Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الساعة (अस-साआ): क़ियामत का दिन।
- الْغَيْث (अल-ग़ैस): वर्षा।
- الْأَرْحَام (अल-अरहाम): माताओं के गर्भ।
- تَدْرِي (तद्री): जानती है, अवगत होती है।
- عَلِيمٌ خَبِيرٌ (अलीमुन ख़बीर): सब कुछ जानने वाला, हर बात की सूक्ष्म जानकारी रखने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हमें उन पाँच ग़ैबी (अदृश्य) बातों की ओर संकेत कराती है जिनका ज्ञान केवल अल्लाह तआला के पास है, और यह उसकी बेपनाह क़ुदरत और इल्म की निशानी है। अल्लाह ही जानता है कि क़ियामत कब आएगी—वह घड़ी जब पूरी कायनात तबाह होकर नए सिरे से बनाई जाएगी। यह ज्ञान किसी फ़रिश्ते, नबी या किसी और को नहीं दिया गया। वही बादलों से वर्षा उतारता है, और यह उसकी रहमत है जो वह जब चाहता है और जहाँ चाहता है बरसाता है—किसी को सूखे से बचाता है, किसी को सैलाब से आज़माता है। वही जानता है कि माँ के गर्भ में क्या है—लड़का या लड़की, सुंदर या कुरूप, सुखी या दुखी। यह सब उसके इल्म में पहले से लिखा हुआ है।
फिर अल्लाह तआला हमें हमारी अपनी कमज़ोरी का एहसास कराता है: कोई भी व्यक्ति यह नहीं जानता कि वह कल क्या कमाएगा—अच्छा या बुरा, फ़ायदा या नुक़सान। और न ही किसी को मालूम है कि उसकी मौत किस ज़मीन पर होगी—समुद्र में, पहाड़ पर, शहर में या जंगल में। ये सारी बातें अल्लाह के सिवा किसी को मालूम नहीं। यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने भविष्य के बारे में घमंड न करें, न ही अपनी योजनाओं पर इतराएँ, बल्कि हर काम में अल्लाह पर भरोसा रखें और उससे दुआ करें। अल्लाह 'अलीम' है यानी हर चीज़ को जानता है, और 'ख़बीर' है यानी उसे हर बात की बारीकी और सूक्ष्मता का पूरा इल्म है—चाहे वह ज़ाहिर हो या छिपी।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें उन चीज़ों में उलझना नहीं चाहिए जो हमारे इख़्तियार में नहीं, बल्कि अपने कर्मों को सुधारना चाहिए, क्योंकि हमारा भविष्य अल्लाह के हाथ में है। जो व्यक्ति इस हक़ीक़त को समझ लेता है, वह अल्लाह की इबादत में लीन हो जाता है, उसकी रहमत का आशिक़ बन जाता है, और उसके फ़ैसलों पर राज़ी रहता है। यही सच्ची मुसलमानी है—अपने आप को अल्लाह के सुपुर्द कर देना और यह यक़ीन रखना कि जो कुछ वह करता है, हमारे लिए बेहतरीन होता है।
📜 आयत 32-34 — सूरा लुकमान
अनुवाद — लुकमान 34
सूरा लुकमान आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक ख़ुदा ही के पास क़यामत (के आने) का इल्म…सूरा आयत 34/34 — सूरा लुकमान لقمان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा लुकमान सुनें, सूरा लुकमान अनुवाद, सूरा लुकमान mp3, सूरा लुकमान pdf. आयत 32–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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