अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अल-अम्साल (الأمثال): यानी मिसालें, उदाहरण और नसीहतें।
- नज़रिबुहा (نضربها): हम बयान करते हैं, पेश करते हैं।
- य'क़िलुहा (يعقلها): उसे समझता है, उसकी हक़ीक़त को दिल से महसूस करता है।
- अल-आलिमून (العالمون): वे लोग जो अल्लाह की आयतों और उसके दीन की समझ रखते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये मिसालें जो हम क़ुरआन में बयान करते हैं, वे सिर्फ़ कहानियाँ या क़िस्से नहीं हैं, बल्कि हर मिसाल में इंसानों के लिए गहरी नसीहत, हिदायत और सबक़ छिपा हुआ है। इन मिसालों का मक़सद लोगों को ग़फ़लत से जगाना, उन्हें हक़ की राह दिखाना और उन्हें अल्लाह की तरफ़ राग़िब करना है। ये मिसालें इसलिए पेश की जाती हैं ताकि इंसान अपनी ज़िंदगी के हालात पर ग़ौर करे, अगली उम्मतों के अंजाम से सबक़ हासिल करे और अपने रब की इबादत और इताअत की तरफ़ पलट आए।
लेकिन इन मिसालों से असली फ़ायदा सिर्फ़ वही लोग उठाते हैं जो अल्लाह और उसकी आयात पर दिल से ईमान रखते हैं, जिनके दिल रौशन होते हैं और जो अल्लाह के दीन, उसकी हिकमतों और उसकी शरीअत की गहराई को समझते हैं। यही लोग हैं जो इन उदाहरणों को सिर्फ़ सुनते ही नहीं, बल्कि उन पर अमल भी करते हैं, उनसे इबरत हासिल करते हैं और उन्हें अपनी ज़िंदगी में उतारते हैं। वे अल्लाह की नाफ़रमानी से बचते हैं और उसकी रज़ा के तालिब रहते हैं।
याद रखिए, क़ुरआन की हर मिसाल एक ख़ज़ाना है। जो इसे समझ ले, वह दुनिया और आख़िरत की भलाई की कुंजी पा लेता है। अल्लाह तआला ने ये मिसालें अपने बंदों पर रहमत के तौर पर नाज़िल की हैं, ताकि वे सीधी राह पाएँ और उसकी रहमत के हक़दार बनें। इसलिए हमें चाहिए कि क़ुरआन को सिर्फ़ तिलावत के लिए न रखें, बल्कि उस पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करें और उसकी हर मिसाल से सबक़ हासिल करें। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की मुहब्बत, उसकी मग़फिरत और जन्नत की तरफ़ ले जाता है। अल्लाह हमें उन आलिमों में शामिल करे जो उसकी आयात को समझते हैं और उन पर अमल करते हैं। आमीन।
📜 आयत 41-45 — अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 43
सूरा अल-अंकबूत आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हम ये मिसाले लोगों के (समझाने) के वास्ते बयान…सूरा आयत 43/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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