अर-रूम · 15/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-रूम
فَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَهُمْ فِي رَوْضَةٍ يُحْبَرُونَ ۝١٥
Fa ammal lazeena aamanoo wa `amilus saalihaati fahum fee rawdatiny yuhbaroon
📖 हिंदी अर्थ
फिर जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए तो वह बाग़े बेहश्त में निहाल कर दिए जाएँगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَوْضَةٍ: बाग़, हरा-भरा बग़ीचा, जन्नत का बाग़।
  • يُحْبَرُونَ: उन्हें खुश किया जाएगा, वे आनंदित होंगे, उन्हें सम्मान और ख़ुशी दी जाएगी।

तफ़सीर (व्याख्या):

जिस दिन क़ियामत आएगी, उस दिन लोग दो समूहों में बंट जाएँगे—एक समूह ईमान वालों का होगा और दूसरा कुफ़्र वालों का। जहाँ कुफ़्र वालों का अंजाम अफ़सोस और आज़ाब होगा, वहीं जिन लोगों ने अल्लाह पर ईमान लाया और उसके रसूल की पैरवी की, और अपने ईमान के साथ अच्छे कर्म भी किए—यानी अल्लाह की रज़ा के लिए नेक काम किए, दूसरों के साथ भलाई की, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्म के मुताबिक़ ढाला—वे लोग जन्नत के हरे-भरे बाग़ों में होंगे, जहाँ उन्हें हर तरह की ख़ुशी और सम्मान मिलेगा। वे वहाँ ऐसी नेअमतों और ऐसी ख़ुशियों में होंगे जिनका कोई अंत नहीं, और जिनका वर्णन करना मुमकिन नहीं। उनकी आँखें ठंडी होंगी, उनके दिल खुश होंगे, और वे हमेशा हमेशा उस आनंद में रहेंगे।

दावती पहलू:

यह आयत मोमिनिन के लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है। अल्लाह तआला ने अपने नेक बंदों के लिए ऐसा इनाम तैयार किया है जो किसी आँख ने नहीं देखा, किसी कान ने नहीं सुना और किसी दिल ने नहीं सोचा। यह हमें बताती है कि दुनिया की मुश्किलें और परेशानियाँ चाहे कितनी भी हों, अगर हम ईमान और नेक अमल पर क़ायम रहें, तो अंजाम बेहद ख़ूबसूरत है। अल्लाह अपने बंदों से बहुत मुहब्बत करता है और उन्हें उस चीज़ का इनाम देगा जो उनकी तमन्नाओं से भी बढ़कर होगी। तो आओ, हम अपनी ज़िंदगी को ईमान और नेक अमल की रौशनी में ढालें, ताकि हम भी उस रौज़ा (बाग़) के हक़दार बनें जहाँ सिर्फ़ ख़ुशी और सुकून है।



📜 आयत 13-17 — सूरा अर-रूम

13وَلَمْ يَكُن لَّهُم مِّن شُرَكَائِهِمْ شُفَعَاءُ وَكَانُوا بِشُرَكَائِهِمْ كَافِرِينَ
और उनके (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीकों में से कोई उनका सिफारिशी न होगा और ये लोग ख़़ुद भी अपने शरीकों से इन्कार कर जाएँगे
14وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ يَوْمَئِذٍ يَتَفَرَّقُونَ
और जिस दिन क़यामत बरपा होगी उस दिन (मोमिनों से) कुफ्फ़ार जुदा हो जाएँगें
15فَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَهُمْ فِي رَوْضَةٍ يُحْبَرُونَ
फिर जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए तो वह बाग़े बेहश्त में निहाल कर दिए जाएँगे
16وَأَمَّا الَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَلِقَاءِ الْآخِرَةِ فَأُولَٰئِكَ فِي الْعَذَابِ مُحْضَرُونَ
मगर जिन लोगों के कुफ्र एख्तेयार किया और हमारी आयतों और आखेरत की हुज़ूरी को झुठलाया तो ये लोग अज़ाब में गिरफ्तार किए जाएँगे
17فَسُبْحَانَ اللَّهِ حِينَ تُمْسُونَ وَحِينَ تُصْبِحُونَ
फिर जिस वक्त तुम लोगों की शाम हो और जिस वक्त तुम्हारी सुबह हो ख़ुदा की पाकीज़गी ज़ाहिर करो
अर-रूमकुरान सूची
60आयत
मक्कीअवतरण स्थान
15आयत

अनुवाद — अर-रूम 15

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Friday, October 2, 2026

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