अर-रूम · 17/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-रूम
فَسُبْحَانَ اللَّهِ حِينَ تُمْسُونَ وَحِينَ تُصْبِحُونَ ۝١٧
Fa Subhaanal laahi heena tumsoona wa heena tusbihoon
📖 हिंदी अर्थ
फिर जिस वक्त तुम लोगों की शाम हो और जिस वक्त तुम्हारी सुबह हो ख़ुदा की पाकीज़गी ज़ाहिर करो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَسُبْحَانَ اللهِ: अल्लाह को हर कमी, दोष और बुराई से पाक-साफ़ बताओ, उसकी तारीफ़ और तस्बीह करो।
  • حِينَ تُمْسُونَ: जब तुम शाम को प्रवेश करो, यानी मग़रिब और इशा का समय।
  • حِينَ تُصْبِحُونَ: जब तुम सुबह को प्रवेश करो, यानी फ़ज्र का समय।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने ईमानवाले बंदों को निर्देश देते हुए फ़रमाता है कि जब तुम शाम को प्रवेश करो (मग़रिब और इशा का समय) और जब तुम सुबह को प्रवेश करो (फ़ज्र का समय), तो अल्लाह की तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करो। यानी उसे हर ऐब, कमी, शरीक (साझीदार), औलाद और हर उस चीज़ से पाक बताओ जो उसकी शान के लायक़ नहीं है। उसकी तारीफ़ करो और उसे क़ाबिल-ए-इबादत समझो।

यह आदेश सिर्फ़ ज़ुबान से तस्बीह कहने तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल और दिमाग़ से अल्लाह की बुज़ुर्गी को मानना और अपने पूरे जिस्म (शरीर) के ज़रिये उसकी इबादत करना भी शामिल है। शाम और सुबह के वक़्त में नमाज़ें अदा करना (मग़रिब, इशा और फ़ज्र) इसी तस्बीह का अहम हिस्सा है। यही वो वक़्त हैं जब इंसान दिन के कामों से फ़ारिग़ होकर और नई सुबह की शुरुआत में अपने रब की याद करता है।

अल्लाह की तारीफ़ और हम्द (प्रशंसा) आसमानों और ज़मीन में उसी के लिए है, और रात और दिन में भी उसी की तस्बीह है। यानी पूरी कायनात (सृष्टि) उसी की तारीफ़ कर रही है, और इंसान को चाहिए कि वह इसी क़ाफ़िले में शामिल होकर अपने रब की याद में लगा रहे।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी ज़िंदगी का हर लम्हा अल्लाह की याद से जुड़ा होना चाहिए। सुबह उठते ही अल्लाह की तस्बीह करें, शाम को सोते वक़्त भी उसका ज़िक्र करें। यह आदत हमारे दिलों को सुकून देती है, हमारे गुनाहों की माफ़ी का ज़रिया बनती है और हमें अल्लाह के क़रीब लाती है। जब हम अल्लाह की तारीफ़ करते हैं, तो हमारा दिल नूर से भर जाता है, हमारी मुश्किलें आसान होती हैं और हमें ज़िंदगी की हर परेशानी में सब्र और हिम्मत मिलती है। अल्लाह तआला हमें अपनी तस्बीह और इबादत की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 15-19 — सूरा अर-रूम

15فَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَهُمْ فِي رَوْضَةٍ يُحْبَرُونَ
फिर जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए तो वह बाग़े बेहश्त में निहाल कर दिए जाएँगे
16وَأَمَّا الَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَلِقَاءِ الْآخِرَةِ فَأُولَٰئِكَ فِي الْعَذَابِ مُحْضَرُونَ
मगर जिन लोगों के कुफ्र एख्तेयार किया और हमारी आयतों और आखेरत की हुज़ूरी को झुठलाया तो ये लोग अज़ाब में गिरफ्तार किए जाएँगे
17فَسُبْحَانَ اللَّهِ حِينَ تُمْسُونَ وَحِينَ تُصْبِحُونَ
फिर जिस वक्त तुम लोगों की शाम हो और जिस वक्त तुम्हारी सुबह हो ख़ुदा की पाकीज़गी ज़ाहिर करो
18وَلَهُ الْحَمْدُ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَعَشِيًّا وَحِينَ تُظْهِرُونَ
और सारे आसमान व ज़मीन में तीसरे पहर को और जिस वक्त तुम लोगों की दोपहर हो जाए वही क़ाबिले तारीफ़ है
19يُخْرِجُ الْحَيَّ مِنَ الْمَيِّتِ وَيُخْرِجُ الْمَيِّتَ مِنَ الْحَيِّ وَيُحْيِي الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ وَكَذَٰلِكَ تُخْرَجُونَ
वही ज़िन्दा को मुर्दे से निकालता है और वही मुर्दे को जिन्दा से पैदा करता है और ज़मीन को मरने (परती होने) के बाद ज़िन्दा (आबाद) करता है और इसी तरह तुम लोग भी (मरने के बाद निकाले जाओगे)
अर-रूमकुरान सूची
60आयत
मक्कीअवतरण स्थान
17आयत

अनुवाद — अर-रूम 17

सूरा अर-रूम आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जिस वक्त तुम लोगों की शाम हो और जिस…

सूरा आयत 17/60 — सूरा अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रूम सुनें, सूरा अर-रूम अनुवाद, सूरा अर-रूम mp3, सूरा अर-रूम pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Friday, October 2, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए