Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَا يَغُرَّنَّكَ: तुम्हें धोखा न दे, तुम्हें मोहित न कर ले।
- تَقَلُّبُ: आना-जाना, चलना-फिरना, विभिन्न स्थानों में घूमना, व्यापार और कमाई के लिए इधर-उधर जाना।
- فِي الْبِلَادِ: विभिन्न देशों और शहरों में।
विस्तृत विवरण:
हे नबी! काफिरों का देशों में चलना-फिरना, उनका व्यापार-वाणिज्य में फैलाव, उनकी आर्थिक समृद्धि और जीवन की सुख-सुविधाएँ देखकर तुम धोखे में न पड़ो। उनका यह वैभव और ऐश्वर्य उनकी सच्चाई या सफलता का प्रमाण नहीं है। यह सब कुछ अस्थायी है और अल्लाह की ओर से एक इम्तिहान है। जब कुछ कमज़ोर ईमान वाले मुसलमानों ने यह देखा कि काफिर व्यापार और आर्थिक गतिविधियों में खूब आगे बढ़ रहे हैं, जबकि मुसलमान कठिनाइयों और तंगी का सामना कर रहे हैं, तो वे दुखी हुए। इस पर अल्लाह ने यह आयत उतारी कि इन काफिरों की यह चमक-दमक और व्यापारिक सफलता तुम्हें किसी भ्रम में न डाले। यह सब कुछ बहुत जल्दी खत्म होने वाला है। उनकी यह दौलत और ताकत उन्हें अल्लाह की पकड़ से नहीं बचा सकती। वास्तविक सफलता और स्थायी समृद्धि तो अल्लाह की राह में है, और उनका यह संसारी वैभव उनके लिए अज़ाब का कारण बनेगा, क्योंकि वे इसका उपयोग अल्लाह की नाफ़रमानी में कर रहे हैं। अतः इस अस्थायी सुख-समृद्धि को देखकर न तो तुम दुखी होओ और न ही उनकी इस हालत से प्रभावित होओ।
शिक्षाएँ और लाभ:
- यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि दुनिया की नाप-तौल अल्लाह की नाप-तौल से अलग है। किसी की दौलत, ताकत और सुख-सुविधाएँ उसके अल्लाह के करीब होने का सबूत नहीं हैं।
- मुसलमान को अपने ईमान और अल्लाह के वादों पर भरोसा रखना चाहिए, न कि दुनिया के दिखावे से प्रभावित होना चाहिए। असली कामयाबी अल्लाह की रज़ा और उसकी राह में सब्र करने में है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि काफिरों की दुनियावी तरक्की देखकर निराश या परेशान नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह सब कुछ फ़ानी (नाशवान) है और आख़िरत में उनका अंजाम बहुत बुरा है।
- मुसलमान को चाहिए कि वह अपनी निगाहें आख़िरत की स्थायी सफलता पर रखे, न कि दुनिया की अस्थायी चमक पर। यही वह चीज़ है जो उसे अल्लाह की राह पर स्थिर रहने में मदद देती है।
📜 आयत 194-198 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 196
सूरा आल-इमरान आयत 196 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) काफ़िरों का शहरों शहरों चैन करते फिरना तुम्हे…सूरा आयत 196/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 194–198. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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