आल-इमरान · 197/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
مَتَاعٌ قَلِيلٌ ثُمَّ مَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ ۚ وَبِئْسَ الْمِهَادُ ۝١٩٧
Mataa`un qaleelun summa maawaahum Jahannam; wa bi`sal mihaad
📖 हिंदी अर्थ
ये चन्द रोज़ा फ़ायदा हैं फिर तो (आख़िरकार) उनका ठिकाना जहन्नुम ही है और क्या ही बुरा ठिकाना है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَتَاعٌ: सांसारिक सुख-सामग्री, जीवन का अस्थायी उपभोग।
  • قَلِيلٌ: बहुत थोड़ा, अत्यंत सीमित।
  • مَأْوَاهُمْ: उनका ठिकाना, उनका अंतिम आश्रय स्थल।
  • جَهَنَّمُ: नरक, दोज़ख।
  • مِهَادٌ: बिछौना, फ़र्श, आरामगाह।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों की हालत बयान कर रही है जो दुनिया की चमक-दमक और अस्थायी सुखों में मग्न होकर अल्लाह के दीन से ग़ाफ़िल हो जाते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह दुनिया और इसके सारे सुख-साधन, चाहे वे कितने ही भव्य और आकर्षक क्यों न हों, अंततः एक बहुत ही थोड़ा और फ़ानी (नाशवान) सामान हैं। यह जीवन एक पल की मेहमानी है, जो आँख के झपकते ही ख़त्म हो जाती है।

इसके बाद उनका असली ठिकाना और अंतिम पड़ाव जहन्नम (नरक) है। यह वह जगह है जहाँ वे हमेशा के लिए रहेंगे। अल्लाह ने इस नरक को उनके लिए बिछौने के रूप में वर्णित किया है, और कितना बुरा बिछौना है वह! एक ऐसा बिछौना जो आग से बना हो, जहाँ हर तरफ़ अज़ाब और यातना ही यातना हो।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें दुनिया की हक़ीक़त से आगाह कर रहे हैं कि यह दुनिया किसी को धोखे में न डाल दे। जो लोग सिर्फ़ दुनिया की ख़्वाहिशों में डूबे रहते हैं और आख़िरत को भूल जाते हैं, वे अंततः इसी बुरे अंजाम तक पहुँचेंगे।

दावती पहलू:

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अगर हम आज की इस चमकती हुई दुनिया को देखें, तो लगता है कि यही सब कुछ है, लेकिन अल्लाह हमें बता रहे हैं कि यह सब कुछ नहीं है। यह तो बस एक छोटा सा खेल है। असली ज़िंदगी तो आख़िरत की ज़िंदगी है। जिसने अपनी ज़िंदगी अल्लाह की इबादत और उसके हुक्मों के अनुसार गुज़ारी, उसके लिए जन्नत है, और जिसने दुनिया को ही अपना मक़सद बना लिया और अल्लाह से ग़ाफ़िल रहा, उसके लिए यही बुरा अंजाम है।

आओ, हम सब इस आयत से सबक़ लें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ। दुनिया की मोहब्बत को दिल से निकालें और आख़िरत की तैयारी में लग जाएँ, क्योंकि यही दुनिया तो चंद रोज़ की है, और आख़िरत हमेशा की है। अल्लाह हम सबको सीधी राह दिखाए और जहन्नम के अज़ाब से बचाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 195-199 — आल-इमरान

195فَاسْتَجَابَ لَهُمْ رَبُّهُمْ أَنِّي لَا أُضِيعُ عَمَلَ عَامِلٍ مِّنكُم مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ ۖ بَعْضُكُم مِّن بَعْضٍ ۖ فَالَّذِينَ هَاجَرُوا وَأُخْرِجُوا مِن دِيَارِهِمْ وَأُوذُوا فِي سَبِيلِي وَقَاتَلُوا وَقُتِلُوا لَأُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ وَلَأُدْخِلَنَّهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ثَوَابًا مِّنْ عِندِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ عِندَهُ حُسْنُ الثَّوَابِ
तो उनके परवरदिगार ने दुआ कुबूल कर ली और (फ़रमाया) कि हम तुममें से किसी काम करने वाले के काम को अकारत नहीं करते मर्द हो या औरत (उस में कुछ किसी की खुसूसियत नहीं क्योंकि) तुम एक दूसरे (की जिन्स) से हो जो लोग (हमारे लिए वतन आवारा हुए) और शहर बदर किए गए और उन्होंने हमारी राह में अज़ीयतें उठायीं और (कुफ्फ़र से) जंग की और शहीद हुए मैं उनकी बुराईयों से ज़रूर दरगुज़र करूंगा और उन्हें बेहिश्त के उन बाग़ों में ले जाऊॅगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं ख़ुदा के यहॉ ये उनके किये का बदला है और ख़ुदा (ऐसा ही है कि उस) के यहॉ तो अच्छा ही बदला है
196لَا يَغُرَّنَّكَ تَقَلُّبُ الَّذِينَ كَفَرُوا فِي الْبِلَادِ
(ऐ रसूल) काफ़िरों का शहरों शहरों चैन करते फिरना तुम्हे धोखे में न डाले
197مَتَاعٌ قَلِيلٌ ثُمَّ مَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ ۚ وَبِئْسَ الْمِهَادُ
ये चन्द रोज़ा फ़ायदा हैं फिर तो (आख़िरकार) उनका ठिकाना जहन्नुम ही है और क्या ही बुरा ठिकाना है
198لَٰكِنِ الَّذِينَ اتَّقَوْا رَبَّهُمْ لَهُمْ جَنَّاتٌ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا نُزُلًا مِّنْ عِندِ اللَّهِ ۗ وَمَا عِندَ اللَّهِ خَيْرٌ لِّلْأَبْرَارِ
मगर जिन लोगों ने अपने परवरदिगार की परहेज़गारी (इख्तेयार की उनके लिए बेहिश्त के) वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारीं हैं और वह हमेशा उसी में रहेंगे ये ख़ुदा की तरफ़ से उनकी (दावत है और जो साज़ो सामान) ख़ुदा के यहॉ है वह नेको कारों के वास्ते दुनिया से कहीं बेहतर है
199وَإِنَّ مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ لَمَن يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَمَا أُنزِلَ إِلَيْكُمْ وَمَا أُنزِلَ إِلَيْهِمْ خَاشِعِينَ لِلَّهِ لَا يَشْتَرُونَ بِآيَاتِ اللَّهِ ثَمَنًا قَلِيلًا ۗ أُولَٰئِكَ لَهُمْ أَجْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ ۗ إِنَّ اللَّهَ سَرِيعُ الْحِسَابِ
और अहले किताब में से कुछ लोग तो ऐसे ज़रूर हैं जो ख़ुदा पर और जो (किताब) तुम पर नाज़िल हुई और जो (किताब) उनपर नाज़िल हुई (सब पर) ईमान रखते हैं ख़ुदा के आगे सर झुकाए हुए हैं और ख़ुदा की आयतों के बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनियावी फ़ायदे) नहीं लेते ऐसे ही लोगों के वास्ते उनके परवरदिगार के यहॉ अच्छा बदला है बेशक ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब करने वाला है
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अनुवाद — आल-इमरान 197

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Tuesday, August 18, 2026

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