आल-इमरान · 195/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
فَاسْتَجَابَ لَهُمْ رَبُّهُمْ أَنِّي لَا أُضِيعُ عَمَلَ عَامِلٍ مِّنكُم مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ ۖ بَعْضُكُم مِّن بَعْضٍ ۖ فَالَّذِينَ هَاجَرُوا وَأُخْرِجُوا مِن دِيَارِهِمْ وَأُوذُوا فِي سَبِيلِي وَقَاتَلُوا وَقُتِلُوا لَأُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ وَلَأُدْخِلَنَّهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ثَوَابًا مِّنْ عِندِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ عِندَهُ حُسْنُ الثَّوَابِ ۝١٩٥
Fastajaaba lahum Rabbuhum annee laaa Udee`u `amala `aamilim minkum min zakarin aw unsaa ba`dukum mim ba`din fal lazeena haajaroo wa ukhrijoo min diyaarihim wa oozoo fee sabeelee wa qaataloo wa qutiloo la ukaffiranna `anhum saiyi aatihim wa la udkhilanna hum Jannnatin tajree min tahtihal anhaaru sawaabam min `indil laah; wallaahu `indahoo husnus sawaab
📖 हिंदी अर्थ
तो उनके परवरदिगार ने दुआ कुबूल कर ली और (फ़रमाया) कि हम तुममें से किसी काम करने वाले के काम को अकारत नहीं करते मर्द हो या औरत (उस में कुछ किसी की खुसूसियत नहीं क्योंकि) तुम एक दूसरे (की जिन्स) से हो जो लोग (हमारे लिए वतन आवारा हुए) और शहर बदर किए गए और उन्होंने हमारी राह में अज़ीयतें उठायीं और (कुफ्फ़र से) जंग की और शहीद हुए मैं उनकी बुराईयों से ज़रूर दरगुज़र करूंगा और उन्हें बेहिश्त के उन बाग़ों में ले जाऊॅगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं ख़ुदा के यहॉ ये उनके किये का बदला है और ख़ुदा (ऐसा ही है कि उस) के यहॉ तो अच्छा ही बदला है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاسْتَجَابَ لَهُمْ رَبُّهُمْ: उनके रब ने उनकी दुआ क़बूल की।
  • لَا أُضِيعُ: मैं बर्बाद नहीं करता, यानी अमल को बेकार नहीं करता।
  • عَامِلٍ: काम करने वाला, अमल करने वाला।
  • أُخْرِجُوا مِن دِيَارِهِمْ: उन्हें उनके घरों से निकाला गया।
  • أُوذُوا: उन्हें सताया गया, तकलीफ़ दी गई।
  • لَأُكَفِّرَنَّ: मैं ज़रूर माफ़ कर दूँगा और ढक दूँगा।
  • حُسْنُ الثَّوَابِ: सबसे अच्छा बदला और इनाम।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपने नेक बंदों की दुआ का जवाब देते हुए फ़रमा रहे हैं कि उनके रब ने उनकी पुकार सुन ली और उन्हें यक़ीन दिलाया कि मैं किसी भी अमल करने वाले का अमल हरगिज़ बर्बाद नहीं करता — चाहे वह मर्द हो या औरत। यह अल्लाह का बेपनाह करम है कि उसकी रहमत में मर्द और औरत का कोई फ़र्क़ नहीं, दोनों के नेक अमल उसके यहाँ बराबर क़बूल हैं। फिर अल्लाह ने यह भी बताया कि तुम सब एक दूसरे से हो, यानी तुम्हारा दीन, तुम्हारा नसब और तुम्हारा रिश्ता एक है — सब आपस में भाई हो, इसलिए तुम्हारे अमल की क़द्र भी एक जैसी है।

