ये लोग जिस चीज़ को पुकारते हैं उससे ख़ुदा यक़ीनी वाक़िफ है और वह तो (सब पर) ग़ालिब (और) हिकमत वाला है
43وَتِلْكَ الْأَمْثَالُ نَضْرِبُهَا لِلنَّاسِ ۖ وَمَا يَعْقِلُهَا إِلَّا الْعَالِمُونَ
और हम ये मिसाले लोगों के (समझाने) के वास्ते बयान करते हैं और उन को तो बस उलमा ही समझते हैं
44خَلَقَ اللَّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّلْمُؤْمِنِينَ
ख़ुदा ने सारे आसमान और ज़मीन को बिल्कुल ठीक पैदा किया इसमें शक नहीं कि उसमें ईमानदारों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) यक़ीनी बड़ी निशानी है
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीRevelation
42आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 42

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Tuesday, August 18, 2026

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