अल-अंकबूत · 43/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
وَتِلْكَ الْأَمْثَالُ نَضْرِبُهَا لِلنَّاسِ ۖ وَمَا يَعْقِلُهَا إِلَّا الْعَالِمُونَ ۝٤٣
Wa tilkal amsaalu nadribuhaa linnaasi wa maa ya`qiluhaaa illal `aalimoon
📖 हिंदी अर्थ
और हम ये मिसाले लोगों के (समझाने) के वास्ते बयान करते हैं और उन को तो बस उलमा ही समझते हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अल-अम्साल (الأمثال): यानी मिसालें, उदाहरण और नसीहतें।
  • नज़रिबुहा (نضربها): हम बयान करते हैं, पेश करते हैं।
  • य'क़िलुहा (يعقلها): उसे समझता है, उसकी हक़ीक़त को दिल से महसूस करता है।
  • अल-आलिमून (العالمون): वे लोग जो अल्लाह की आयतों और उसके दीन की समझ रखते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये मिसालें जो हम क़ुरआन में बयान करते हैं, वे सिर्फ़ कहानियाँ या क़िस्से नहीं हैं, बल्कि हर मिसाल में इंसानों के लिए गहरी नसीहत, हिदायत और सबक़ छिपा हुआ है। इन मिसालों का मक़सद लोगों को ग़फ़लत से जगाना, उन्हें हक़ की राह दिखाना और उन्हें अल्लाह की तरफ़ राग़िब करना है। ये मिसालें इसलिए पेश की जाती हैं ताकि इंसान अपनी ज़िंदगी के हालात पर ग़ौर करे, अगली उम्मतों के अंजाम से सबक़ हासिल करे और अपने रब की इबादत और इताअत की तरफ़ पलट आए।

लेकिन इन मिसालों से असली फ़ायदा सिर्फ़ वही लोग उठाते हैं जो अल्लाह और उसकी आयात पर दिल से ईमान रखते हैं, जिनके दिल रौशन होते हैं और जो अल्लाह के दीन, उसकी हिकमतों और उसकी शरीअत की गहराई को समझते हैं। यही लोग हैं जो इन उदाहरणों को सिर्फ़ सुनते ही नहीं, बल्कि उन पर अमल भी करते हैं, उनसे इबरत हासिल करते हैं और उन्हें अपनी ज़िंदगी में उतारते हैं। वे अल्लाह की नाफ़रमानी से बचते हैं और उसकी रज़ा के तालिब रहते हैं।

याद रखिए, क़ुरआन की हर मिसाल एक ख़ज़ाना है। जो इसे समझ ले, वह दुनिया और आख़िरत की भलाई की कुंजी पा लेता है। अल्लाह तआला ने ये मिसालें अपने बंदों पर रहमत के तौर पर नाज़िल की हैं, ताकि वे सीधी राह पाएँ और उसकी रहमत के हक़दार बनें। इसलिए हमें चाहिए कि क़ुरआन को सिर्फ़ तिलावत के लिए न रखें, बल्कि उस पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करें और उसकी हर मिसाल से सबक़ हासिल करें। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की मुहब्बत, उसकी मग़फिरत और जन्नत की तरफ़ ले जाता है। अल्लाह हमें उन आलिमों में शामिल करे जो उसकी आयात को समझते हैं और उन पर अमल करते हैं। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 41-45 — अल-अंकबूत

41مَثَلُ الَّذِينَ اتَّخَذُوا مِن دُونِ اللَّهِ أَوْلِيَاءَ كَمَثَلِ الْعَنكَبُوتِ اتَّخَذَتْ بَيْتًا ۖ وَإِنَّ أَوْهَنَ الْبُيُوتِ لَبَيْتُ الْعَنكَبُوتِ ۖ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ
जिन लोगों ने ख़ुदा के सिवा दूसरे कारसाज़ बना रखे हैं उनकी मसल उस मकड़ी की सी है जिसने (अपने ख्याल नाक़िस में) एक घर बनाया और उसमें तो शक ही नहीं कि तमाम घरों से बोदा घर मकड़ी का होता है मगर ये लोग (इतना भी) जानते हो
42إِنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا يَدْعُونَ مِن دُونِهِ مِن شَيْءٍ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
ख़ुदा को छोड़कर ये लोग जिस चीज़ को पुकारते हैं उससे ख़ुदा यक़ीनी वाक़िफ है और वह तो (सब पर) ग़ालिब (और) हिकमत वाला है
43وَتِلْكَ الْأَمْثَالُ نَضْرِبُهَا لِلنَّاسِ ۖ وَمَا يَعْقِلُهَا إِلَّا الْعَالِمُونَ
और हम ये मिसाले लोगों के (समझाने) के वास्ते बयान करते हैं और उन को तो बस उलमा ही समझते हैं
44خَلَقَ اللَّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّلْمُؤْمِنِينَ
ख़ुदा ने सारे आसमान और ज़मीन को बिल्कुल ठीक पैदा किया इसमें शक नहीं कि उसमें ईमानदारों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) यक़ीनी बड़ी निशानी है
45اتْلُ مَا أُوحِيَ إِلَيْكَ مِنَ الْكِتَابِ وَأَقِمِ الصَّلَاةَ ۖ إِنَّ الصَّلَاةَ تَنْهَىٰ عَنِ الْفَحْشَاءِ وَالْمُنكَرِ ۗ وَلَذِكْرُ اللَّهِ أَكْبَرُ ۗ وَاللَّهُ يَعْلَمُ مَا تَصْنَعُونَ
(ऐ रसूल) जो किताब तुम्हारे पास नाज़िल की गयी है उसकी तिलावत करो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ो बेशक नमाज़ बेहयाई और बुरे कामों से बाज़ रखती है और ख़ुदा की याद यक़ीनी बड़ा मरतबा रखती है और तुम लोग जो कुछ करते हो ख़ुदा उससे वाक़िफ है
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीRevelation
43आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 43

सूरा अल-अंकबूत आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हम ये मिसाले लोगों के (समझाने) के वास्ते बयान…

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Tuesday, August 18, 2026

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