Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ضَرَبَ لَكُم مَّثَلًا – अल्लाह ने तुम्हारे लिए एक मिसाल बयान की।
- مِنْ أَنفُسِكُمْ – तुम्हारी अपनी ही ज़िंदगी से।
- مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُكُم – तुम्हारे ग़ुलाम और लौंडियाँ (जो तुम्हारी मिल्कियत में हों)।
- شُرَكَاء – हिस्सेदार।
- تَخَافُونَهُمْ – तुम उनसे डरते हो।
- كَخِيفَتِكُمْ أَنفُسَكُمْ – जिस तरह तुम अपने बराबर के आज़ाद शरीकों से डरते हो।
- نُفَصِّلُ الْآيَاتِ – हम निशानियाँ खोलकर बयान करते हैं।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में मुशरिकों को एक ऐसी मिसाल दे रहा है जो उनकी अपनी ज़िंदगी से ली गई है, ताकि वे अपनी ग़लतफ़हमी को ख़ुद महसूस कर सकें। अल्लाह फ़रमाता है: “ऐ मुशरिको! ज़रा अपने ग़ुलामों और लौंडियों को देखो — क्या तुम में से कोई यह पसंद करेगा कि उसका ग़ुलाम उसकी जायदाद में उसका हिस्सेदार बन जाए, और दोनों बराबर हों? क्या तुम अपने ग़ुलामों से उस तरह डरोगे जिस तरह अपने बराबर के आज़ाद शरीकों से डरते हो कि कहीं वे तुम्हारी जायदाद पर क़ब्ज़ा न कर लें?”
यक़ीनन कोई भी अक़्लमंद इंसान अपने ग़ुलाम को अपनी जायदाद में बराबर का हिस्सेदार बनाना पसंद नहीं करेगा। फिर जब तुम अपने ग़ुलाम को अपने बराबर का शरीक बनाना गवारा नहीं करते, तो अल्लाह के बारे में यह कैसे गवारा करते हो कि उसकी मख़लूक़ात में से कोई उसका शरीक हो? अल्लाह तो मालिक है, और सारी मख़लूक़ात उसकी ग़ुलाम हैं। उसकी मिल्कियत में कोई शरीक हो, यह उसकी शान के ख़िलाफ़ है।
अल्लाह तआला इस मिसाल के ज़रिए यह सिखाना चाहता है कि जिस तरह तुम अपने ग़ुलामों को अपने बराबर का दर्जा नहीं देते, उसी तरह अल्लाह की शान के लिए यह कतई मुनासिब नहीं कि उसकी मख़लूक़ात में से कोई उसका शरीक हो। यह एक ऐसी साफ़ और आसान मिसाल है जो हर इंसान की फ़ितरत में बसी हुई है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: “इसी तरह हम अपनी आयतों को खोलकर बयान करते हैं उन लोगों के लिए जो अक़्ल से काम लेते हैं।” यानी हम अपनी निशानियों को कई अंदाज़ में, कई मिसालों के साथ पेश करते हैं, ताकि जिन लोगों के दिलों में समझने की सलाहियत है, वे इनसे सबक़ हासिल करें और सीधे रास्ते पर आ जाएँ।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की मिल्कियत में शरीक ठहराना कितनी बड़ी नादानी है। जब हम ख़ुद अपने ग़ुलाम को अपने बराबर का दर्जा नहीं देते, तो हमें चाहिए कि हम अल्लाह के साथ किसी को शरीक न ठहराएँ। यह आयत हमारे दिलों में तौहीद की मुहब्बत पैदा करती है और हमें यह एहसास दिलाती है कि अल्लाह ही सब कुछ का मालिक है, और उसकी इबादत ही सच्ची इबादत है। जो लोग अक़्ल से काम लेते हैं, वे इन निशानियों से हिदायत पाते हैं और अपने रब की तरफ़ लौट आते हैं।
📜 आयत 26-30 — सूरा अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 28
सूरा अर-रूम आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने (तुम्हारे समझाने के वास्ते) तुम्हारी ही एक मिसाल…सूरा आयत 28/60 — सूरा अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रूम सुनें, सूरा अर-रूम अनुवाद, सूरा अर-रूम mp3, सूरा अर-रूम pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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