इसके बाद अल्लाह तआला उन लोगों के बारे में बताता है जिन्होंने अपने वतन को छोड़ा, अपने घरों से निकाले गए, अल्लाह की राह में सताए गए, और जिन्होंने अल्लाह के दीन की सरबुलंदी के लिए जंग की और शहीद हुए। अल्लाह फ़रमाता है कि ऐसे लोगों के गुनाहों को मैं ज़रूर माफ़ कर दूँगा और उन्हें ऐसी जन्नतों में दाखिल करूँगा जिनके नीचे नहरें बहती हैं। यह इनाम अल्लाह की तरफ़ से है, और अल्लाह के पास सबसे अच्छा बदला है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की राह में क़ुर्बानी देने वालों का अंजाम कभी बर्बाद नहीं होता। चाहे दुनिया में कितनी भी मुश्किलें आएँ, अल्लाह का वादा है कि वह हर नेक अमल का बदला देगा। यह हमारे लिए सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी है कि अल्लाह की रहमत और उसका इनाम किसी ज़ात, जिंस या हैसियत की मोहताज नहीं — सिर्फ़ नेक अमल और सच्ची नीयत काफ़ी है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की राह में कोई भी क़ुर्बानी दें, वह कभी ज़ाया नहीं होगी। अल्लाह हमें अपनी राह में साबित-क़दम रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 193-197 — आल-इमरान

193رَّبَّنَا إِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِيًا يُنَادِي لِلْإِيمَانِ أَنْ آمِنُوا بِرَبِّكُمْ فَآمَنَّا ۚ رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ الْأَبْرَارِ
ऐ हमारे पालने वाले (जब) हमने एक आवाज़ लगाने वाले (पैग़म्बर) को सुना कि वह (ईमान के वास्ते यूं पुकारता था) कि अपने परवरदिगार पर ईमान लाओ तो हम ईमान लाए पस ऐ हमारे पालने वाले हमें हमारे गुनाह बख्श दे और हमारी बुराईयों को हमसे दूर करे दे और हमें नेकों के साथ (दुनिया से) उठा ले
194رَبَّنَا وَآتِنَا مَا وَعَدتَّنَا عَلَىٰ رُسُلِكَ وَلَا تُخْزِنَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ إِنَّكَ لَا تُخْلِفُ الْمِيعَادَ
और ऐ पालने वाले अपने रसूलों की मार्फत जो कुछ हमसे वायदा किया है हमें दे और हमें क़यामत के दिन रूसवा न कर तू तो वायदा ख़िलाफ़ी करता ही नहीं
195فَاسْتَجَابَ لَهُمْ رَبُّهُمْ أَنِّي لَا أُضِيعُ عَمَلَ عَامِلٍ مِّنكُم مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ ۖ بَعْضُكُم مِّن بَعْضٍ ۖ فَالَّذِينَ هَاجَرُوا وَأُخْرِجُوا مِن دِيَارِهِمْ وَأُوذُوا فِي سَبِيلِي وَقَاتَلُوا وَقُتِلُوا لَأُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ وَلَأُدْخِلَنَّهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ثَوَابًا مِّنْ عِندِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ عِندَهُ حُسْنُ الثَّوَابِ
तो उनके परवरदिगार ने दुआ कुबूल कर ली और (फ़रमाया) कि हम तुममें से किसी काम करने वाले के काम को अकारत नहीं करते मर्द हो या औरत (उस में कुछ किसी की खुसूसियत नहीं क्योंकि) तुम एक दूसरे (की जिन्स) से हो जो लोग (हमारे लिए वतन आवारा हुए) और शहर बदर किए गए और उन्होंने हमारी राह में अज़ीयतें उठायीं और (कुफ्फ़र से) जंग की और शहीद हुए मैं उनकी बुराईयों से ज़रूर दरगुज़र करूंगा और उन्हें बेहिश्त के उन बाग़ों में ले जाऊॅगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं ख़ुदा के यहॉ ये उनके किये का बदला है और ख़ुदा (ऐसा ही है कि उस) के यहॉ तो अच्छा ही बदला है
196لَا يَغُرَّنَّكَ تَقَلُّبُ الَّذِينَ كَفَرُوا فِي الْبِلَادِ
(ऐ रसूल) काफ़िरों का शहरों शहरों चैन करते फिरना तुम्हे धोखे में न डाले
197مَتَاعٌ قَلِيلٌ ثُمَّ مَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ ۚ وَبِئْسَ الْمِهَادُ
ये चन्द रोज़ा फ़ायदा हैं फिर तो (आख़िरकार) उनका ठिकाना जहन्नुम ही है और क्या ही बुरा ठिकाना है
आल-इमरानकुरान सूची
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अनुवाद — आल-इमरान 195

सूरा आल-इमरान आयत 195 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो उनके परवरदिगार ने दुआ कुबूल कर ली और (फ़रमाया)…

सूरा आयत 195/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 193–197. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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