Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- كَفَرُوا: अल्लाह पर ईमान न लाना, उसकी वहदानियत (एकता) और उसके हुक्मों को न मानना।
- كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا: हमारी निशानियों (क़ुरआन और पैग़म्बरों के मो'जिज़ात) को झुठलाया।
- وَلِقَاءِ الْآخِرَةِ: आख़िरत (क़यामत के दिन) के मिलन को, यानी मौत के बाद दोबारा जी उठने और हिसाब-किताब को न मानना।
- مُحْضَرُونَ: हाज़िर किए जाने वाले, यानी उन्हें अज़ाब में मौजूद रखा जाएगा और वे उससे कभी अलग नहीं होंगे।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का हाल बयान कर रहा है जो दुनिया में कुफ्र (इनकार) पर जमे रहे और उन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया। उन्होंने न सिर्फ़ अल्लाह की वहदानियत को नकारा, बल्कि उसके पैग़म्बरों पर नाज़िल की गईं निशानियों को भी झुठलाया। सबसे बड़ी बात यह कि उन्होंने आख़िरत के मिलन को — यानी मौत के बाद जी उठने, हिसाब-किताब, जन्नत और जहन्नम को — नहीं माना। उनका यह इनकार महज़ एक राय नहीं था, बल्कि उन्होंने सच्चाई को जानते हुए भी उसे दबाया और झुठलाया।
ऐसे लोगों के लिए अल्लाह का फ़ैसला यह है कि वे अज़ाब में हाज़िर किए जाएंगे — यानी उन्हें जहन्नम के अज़ाब में डाल दिया जाएगा और वे उससे कभी बाहर नहीं निकलेंगे। वे उस अज़ाब से न भाग सकेंगे, न कोई सिफ़ारिशी उन्हें बचा सकेगा, और न ही उन्हें कोई राहत दी जाएगी। यह उनके उस कुफ्र और तकज़ीब (झुठलाने) का बदला है जो उन्होंने दुनिया में किया।
यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह ने हमें दुनिया में आज़माइश के लिए भेजा है, और हमारे पास रसूलों और किताबों के ज़रिए सच्चाई पहुँचा दी गई है। जो लोग इस सच्चाई को क़बूल कर लेते हैं और उस पर अमल करते हैं, उनके लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी है। और जो लोग अल्लाह की आयतों और आख़िरत के मिलन को झुठलाते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने ईमान की हिफ़ाज़त करें, अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करें, और क़यामत के दिन के लिए तैयारी करें। यह दुनिया फ़ानी है, और आख़िरत ही असली और हमेशा रहने वाला घर है। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में से बनाए जो उसके अज़ाब से महफ़ूज़ रहें। आमीन।
📜 आयत 14-18 — सूरा अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 16
सूरा अर-रूम आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर जिन लोगों के कुफ्र एख्तेयार किया और हमारी आयतों…सूरा आयत 16/60 — सूरा अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रूम सुनें, सूरा अर-रूम अनुवाद, सूरा अर-रूम mp3, सूरा अर-रूम pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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