आल-इमरान · 155/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
إِنَّ الَّذِينَ تَوَلَّوْا مِنكُمْ يَوْمَ الْتَقَى الْجَمْعَانِ إِنَّمَا اسْتَزَلَّهُمُ الشَّيْطَانُ بِبَعْضِ مَا كَسَبُوا ۖ وَلَقَدْ عَفَا اللَّهُ عَنْهُمْ ۗ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ حَلِيمٌ ۝١٥٥
Innal lazeena tawallaw minkum yawmal taqal jam`aani innamas tazallahumush Shaitaanu biba`di maa kasaboo wa laqad `afal laahu `anhum; innnal laaha Ghafoorum Haleem
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जिस दिन (जंगे औहद में) दो जमाअतें आपस में गुथ गयीं उस दिन जो लोग तुम (मुसलमानों) में से भाग खड़े हुए (उसकी वजह ये थी कि) उनके बाज़ गुनाहों (मुख़ालफ़ते रसूल) की वजह से शैतान ने बहका के उनके पॉव उखाड़ दिए और (उसी वक्त तो) ख़ुदा ने ज़रूर उनसे दरगुज़र की बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला बुर्दवार है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَوَلَّوْا: पीठ दिखाकर भाग गए, युद्ध से हट गए।
  • الْتَقَى الْجَمْعَانِ: दो समूह आमने-सामने हुए (मुसलमान और मुशरिकीन)।
  • اسْتَزَلَّهُمُ: उन्हें फिसला दिया, उनके क़दम डगमगा दिए।
  • بِبَعْضِ مَا كَسَبُوا: उनके किए हुए कुछ गुनाहों की वजह से।
  • عَفَا اللهُ: अल्लाह ने माफ़ कर दिया।
  • حَلِيم: बहुत सहनशील, जल्दी सज़ा देने वाला नहीं।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालों! उन लोगों की तरफ़ देखो जिन्होंने उस दिन पीठ दिखाई जब दोनों फ़ौजें (मुसलमान और मुशरिकीन) उहुद के मैदान में आमने-सामने हुईं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग अपनी मर्ज़ी से मैदान से नहीं भागे, बल्कि शैतान ने उनके किए हुए कुछ गुनाहों की वजह से उन्हें फिसला दिया। यानी उनकी कुछ कमज़ोरियाँ और नाफ़रमानियाँ थीं, जिन्होंने शैतान को उन पर हावी होने का मौक़ा दिया। शैतान ने उनके दिलों में डर और बुरे ख़यालात डाले, यहाँ तक कि वे अपनी जगह छोड़कर भाग खड़े हुए।

लेकिन देखो अल्लाह की रहमत और करम! उसने उन पर सख़्ती नहीं की, बल्कि उन्हें माफ़ कर दिया। अल्लाह ने उनके इस क़ुसूर (कमी) को दरगुज़र फ़रमाया और उन्हें सज़ा नहीं दी। यह उसकी बड़ी मेहरबानी है। अल्लाह ग़ुफ़्फ़ार है—गुनाहों को माफ़ करने वाला, और हलीम है—बहुत सहनशील, वह जल्दी में नहीं है, उसे अपने बंदों की परवाह नहीं कि वे भाग जाएँ, वह उन्हें मौक़ा देता है, तौबा का दरवाज़ा खुला रखता है।

इस आयत से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। पहली बात: गुनाह इंसान को कमज़ोर कर देते हैं और शैतान को उस पर क़ाबू देते हैं। दूसरी बात: अल्लाह की रहमत इतनी वसी' (विस्तृत) है कि वह अपने बंदों के गुनाहों को माफ़ कर देता है, बशर्ते वे सच्चे दिल से तौबा करें। तीसरी बात: अल्लाह जल्दबाज़ी नहीं करता, वह अपने बंदों को मौक़ा देता है कि वे सुधर जाएँ। यह हमारे लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है—चाहे हमसे कितनी ही भूलें हों, अल्लाह का दरवाज़ा बंद नहीं हुआ। बस हमें उसकी तरफ़ लौटना है, उससे माफ़ी माँगनी है, और उसकी रहमत से निराश नहीं होना है। अल्लाह हर हाल में अपने बंदों के साथ भलाई करने वाला है।

