Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِيَكْفُرُوا – ताकि वे कृतघ्नता करें (अर्थात नेमतों का इनकार करें)
- بِمَا آتَيْنَاهُمْ – उस चीज़ के साथ जो हमने उन्हें दी (अर्थात नेमतें और रिज़्क़)
- وَلِيَتَمَتَّعُوا – और ताकि वे (दुनिया में) आनंद उठाएँ
- فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ – तो वे जल्द ही जान लेंगे (अपने किए का अंजाम)
तफ़सीर (व्याख्या):
जब ये लोग समुद्र में सफ़र करते हैं और तूफ़ान या डूबने का ख़तरा पैदा होता है, तो वे सारे झूठे माबूदों को भूलकर सिर्फ़ अल्लाह को पुकारते हैं और उसी से मदद माँगते हैं। लेकिन जब अल्लाह उन्हें सुरक्षित किनारे तक पहुँचा देता है और उनकी मुसीबत टल जाती है, तो वे फिर से अपने शिर्क (बहुदेववाद) की तरफ लौट जाते हैं। यह उनकी बड़ी नाइंसाफ़ी और विरोधाभास है — मुसीबत में तो वे अल्लाह को एक मानते हैं, लेकिन राहत मिलते ही उसके साथ दूसरों को शरीक करने लगते हैं।
यह उनका यह कृत्य इसलिए है ताकि वे उन नेमतों का इनकार करें जो अल्लाह ने उन्हें दी हैं — जैसे जान, माल, सेहत और सुरक्षा — और ताकि वे दुनिया के अस्थायी सुख-आनंद में डूबे रहें। वे समझते हैं कि यही उनकी कामयाबी है, लेकिन वे बहुत बड़ी ग़लती पर हैं। अल्लाह फ़रमाता है: "फिर वे जल्द ही जान लेंगे" — यानी जब मौत उनके सामने आएगी, या क़यामत का दिन आएगा, तो उन्हें पता चल जाएगा कि उनका यह कृत्य कितना बुरा था और उन्होंने कितनी बड़ी नेमतों को ठुकराया था। उस दिन उनके लिए दर्दनाक अज़ाब तैयार है, और यही उनका असली अंजाम होगा।
दावती पहलू (नसीहत):
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है — कि हमें सिर्फ़ मुसीबत के वक़्त अल्लाह को याद नहीं करना चाहिए, बल्कि हर हालत में उसका शुक्र अदा करना चाहिए। जब अल्लाह हमें राहत देता है, तो यह उसकी रहमत है, और हमें उस रहमत का सही इस्तेमाल करना चाहिए — नेकी में, इबादत में, और लोगों की मदद में। अगर हम नेमतें पाकर भी अल्लाह से ग़ाफ़िल रहें, तो यह हमारी नाइंसाफ़ी है। अल्लाह बहुत मेहरबान है, वह हमें मौक़ा देता है, लेकिन एक दिन हमें अपने आमाल का हिसाब देना होगा। इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को सुधारें, अल्लाह के शुक्रगुज़ार बनें, और उसकी नेमतों को अपने लिए रहमत का ज़रिया बनाएँ — यही हमारी कामयाबी है।
📜 आयत 64-68 — सूरा अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 66
सूरा अल-अंकबूत आयत 66 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि जो (नेअमतें) हमने उन्हें अता की हैं उनका इन्कार…सूरा आयत 66/69 — सूरा अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंकबूत सुनें, सूरा अल-अंकबूत अनुवाद, सूरा अल-अंकबूत mp3, सूरा अल-अंकबूत pdf. आयत 64–68. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अंकबूत
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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