आल-इमरान · 16/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
الَّذِينَ يَقُولُونَ رَبَّنَا إِنَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ ۝١٦
Allazeena yaqooloona Rabbanaaa innanaaa aamannaa faghfir lanaa zunoobanaa wa qinaa `azaaban Naar
📖 हिंदी अर्थ
कि हमारे पालने वाले हम तो (बेताम्मुल) ईमान लाए हैं पस तू भी हमारे गुनाहों को बख्श दे और हमको दोज़ख़ के अज़ाब से बचा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَبَّنَا: हमारे पालनहार
  • إِنَّنَا آمَنَّا: हमने सच्चे दिल से ईमान लाया
  • فَاغْفِرْ لَنَا: हमारे गुनाहों को माफ कर दे
  • ذُنُوبَنَا: हमारे पाप और गुनाह
  • وَقِنَا: हमें बचा ले
  • عَذَابَ النَّارِ: जहन्नम की आग की सज़ा

तफ़सीर:

ये आयत उन मुत्तक़ी (परहेज़गार) बंदों का ज़िक्र कर रही है, जिनके लिए जन्नत तैयार की गई है। ये वो लोग हैं जो अपने रब से दुआ करते हुए कहते हैं: "ऐ हमारे पालनहार! हमने तुझ पर ईमान लाया, तेरी वहदानियत (एकता) को दिल से माना, तेरे रसूलों पर ईमान लाए और तेरी शरीयत पर चलने का अहद किया। हमने तेरे नबी मुहम्मद ﷺ पर ईमान लाया और उनकी लाई हुई हिदायत को कबूल किया।"

फिर वो अपने रब से तीन चीज़ें माँगते हैं:

पहली दुआ: "हमारे गुनाह माफ कर दे" — यानी हमारे पापों को ढाँक ले, हमारी ख़ताओं से दरगुज़र फरमा, और हमें उनकी सज़ा से बचा ले। वो जानते हैं कि इंसान गुनाहगार है और उसे अपने रब की रहमत की सख्त ज़रूरत है।

दूसरी दुआ: "हमें जहन्नम की आग के अज़ाब से बचा ले" — यानी हमें दोज़ख़ की आग से महफूज़ रख, जो बेहद सख्त और दर्दनाक अज़ाब है। ये दुआ उनके दिल में अल्लाह के अज़ाब का खौफ़ और उसकी रहमत की उम्मीद दोनों को ज़ाहिर करती है।

ये आयत हमें सिखाती है कि सच्चे मोमिन की पहचान ये है कि वो ईमान के साथ-साथ अपने गुनाहों का एहसास रखता है, अल्लाह से माफ़ी माँगता है और उसके अज़ाब से डरता है। ये दुआ हमें सिखाती है कि हमें भी अपने रब से इसी तरह दुआ करनी चाहिए — ईमान का इज़हार, गुनाहों की माफ़ी की दरख्वास्त और जहन्नम की आग से पनाह माँगना।

याद रखिए! अल्लाह तआला बेहद रहम फरमाने वाला है। जो बंदा सच्चे दिल से तौबा करके ये दुआ माँगता है, अल्लाह उसके गुनाह माफ कर देता है और उसे जन्नत की राह दिखाता है। ये आयत हमें उम्मीद देती है कि अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से कहीं बढ़कर है, बशर्ते हम सच्चे दिल से उसकी तरफ रुजू करें।



📜 आयत 14-18 — आल-इमरान

14زُيِّنَ لِلنَّاسِ حُبُّ الشَّهَوَاتِ مِنَ النِّسَاءِ وَالْبَنِينَ وَالْقَنَاطِيرِ الْمُقَنطَرَةِ مِنَ الذَّهَبِ وَالْفِضَّةِ وَالْخَيْلِ الْمُسَوَّمَةِ وَالْأَنْعَامِ وَالْحَرْثِ ۗ ذَٰلِكَ مَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَاللَّهُ عِندَهُ حُسْنُ الْمَآبِ
दुनिया में लोगों को उनकी मरग़ूब चीज़े (मसलन) बीवियों और बेटों और सोने चॉदी के बड़े बड़े लगे हुए ढेरों और उम्दा उम्दा घोड़ों और मवेशियों ओर खेती के साथ उलफ़त भली करके दिखा दी गई है ये सब दुनयावी ज़िन्दगी के (चन्द रोज़ा) फ़ायदे हैं और (हमेशा का) अच्छा ठिकाना तो ख़ुदा ही के यहॉ है
15۞ قُلْ أَؤُنَبِّئُكُم بِخَيْرٍ مِّن ذَٰلِكُمْ ۚ لِلَّذِينَ اتَّقَوْا عِندَ رَبِّهِمْ جَنَّاتٌ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا وَأَزْوَاجٌ مُّطَهَّرَةٌ وَرِضْوَانٌ مِّنَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ بَصِيرٌ بِالْعِبَادِ
(ऐ रसूल) उन लोगों से कह दो कि क्या मैं तुमको उन सब चीज़ों से बेहतर चीज़ बता दूं (अच्छा सुनो) जिन लोगों ने परहेज़गारी इख्तेयार की उनके लिए उनके परवरदिगार के यहॉ (बेहिश्त) के वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं (और वह) हमेशा उसमें रहेंगे और उसके अलावा उनके लिए साफ सुथरी बीवियॉ हैं और (सबसे बढ़कर) ख़ुदा की ख़ुशनूदी है और ख़ुदा (अपने) उन बन्दों को खूब देख रहा हे जो दुआऐं मॉगा करते हैं
16الَّذِينَ يَقُولُونَ رَبَّنَا إِنَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
कि हमारे पालने वाले हम तो (बेताम्मुल) ईमान लाए हैं पस तू भी हमारे गुनाहों को बख्श दे और हमको दोज़ख़ के अज़ाब से बचा
17الصَّابِرِينَ وَالصَّادِقِينَ وَالْقَانِتِينَ وَالْمُنفِقِينَ وَالْمُسْتَغْفِرِينَ بِالْأَسْحَارِ
(यही लोग हैं) सब्र करने वाले और सच बोलने वाले और (ख़ुदा के) फ़रमाबरदार और (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करने वाले और पिछली रातों में (ख़ुदा से तौबा) इस्तग़फ़ार करने वाले
18شَهِدَ اللَّهُ أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ وَالْمَلَائِكَةُ وَأُولُو الْعِلْمِ قَائِمًا بِالْقِسْطِ ۚ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
ज़रूर ख़ुदा और फ़रिश्तों और इल्म वालों ने गवाही दी है कि उसके सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं है और वह ख़ुदा अद्ल व इन्साफ़ के साथ (कारख़ानाए आलम का) सॅभालने वाला है उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वही हर चीज़ पर) ग़ालिब और दाना है (सच्चा) दीन तो ख़ुदा के नज़दीक यक़ीनन (बस यही) इस्लाम है
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अनुवाद — आल-इमरान 16

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Tuesday, August 18, 2026

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