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📜 आयत 153-157 — आल-इमरान

153۞ إِذْ تُصْعِدُونَ وَلَا تَلْوُونَ عَلَىٰ أَحَدٍ وَالرَّسُولُ يَدْعُوكُمْ فِي أُخْرَاكُمْ فَأَثَابَكُمْ غَمًّا بِغَمٍّ لِّكَيْلَا تَحْزَنُوا عَلَىٰ مَا فَاتَكُمْ وَلَا مَا أَصَابَكُمْ ۗ وَاللَّهُ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ
(मुसलमानों तुम) उस वक्त क़ो याद करके शर्माओ जब तुम (बदहवास) भागे पहाड़ पर चले जाते थे पस (चूंकि) रसूल को तुमने (आज़ारदा) किया ख़ुदा ने भी तुमको (इस) रंज की सज़ा में (शिकस्त का) रंज दिया ताकि जब कभी तुम्हारी कोई चीज़ हाथ से जाती रहे या कोई मुसीबत पड़े तो तुम रंज न करो और सब्र करना सीखो और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे ख़बरदार है
154ثُمَّ أَنزَلَ عَلَيْكُم مِّن بَعْدِ الْغَمِّ أَمَنَةً نُّعَاسًا يَغْشَىٰ طَائِفَةً مِّنكُمْ ۖ وَطَائِفَةٌ قَدْ أَهَمَّتْهُمْ أَنفُسُهُمْ يَظُنُّونَ بِاللَّهِ غَيْرَ الْحَقِّ ظَنَّ الْجَاهِلِيَّةِ ۖ يَقُولُونَ هَل لَّنَا مِنَ الْأَمْرِ مِن شَيْءٍ ۗ قُلْ إِنَّ الْأَمْرَ كُلَّهُ لِلَّهِ ۗ يُخْفُونَ فِي أَنفُسِهِم مَّا لَا يُبْدُونَ لَكَ ۖ يَقُولُونَ لَوْ كَانَ لَنَا مِنَ الْأَمْرِ شَيْءٌ مَّا قُتِلْنَا هَاهُنَا ۗ قُل لَّوْ كُنتُمْ فِي بُيُوتِكُمْ لَبَرَزَ الَّذِينَ كُتِبَ عَلَيْهِمُ الْقَتْلُ إِلَىٰ مَضَاجِعِهِمْ ۖ وَلِيَبْتَلِيَ اللَّهُ مَا فِي صُدُورِكُمْ وَلِيُمَحِّصَ مَا فِي قُلُوبِكُمْ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ
फिर ख़ुदा ने इस रंज के बाद तुमपर इत्मिनान की हालत तारी की कि तुममें से एक गिरोह का (जो सच्चे ईमानदार थे) ख़ूब गहरी नींद आ गयी और एक गिरोह जिनको उस वक्त भी (भागने की शर्म से) जान के लाले पड़े थे ख़ुदा के साथ (ख्वाह मख्वाह) ज़मानाए जिहालत की ऐसी बदगुमानियॉ करने लगे और कहने लगे भला क्या ये अम्र (फ़तेह) कुछ भी हमारे इख्तियार में है (ऐ रसूल) कह दो कि हर अम्र का इख्तियार ख़ुदा ही को है (ज़बान से तो कहते ही है नहीं) ये अपने दिलों में ऐसी बातें छिपाए हुए हैं जो तुमसे ज़ाहिर नहीं करते (अब सुनो) कहते हैं कि इस अम्र (फ़तेह) में हमारा कुछ इख़्तियार होता तो हम यहॉ मारे न जाते (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि तुम अपने घरों में रहते तो जिन जिन की तकदीर में लड़के मर जाना लिखा था वह अपने (घरो से) निकल निकल के अपने मरने की जगह ज़रूर आ जाते और (ये इस वास्ते किया गया) ताकि जो कुछ तुम्हारे दिल में है उसका इम्तिहान कर दे और ख़ुदा तो दिलों के राज़ खूब जानता है
155إِنَّ الَّذِينَ تَوَلَّوْا مِنكُمْ يَوْمَ الْتَقَى الْجَمْعَانِ إِنَّمَا اسْتَزَلَّهُمُ الشَّيْطَانُ بِبَعْضِ مَا كَسَبُوا ۖ وَلَقَدْ عَفَا اللَّهُ عَنْهُمْ ۗ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ حَلِيمٌ
बेशक जिस दिन (जंगे औहद में) दो जमाअतें आपस में गुथ गयीं उस दिन जो लोग तुम (मुसलमानों) में से भाग खड़े हुए (उसकी वजह ये थी कि) उनके बाज़ गुनाहों (मुख़ालफ़ते रसूल) की वजह से शैतान ने बहका के उनके पॉव उखाड़ दिए और (उसी वक्त तो) ख़ुदा ने ज़रूर उनसे दरगुज़र की बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला बुर्दवार है
156يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ كَفَرُوا وَقَالُوا لِإِخْوَانِهِمْ إِذَا ضَرَبُوا فِي الْأَرْضِ أَوْ كَانُوا غُزًّى لَّوْ كَانُوا عِندَنَا مَا مَاتُوا وَمَا قُتِلُوا لِيَجْعَلَ اللَّهُ ذَٰلِكَ حَسْرَةً فِي قُلُوبِهِمْ ۗ وَاللَّهُ يُحْيِي وَيُمِيتُ ۗ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
ऐ ईमानदारों उन लोगों के ऐसे न बनो जो काफ़िर हो गए भाई बन्द उनके परदेस में निकले हैं या जेहाद करने गए हैं (और वहॉ) मर (गए) तो उनके बारे में कहने लगे कि वह हमारे पास रहते तो न मरते ओर न मारे जाते (और ये इस वजह से कहते हैं) ताकि ख़ुदा (इस ख्याल को) उनके दिलों में (बाइसे) हसरत बना दे और (यूं तो) ख़ुदा ही जिलाता और मारता है और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उसे देख रहा है
157وَلَئِن قُتِلْتُمْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ أَوْ مُتُّمْ لَمَغْفِرَةٌ مِّنَ اللَّهِ وَرَحْمَةٌ خَيْرٌ مِّمَّا يَجْمَعُونَ
और अगर तुम ख़ुदा की राह में मारे जाओ या (अपनी मौत से) मर जाओ तो बेशक ख़ुदा की बख्शिश और रहमत इस (माल व दौलत) से जिसको तुम जमा करते हो ज़रूर बेहतर है
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अनुवाद — आल-इमरान 155

सूरा आल-इमरान आयत 155 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जिस दिन (जंगे औहद में) दो जमाअतें आपस में…

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Tuesday, August 18, 2026

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