आल-इमरान · 17/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
الصَّابِرِينَ وَالصَّادِقِينَ وَالْقَانِتِينَ وَالْمُنفِقِينَ وَالْمُسْتَغْفِرِينَ بِالْأَسْحَارِ ۝١٧
Assaabireena wassaa diqeena walqaaniteena walmunfiqeena walmus taghfireena bil ashaar
📖 हिंदी अर्थ
(यही लोग हैं) सब्र करने वाले और सच बोलने वाले और (ख़ुदा के) फ़रमाबरदार और (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करने वाले और पिछली रातों में (ख़ुदा से तौबा) इस्तग़फ़ार करने वाले
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الصَّابِرِينَ: धैर्य रखने वाले
  • الصَّادِقِينَ: सत्य बोलने वाले
  • الْقَانِتِينَ: आज्ञाकारी, विनम्रतापूर्वक इबादत करने वाले
  • الْمُنفِقِينَ: खर्च करने वाले
  • الْمُسْتَغْفِرِينَ: क्षमा माँगने वाले
  • بِالْأَسْحَارِ: रात के अंतिम भाग में (सहरी का समय)

विस्तृत व्याख्या:

यह आयत उन ईमानवालों के गुणों का वर्णन करती है जो अल्लाह की दृष्टि में सच्चे और परहेज़गार हैं। ये वे लोग हैं जो धैर्य रखते हैं—धैर्य अल्लाह की आज्ञाओं का पालन करने में, बुरे कामों से बचने में, और जीवन की कठिनाइयों तथा दुख-दर्द पर। वे सत्यवादी हैं—अपनी बातों में, अपने वादों में, और अपने कर्मों में सच्चाई अपनाते हैं, चाहे वह छिपकर हो या खुलकर। वे आज्ञाकारी हैं—अल्लाह के सामने पूर्ण समर्पण और विनम्रता के साथ झुकते हैं, उसकी इबादत में कोई कमी नहीं रखते। वे खर्च करने वाले हैं—अपनी संपत्ति अल्लाह की राह में खर्च करते हैं, चाहे वह गुप्त रूप से हो या प्रकट रूप से, और इस खर्च में कंजूसी नहीं करते। और वे रात के अंतिम पहर में क्षमा माँगने वाले हैं—जब लोग गहरी नींद में होते हैं, वे उठकर अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी माँगते हैं, क्योंकि यह समय दुआ की स्वीकृति के लिए विशेष रूप से बेहतर होता है और दिल में कोई दुनियावी चिंता नहीं होती।

शिक्षाएँ और लाभ:

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चा ईमान केवल ज़ुबान का दावा नहीं, बल्कि अमल का सबूत है। अल्लाह के प्यारे बंदे वे हैं जो मुश्किलों में धैर्य रखें, हर हाल में सच बोलें, अल्लाह के आगे झुकें, अपनी संपत्ति दूसरों की भलाई में लगाएँ, और रात के सन्नाटे में अल्लाह से माफ़ी माँगें। यह आयत हमें सिखाती है कि इबादत का सबसे उत्तम समय रात का आखिरी हिस्सा है, जब दिल साफ और दुनिया से अलग होता है। यह हमें यह भी बताती है कि इस्लाम केवल व्यक्तिगत इबादत तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के लिए खर्च करना और दूसरों की मदद करना भी ईमान का अभिन्न अंग है। ये गुण ही इंसान को अल्लाह के करीब लाते हैं और उसे जन्नत के हक़दार बनाते हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 15-19 — आल-इमरान

15۞ قُلْ أَؤُنَبِّئُكُم بِخَيْرٍ مِّن ذَٰلِكُمْ ۚ لِلَّذِينَ اتَّقَوْا عِندَ رَبِّهِمْ جَنَّاتٌ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا وَأَزْوَاجٌ مُّطَهَّرَةٌ وَرِضْوَانٌ مِّنَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ بَصِيرٌ بِالْعِبَادِ
(ऐ रसूल) उन लोगों से कह दो कि क्या मैं तुमको उन सब चीज़ों से बेहतर चीज़ बता दूं (अच्छा सुनो) जिन लोगों ने परहेज़गारी इख्तेयार की उनके लिए उनके परवरदिगार के यहॉ (बेहिश्त) के वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं (और वह) हमेशा उसमें रहेंगे और उसके अलावा उनके लिए साफ सुथरी बीवियॉ हैं और (सबसे बढ़कर) ख़ुदा की ख़ुशनूदी है और ख़ुदा (अपने) उन बन्दों को खूब देख रहा हे जो दुआऐं मॉगा करते हैं
16الَّذِينَ يَقُولُونَ رَبَّنَا إِنَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
कि हमारे पालने वाले हम तो (बेताम्मुल) ईमान लाए हैं पस तू भी हमारे गुनाहों को बख्श दे और हमको दोज़ख़ के अज़ाब से बचा
17الصَّابِرِينَ وَالصَّادِقِينَ وَالْقَانِتِينَ وَالْمُنفِقِينَ وَالْمُسْتَغْفِرِينَ بِالْأَسْحَارِ
(यही लोग हैं) सब्र करने वाले और सच बोलने वाले और (ख़ुदा के) फ़रमाबरदार और (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करने वाले और पिछली रातों में (ख़ुदा से तौबा) इस्तग़फ़ार करने वाले
18شَهِدَ اللَّهُ أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ وَالْمَلَائِكَةُ وَأُولُو الْعِلْمِ قَائِمًا بِالْقِسْطِ ۚ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
ज़रूर ख़ुदा और फ़रिश्तों और इल्म वालों ने गवाही दी है कि उसके सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं है और वह ख़ुदा अद्ल व इन्साफ़ के साथ (कारख़ानाए आलम का) सॅभालने वाला है उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वही हर चीज़ पर) ग़ालिब और दाना है (सच्चा) दीन तो ख़ुदा के नज़दीक यक़ीनन (बस यही) इस्लाम है
19إِنَّ الدِّينَ عِندَ اللَّهِ الْإِسْلَامُ ۗ وَمَا اخْتَلَفَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ إِلَّا مِن بَعْدِ مَا جَاءَهُمُ الْعِلْمُ بَغْيًا بَيْنَهُمْ ۗ وَمَن يَكْفُرْ بِآيَاتِ اللَّهِ فَإِنَّ اللَّهَ سَرِيعُ الْحِسَابِ
और अहले किताब ने जो उस दीने हक़ से इख्तेलाफ़ किया तो महज़ आपस की शरारत और असली (अम्र) मालूम हो जाने के बाद (ही क्या है) और जिस शख्स ने ख़ुदा की निशानियों से इन्कार किया तो (वह समझ ले कि यक़ीनन ख़ुदा (उससे) बहुत जल्दी हिसाब लेने वाला है
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अनुवाद — आल-इमरान 17

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Tuesday, August 18, 2026

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