आल-इमरान · 130/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَأْكُلُوا الرِّبَا أَضْعَافًا مُّضَاعَفَةً ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ ۝١٣٠
Yaaa ayyuhal lazeena aamanoo la taakuhur ribaaa ad`aafam mudaa`afatanw wattaqul laaha la`allakum tuflihoon
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानदारों सूद दनादन खाते न चले जाओ और ख़ुदा से डरो कि तुम छुटकारा पाओ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • रिबा (سود): अर्थात ब्याज या सूद, जो इस्लाम में सख्त रूप से वर्जित है।
  • अज़'आफ़न मुदा'अफ़ा (कई गुना बढ़ा हुआ): यानी ब्याज पर ब्याज, जो समय के साथ बढ़ता जाए, जैसा जाहिलियत के ज़माने में रिवाज था कि जब कर्ज़ की मियाद पूरी होती तो वे कहते: या तो कर्ज़ चुका दो या ब्याज बढ़ा दो, और इस तरह रकम कई गुना हो जाती थी।
  • तुफ़्लिहू (सफल हो जाओ): यानी दुनिया और आख़िरत की भलाई और कामयाबी पा लो।

तफ़सीर:

ऐ ईमान लाने वालों! अल्लाह तआला तुम्हें साफ़ और स्पष्ट हुक्म देता है कि सूद (ब्याज) को मत खाओ, खासकर उस तरह का सूद जो बढ़ता चला जाए और कई गुना हो जाए। यानी जब कर्ज़ की मियाद पूरी हो और कर्ज़दार अदा न कर सके, तो तुम उस पर अतिरिक्त रकम लादकर मियाद बढ़ा दो, और यही सिलसिला चलता रहे यहाँ तक कि छोटी सी रकम भी बहुत बड़ी हो जाए। यह वही तरीका है जो जाहिलियत के ज़माने में रिवाज था, और इस्लाम ने इस पर पूरी तरह से रोक लगा दी।

याद रखो कि सूद सिर्फ एक आर्थिक लेन-देन नहीं है, बल्कि यह समाज में नफ़रत, लालच और बेरहमी पैदा करता है। यह अमीरों को और अमीर और ग़रीबों को और ग़रीब बनाता है। इसलिए अल्लाह तुम्हें इससे बचने का हुक्म देता है, चाहे वह थोड़ा हो या ज़्यादा, क्योंकि थोड़ा सूद भी हराम है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और अल्लाह से डरो" यानी उसके हुक्मों का पालन करो और उसकी मनाही से बचो, ताकि तुम सफल हो जाओ। यह सफलता सिर्फ दुनिया की दौलत इकट्ठा करने का नाम नहीं है, बल्कि असली सफलता यह है कि तुम अल्लाह की रज़ा पा लो, उसकी रहमत के हक़दार बनो, और आख़िरत में जन्नत की नेमतें हासिल करो।

ऐ मेरे प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ इबादत का नाम नहीं, बल्कि हमारी पूरी ज़िंदगी का निज़ाम है। अल्लाह ने हमारे लिए जो हलाल किया है उसमें बरकत रखी है, और जो हराम किया है उसमें हमारी तबाही है। सूद से बचकर हम न सिर्फ अल्लाह की नाराज़गी से बचते हैं, बल्कि अपने समाज को भी एक स्वस्थ आर्थिक व्यवस्था देते हैं। अल्लाह तआला हम सबको सूद की बुराइयों से बचाए और हमें हलाल रोज़ी में बरकत दे। आमीन।



📜 आयत 128-132 — आल-इमरान

128لَيْسَ لَكَ مِنَ الْأَمْرِ شَيْءٌ أَوْ يَتُوبَ عَلَيْهِمْ أَوْ يُعَذِّبَهُمْ فَإِنَّهُمْ ظَالِمُونَ
(ऐ रसूल) तुम्हारा तो इसमें कुछ बस नहीं चाहे ख़ुदा उनकी तौबा कुबूल करे या उनको सज़ा दे क्योंकि वह ज़ालिम तो ज़रूर हैं
129وَلِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۚ يَغْفِرُ لِمَن يَشَاءُ وَيُعَذِّبُ مَن يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब ख़ुदा ही का है जिसको चाहे बख्शे और जिसको चाहे सज़ा करे और ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबार है
130يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَأْكُلُوا الرِّبَا أَضْعَافًا مُّضَاعَفَةً ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
ऐ ईमानदारों सूद दनादन खाते न चले जाओ और ख़ुदा से डरो कि तुम छुटकारा पाओ
131وَاتَّقُوا النَّارَ الَّتِي أُعِدَّتْ لِلْكَافِرِينَ
और जहन्नुम की उस आग से डरो जो काफ़िरों के लिए तैयार की गयी है
132وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَالرَّسُولَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
और ख़ुदा और रसूल की फ़रमाबरदारी करो ताकि तुम पर रहम किया जाए
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अनुवाद — आल-इमरान 130

सूरा आल-इमरान आयत 130 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों सूद दनादन खाते न चले जाओ और ख़ुदा…

सूरा आयत 130/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 128–132. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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