Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَاسْتَجَابَ لَهُمْ رَبُّهُمْ: उनके रब ने उनकी दुआ क़बूल की।
- لَا أُضِيعُ: मैं बर्बाद नहीं करता, यानी अमल को बेकार नहीं करता।
- عَامِلٍ: काम करने वाला, अमल करने वाला।
- أُخْرِجُوا مِن دِيَارِهِمْ: उन्हें उनके घरों से निकाला गया।
- أُوذُوا: उन्हें सताया गया, तकलीफ़ दी गई।
- لَأُكَفِّرَنَّ: मैं ज़रूर माफ़ कर दूँगा और ढक दूँगा।
- حُسْنُ الثَّوَابِ: सबसे अच्छा बदला और इनाम।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपने नेक बंदों की दुआ का जवाब देते हुए फ़रमा रहे हैं कि उनके रब ने उनकी पुकार सुन ली और उन्हें यक़ीन दिलाया कि मैं किसी भी अमल करने वाले का अमल हरगिज़ बर्बाद नहीं करता — चाहे वह मर्द हो या औरत। यह अल्लाह का बेपनाह करम है कि उसकी रहमत में मर्द और औरत का कोई फ़र्क़ नहीं, दोनों के नेक अमल उसके यहाँ बराबर क़बूल हैं। फिर अल्लाह ने यह भी बताया कि तुम सब एक दूसरे से हो, यानी तुम्हारा दीन, तुम्हारा नसब और तुम्हारा रिश्ता एक है — सब आपस में भाई हो, इसलिए तुम्हारे अमल की क़द्र भी एक जैसी है।
इसके बाद अल्लाह तआला उन लोगों के बारे में बताता है जिन्होंने अपने वतन को छोड़ा, अपने घरों से निकाले गए, अल्लाह की राह में सताए गए, और जिन्होंने अल्लाह के दीन की सरबुलंदी के लिए जंग की और शहीद हुए। अल्लाह फ़रमाता है कि ऐसे लोगों के गुनाहों को मैं ज़रूर माफ़ कर दूँगा और उन्हें ऐसी जन्नतों में दाखिल करूँगा जिनके नीचे नहरें बहती हैं। यह इनाम अल्लाह की तरफ़ से है, और अल्लाह के पास सबसे अच्छा बदला है।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की राह में क़ुर्बानी देने वालों का अंजाम कभी बर्बाद नहीं होता। चाहे दुनिया में कितनी भी मुश्किलें आएँ, अल्लाह का वादा है कि वह हर नेक अमल का बदला देगा। यह हमारे लिए सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी है कि अल्लाह की रहमत और उसका इनाम किसी ज़ात, जिंस या हैसियत की मोहताज नहीं — सिर्फ़ नेक अमल और सच्ची नीयत काफ़ी है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की राह में कोई भी क़ुर्बानी दें, वह कभी ज़ाया नहीं होगी। अल्लाह हमें अपनी राह में साबित-क़दम रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 193-197 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 195
सूरा आल-इमरान आयत 195 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो उनके परवरदिगार ने दुआ कुबूल कर ली और (फ़रमाया)…सूरा आयत 195/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 193–197. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


