Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَكَأَيِّن: अर्थात "कितने ही" — यहाँ यह अधिकता दर्शाने के लिए है।
- رِبِّيُّونَ: बहुवचन है, जिसका अर्थ है "रब्बानिय्यून" अर्थात ईश्वरभक्त, सच्चे अनुयायी, और धर्म के ज्ञानी लोग। कुछ विद्वानों ने इसे "बड़ी संख्या में जमातें" या "समूह" भी कहा है।
- وَهَنُوا: कमज़ोर पड़ना, हिम्मत हारना, ढीला पड़ना।
- اسْتَكَانُوا: दुश्मन के सामने झुकना, दबना, या उसके आगे आत्मसमर्पण कर देना।
व्याख्या:
यह आयत मुसलमानों को उहुद के युद्ध में मिली कठिनाइयों पर सांत्वना और सबक देती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि पिछले ज़मानों में भी बहुत से नबियों (अलैहिमुस्सलाम) के साथ उनके बड़ी संख्या में सच्चे और ईश्वरभक्त अनुयायी (रब्बानिय्यून) जिहाद के लिए निकले। रास्ते में उन्हें जो मुसीबतें आईं — चाहे वे घाव हों, शहादत हो, या दुश्मन की अस्थायी बढ़त — उन्होंने उनके सामने घुटने नहीं टेके। उनका हौसला नहीं टूटा, उनकी हिम्मत नहीं हारी, और न ही वे दुश्मन के सामने झुके। उन्होंने सब्र और स्थिरता का परिचय दिया, क्योंकि वे जानते थे कि यह सब अल्लाह की राह में है। और अल्लाह उन्हीं लोगों से मुहब्बत करता है जो सब्र करने वाले हों — यानी जो कठिन से कठिन हालात में भी अल्लाह पर भरोसा रखते हुए डटे रहें।
शिक्षाएँ और लाभ:
- सब्र की अहमियत: यह आयत सिखाती है कि अल्लाह की राह में आने वाली मुसीबतें इम्तिहान हैं। जो इन पर सब्र करता है, अल्लाह उससे मुहब्बत करता है — और अल्लाह की मुहब्बत से बड़ी कोई नेमत नहीं।
- नबियों की सुन्नत: हमारे लिए सबसे बड़ा नमूना नबियों और उनके साथियों का है। उन्होंने कभी हार नहीं मानी, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न रहे हों। यह हमें सिखाता है कि सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों को कभी निराश नहीं होना चाहिए।
- कमज़ोरी और झुकना मना है: मुसलमान को चाहिए कि वह दुश्मन के सामने न झुके, न कमज़ोर पड़े, और न ही उसके आगे दबे। यह आत्म-सम्मान और ईमान की मज़बूती की निशानी है।
- जिहाद की हक़ीक़त: जिहाद सिर्फ़ लड़ाई का नाम नहीं, बल्कि हर उस काम में सब्र और स्थिरता है जो अल्लाह की राह में किया जाए — चाहे वह इल्म हासिल करना हो, परिवार की ज़िम्मेदारी निभाना हो, या समाज की भलाई के लिए काम करना हो।
- अल्लाह की मुहब्बत की खैर: सब्र करने वालों को अल्लाह की मुहब्बत का वादा मिला है। यह वादा हर उस इंसान के लिए है जो मुश्किलों में भी अल्लाह पर भरोसा रखता है और अपने ईमान पर क़ायम रहता है।
📜 आयत 144-148 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 146
सूरा आल-इमरान आयत 146 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (मुसलमानों तुम ही नहीं) ऐसे पैग़म्बर बहुत से गुज़र…सूरा आयत 146/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 144–148. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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