अर-रूम · 16/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
وَأَمَّا الَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَلِقَاءِ الْآخِرَةِ فَأُولَٰئِكَ فِي الْعَذَابِ مُحْضَرُونَ ۝١٦
Wa ammal lazeena kafaroo wa kazzaboo bi-Aayaatinaa wa liqaaa`il Aakhirati faulaaa`ika fil`azaabi muhdaroon
📖 हिंदी अर्थ
मगर जिन लोगों के कुफ्र एख्तेयार किया और हमारी आयतों और आखेरत की हुज़ूरी को झुठलाया तो ये लोग अज़ाब में गिरफ्तार किए जाएँगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَفَرُوا: अल्लाह पर ईमान न लाना, उसकी वहदानियत (एकता) और उसके हुक्मों को न मानना।
  • كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا: हमारी निशानियों (क़ुरआन और पैग़म्बरों के मो'जिज़ात) को झुठलाया।
  • وَلِقَاءِ الْآخِرَةِ: आख़िरत (क़यामत के दिन) के मिलन को, यानी मौत के बाद दोबारा जी उठने और हिसाब-किताब को न मानना।
  • مُحْضَرُونَ: हाज़िर किए जाने वाले, यानी उन्हें अज़ाब में मौजूद रखा जाएगा और वे उससे कभी अलग नहीं होंगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का हाल बयान कर रहा है जो दुनिया में कुफ्र (इनकार) पर जमे रहे और उन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया। उन्होंने न सिर्फ़ अल्लाह की वहदानियत को नकारा, बल्कि उसके पैग़म्बरों पर नाज़िल की गईं निशानियों को भी झुठलाया। सबसे बड़ी बात यह कि उन्होंने आख़िरत के मिलन को — यानी मौत के बाद जी उठने, हिसाब-किताब, जन्नत और जहन्नम को — नहीं माना। उनका यह इनकार महज़ एक राय नहीं था, बल्कि उन्होंने सच्चाई को जानते हुए भी उसे दबाया और झुठलाया।

ऐसे लोगों के लिए अल्लाह का फ़ैसला यह है कि वे अज़ाब में हाज़िर किए जाएंगे — यानी उन्हें जहन्नम के अज़ाब में डाल दिया जाएगा और वे उससे कभी बाहर नहीं निकलेंगे। वे उस अज़ाब से न भाग सकेंगे, न कोई सिफ़ारिशी उन्हें बचा सकेगा, और न ही उन्हें कोई राहत दी जाएगी। यह उनके उस कुफ्र और तकज़ीब (झुठलाने) का बदला है जो उन्होंने दुनिया में किया।

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह ने हमें दुनिया में आज़माइश के लिए भेजा है, और हमारे पास रसूलों और किताबों के ज़रिए सच्चाई पहुँचा दी गई है। जो लोग इस सच्चाई को क़बूल कर लेते हैं और उस पर अमल करते हैं, उनके लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी है। और जो लोग अल्लाह की आयतों और आख़िरत के मिलन को झुठलाते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने ईमान की हिफ़ाज़त करें, अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करें, और क़यामत के दिन के लिए तैयारी करें। यह दुनिया फ़ानी है, और आख़िरत ही असली और हमेशा रहने वाला घर है। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में से बनाए जो उसके अज़ाब से महफ़ूज़ रहें। आमीन।



📜 आयत 14-18 — अर-रूम

14وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ يَوْمَئِذٍ يَتَفَرَّقُونَ
और जिस दिन क़यामत बरपा होगी उस दिन (मोमिनों से) कुफ्फ़ार जुदा हो जाएँगें
15فَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَهُمْ فِي رَوْضَةٍ يُحْبَرُونَ
फिर जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए तो वह बाग़े बेहश्त में निहाल कर दिए जाएँगे
16وَأَمَّا الَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَلِقَاءِ الْآخِرَةِ فَأُولَٰئِكَ فِي الْعَذَابِ مُحْضَرُونَ
मगर जिन लोगों के कुफ्र एख्तेयार किया और हमारी आयतों और आखेरत की हुज़ूरी को झुठलाया तो ये लोग अज़ाब में गिरफ्तार किए जाएँगे
17فَسُبْحَانَ اللَّهِ حِينَ تُمْسُونَ وَحِينَ تُصْبِحُونَ
फिर जिस वक्त तुम लोगों की शाम हो और जिस वक्त तुम्हारी सुबह हो ख़ुदा की पाकीज़गी ज़ाहिर करो
18وَلَهُ الْحَمْدُ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَعَشِيًّا وَحِينَ تُظْهِرُونَ
और सारे आसमान व ज़मीन में तीसरे पहर को और जिस वक्त तुम लोगों की दोपहर हो जाए वही क़ाबिले तारीफ़ है
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अनुवाद — अर-रूम 16

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Tuesday, August 18, 2026

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