लुकमान · 34/34
अनुवाद उच्चारण — सूरा लुकमान
إِنَّ اللَّهَ عِندَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَيُنَزِّلُ الْغَيْثَ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْأَرْحَامِ ۖ وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ مَّاذَا تَكْسِبُ غَدًا ۖ وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ بِأَيِّ أَرْضٍ تَمُوتُ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ خَبِيرٌ ۝٣٤
Innal laaha `indahoo `ilmus saa`ati wa yunazzilul ghaisa wa ya`lamu maa fil arhaami wa maa tadree nafsum maazaa takisbu ghadaa; wa maa tadree nafsum bi ayyi ardin tamoot; innal laaha `Aleemun Khabeer
📖 हिंदी अर्थ
बेशक ख़ुदा ही के पास क़यामत (के आने) का इल्म है और वही (जब मौक़ा मुनासिब देखता है) पानी बरसाता है और जो कुछ औरतों के पेट में (नर मादा) है जानता है और कोई शख्स (इतना भी तो) नहीं जानता कि वह ख़़ुद कल क्या करेगा और कोई शख्स ये (भी) नहीं जानता है कि वह किस सर ज़मीन पर मरे (गड़े) गा बेशक ख़ुदा (सब बातों से) आगाह ख़बरदार है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الساعة (अस-साआ): क़ियामत का दिन।
  • الْغَيْث (अल-ग़ैस): वर्षा।
  • الْأَرْحَام (अल-अरहाम): माताओं के गर्भ।
  • تَدْرِي (तद्री): जानती है, अवगत होती है।
  • عَلِيمٌ خَبِيرٌ (अलीमुन ख़बीर): सब कुछ जानने वाला, हर बात की सूक्ष्म जानकारी रखने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें उन पाँच ग़ैबी (अदृश्य) बातों की ओर संकेत कराती है जिनका ज्ञान केवल अल्लाह तआला के पास है, और यह उसकी बेपनाह क़ुदरत और इल्म की निशानी है। अल्लाह ही जानता है कि क़ियामत कब आएगी—वह घड़ी जब पूरी कायनात तबाह होकर नए सिरे से बनाई जाएगी। यह ज्ञान किसी फ़रिश्ते, नबी या किसी और को नहीं दिया गया। वही बादलों से वर्षा उतारता है, और यह उसकी रहमत है जो वह जब चाहता है और जहाँ चाहता है बरसाता है—किसी को सूखे से बचाता है, किसी को सैलाब से आज़माता है। वही जानता है कि माँ के गर्भ में क्या है—लड़का या लड़की, सुंदर या कुरूप, सुखी या दुखी। यह सब उसके इल्म में पहले से लिखा हुआ है।

फिर अल्लाह तआला हमें हमारी अपनी कमज़ोरी का एहसास कराता है: कोई भी व्यक्ति यह नहीं जानता कि वह कल क्या कमाएगा—अच्छा या बुरा, फ़ायदा या नुक़सान। और न ही किसी को मालूम है कि उसकी मौत किस ज़मीन पर होगी—समुद्र में, पहाड़ पर, शहर में या जंगल में। ये सारी बातें अल्लाह के सिवा किसी को मालूम नहीं। यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने भविष्य के बारे में घमंड न करें, न ही अपनी योजनाओं पर इतराएँ, बल्कि हर काम में अल्लाह पर भरोसा रखें और उससे दुआ करें। अल्लाह 'अलीम' है यानी हर चीज़ को जानता है, और 'ख़बीर' है यानी उसे हर बात की बारीकी और सूक्ष्मता का पूरा इल्म है—चाहे वह ज़ाहिर हो या छिपी।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें उन चीज़ों में उलझना नहीं चाहिए जो हमारे इख़्तियार में नहीं, बल्कि अपने कर्मों को सुधारना चाहिए, क्योंकि हमारा भविष्य अल्लाह के हाथ में है। जो व्यक्ति इस हक़ीक़त को समझ लेता है, वह अल्लाह की इबादत में लीन हो जाता है, उसकी रहमत का आशिक़ बन जाता है, और उसके फ़ैसलों पर राज़ी रहता है। यही सच्ची मुसलमानी है—अपने आप को अल्लाह के सुपुर्द कर देना और यह यक़ीन रखना कि जो कुछ वह करता है, हमारे लिए बेहतरीन होता है।



📜 आयत 32-34 — सूरा लुकमान

32وَإِذَا غَشِيَهُم مَّوْجٌ كَالظُّلَلِ دَعَوُا اللَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ فَلَمَّا نَجَّاهُمْ إِلَى الْبَرِّ فَمِنْهُم مُّقْتَصِدٌ ۚ وَمَا يَجْحَدُ بِآيَاتِنَا إِلَّا كُلُّ خَتَّارٍ كَفُورٍ
और जब उन्हें मौज (ऊँची होकर) साएबानों की तरह (ऊपर से) ढॉक लेती है तो निरा खुरा उसी का अक़ीदा रखकर ख़ुदा को पुकारने लगते हैं फिर जब ख़ुदा उनको नजात देकर खुश्की तक पहुँचा देता है तो उनमें से बाज़ तो कुछ देर एतदाल पर रहते हैं (और बाज़ पक्के काफिर) और हमारी (क़ुदरत की) निशानियों से इन्कार तो बस बदएहद और नाशुक्रे ही लोग करते हैं
33يَا أَيُّهَا النَّاسُ اتَّقُوا رَبَّكُمْ وَاخْشَوْا يَوْمًا لَّا يَجْزِي وَالِدٌ عَن وَلَدِهِ وَلَا مَوْلُودٌ هُوَ جَازٍ عَن وَالِدِهِ شَيْئًا ۚ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ ۖ فَلَا تَغُرَّنَّكُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا وَلَا يَغُرَّنَّكُم بِاللَّهِ الْغَرُورُ
लोगों अपने परवरदिगार से डरो और उस दिन का ख़ौफ रखो जब न कोई बाप अपने बेटे के काम आएगा और न कोई बेटा अपने बाप के कुछ काम आ सकेगा ख़ुदा का (क़यामत का) वायदा बिल्कुल पक्का है तो (कहीं) तुम लोगों को दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी धोखे में न डाले और न कहीं तुम्हें फरेब देने वाला (शैतान) कुछ फ़रेब दे
34إِنَّ اللَّهَ عِندَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَيُنَزِّلُ الْغَيْثَ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْأَرْحَامِ ۖ وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ مَّاذَا تَكْسِبُ غَدًا ۖ وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ بِأَيِّ أَرْضٍ تَمُوتُ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ خَبِيرٌ
बेशक ख़ुदा ही के पास क़यामत (के आने) का इल्म है और वही (जब मौक़ा मुनासिब देखता है) पानी बरसाता है और जो कुछ औरतों के पेट में (नर मादा) है जानता है और कोई शख्स (इतना भी तो) नहीं जानता कि वह ख़़ुद कल क्या करेगा और कोई शख्स ये (भी) नहीं जानता है कि वह किस सर ज़मीन पर मरे (गड़े) गा बेशक ख़ुदा (सब बातों से) आगाह ख़बरदार है
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अनुवाद — लुकमान 34

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Thursday, October 1, 2026

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