अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- رَبَّنَا: हमारे पालनहार
- إِنَّنَا آمَنَّا: हमने सच्चे दिल से ईमान लाया
- فَاغْفِرْ لَنَا: हमारे गुनाहों को माफ कर दे
- ذُنُوبَنَا: हमारे पाप और गुनाह
- وَقِنَا: हमें बचा ले
- عَذَابَ النَّارِ: जहन्नम की आग की सज़ा
तफ़सीर:
ये आयत उन मुत्तक़ी (परहेज़गार) बंदों का ज़िक्र कर रही है, जिनके लिए जन्नत तैयार की गई है। ये वो लोग हैं जो अपने रब से दुआ करते हुए कहते हैं: "ऐ हमारे पालनहार! हमने तुझ पर ईमान लाया, तेरी वहदानियत (एकता) को दिल से माना, तेरे रसूलों पर ईमान लाए और तेरी शरीयत पर चलने का अहद किया। हमने तेरे नबी मुहम्मद ﷺ पर ईमान लाया और उनकी लाई हुई हिदायत को कबूल किया।"
फिर वो अपने रब से तीन चीज़ें माँगते हैं:
पहली दुआ: "हमारे गुनाह माफ कर दे" — यानी हमारे पापों को ढाँक ले, हमारी ख़ताओं से दरगुज़र फरमा, और हमें उनकी सज़ा से बचा ले। वो जानते हैं कि इंसान गुनाहगार है और उसे अपने रब की रहमत की सख्त ज़रूरत है।
दूसरी दुआ: "हमें जहन्नम की आग के अज़ाब से बचा ले" — यानी हमें दोज़ख़ की आग से महफूज़ रख, जो बेहद सख्त और दर्दनाक अज़ाब है। ये दुआ उनके दिल में अल्लाह के अज़ाब का खौफ़ और उसकी रहमत की उम्मीद दोनों को ज़ाहिर करती है।
ये आयत हमें सिखाती है कि सच्चे मोमिन की पहचान ये है कि वो ईमान के साथ-साथ अपने गुनाहों का एहसास रखता है, अल्लाह से माफ़ी माँगता है और उसके अज़ाब से डरता है। ये दुआ हमें सिखाती है कि हमें भी अपने रब से इसी तरह दुआ करनी चाहिए — ईमान का इज़हार, गुनाहों की माफ़ी की दरख्वास्त और जहन्नम की आग से पनाह माँगना।
याद रखिए! अल्लाह तआला बेहद रहम फरमाने वाला है। जो बंदा सच्चे दिल से तौबा करके ये दुआ माँगता है, अल्लाह उसके गुनाह माफ कर देता है और उसे जन्नत की राह दिखाता है। ये आयत हमें उम्मीद देती है कि अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से कहीं बढ़कर है, बशर्ते हम सच्चे दिल से उसकी तरफ रुजू करें।
📜 आयत 14-18 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 16
सूरा आल-इमरान आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि हमारे पालने वाले हम तो (बेताम्मुल) ईमान लाए हैं…सूरा आयत 16/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








