अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- बिल-हक़्क़ (بِالْحَقِّ): सही उद्देश्य के साथ, बुद्धिमानी और न्याय पर आधारित, न कि बेकार या खेल-तमाशे के तौर पर।
- आयत (آيَةً): निशानी, सबूत, दलील।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने आसमानों और ज़मीन को सच्चाई और अदल के साथ पैदा किया है। उसने यह सब कुछ बेकार या मज़ाक़ के तौर पर नहीं बनाया, बल्कि एक गहरे हिकमत (बुद्धिमत्ता) और सही मक़सद के तहत पैदा किया। यह पूरी कायनात — ये विशाल आसमान, ये चमकते सितारे, ये ऊँचे पहाड़, ये बहते समुद्र, और यह धरती जो हमें सहारा देती है — सब कुछ अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) का ज़िंदा सबूत है।
इस सृष्टि में मोमिनों (ईमानवालों) के लिए एक बड़ी निशानी है। जब वे इस कायनात को देखते हैं, तो उनकी आँखें खुल जाती हैं और उनका दिल अल्लाह की अज़मत (महानता) और वहदानियत (एकता) की गवाही देता है। वे हर चीज़ में अल्लाह की क़ुदरत के निशान देखते हैं — रात और दिन के बदलने में, बारिश के बाद ज़मीन के हरे-भरे होने में, और अपने जिस्म के बनावट में भी। यह सब उन्हें याद दिलाता है कि इस कायनात का ख़ालिक़ (रचनेवाला) एक ही है, और वही इबादत के लायक़ है।
लेकिन यह निशानी सिर्फ़ उन्हीं लोगों के लिए फ़ायदेमंद है जो ईमान रखते हैं। काफ़िर लोग इन्हीं आयतों के बीच रहते हुए भी ग़ाफ़िल रहते हैं — वे आसमान की बुलंदी देखते हैं, लेकिन उसके बनाने वाले की अज़मत नहीं पहचानते; वे ज़मीन की हुस्न-ओ-जमाल देखते हैं, लेकिन उसके पैदा करने वाले की क़ुदरत से बेख़बर रहते हैं। उनकी निगाहें देखती हैं, लेकिन उनके दिल अंधे हैं।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें ग़ौर और फ़िक्र की दावत देती है। जब भी तुम आसमान की तरफ़ देखो, जब भी ज़मीन की हरियाली पर नज़र पड़े, तो याद करो कि यह सब किसी खिलाड़ी ने नहीं बनाया, बल्कि उस ज़ात ने बनाया है जो हर चीज़ पर क़ादिर है। यही ग़ौर-ओ-फ़िक्र हमारे ईमान को मज़बूत करता है और हमें अल्लाह के और करीब लाता है। अल्लाह तआला हम सबको इस कायनात की निशानियों से सीखने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 42-46 — अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 44
सूरा अल-अंकबूत आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा ने सारे आसमान और ज़मीन को बिल्कुल ठीक पैदा…सूरा आयत 44/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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