लुकमान · 6/34
अनुवाद उच्चारण — सूरा लुकमान
وَمِنَ النَّاسِ مَن يَشْتَرِي لَهْوَ الْحَدِيثِ لِيُضِلَّ عَن سَبِيلِ اللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَيَتَّخِذَهَا هُزُوًا ۚ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مُّهِينٌ ۝٦
Wa minan naasi mai-yashtaree lahuwal hadeesi li yudilla `an sabeelil laahi bighairi `ilminw wa yattakhizahaa huzuwaa; ulaaa`ika lahum `azaabum muheen
📖 हिंदी अर्थ
और लोगों में बाज़ (नज़र बिन हारिस) ऐसा है जो बेहूदा क़िस्से (कहानियाँ) ख़रीदता है ताकि बग़ैर समझे बूझे (लोगों को) ख़ुदा की (सीधी) राह से भड़का दे और आयातें ख़ुदा से मसख़रापन करे ऐसे ही लोगों के लिए बड़ा रुसवा करने वाला अज़ाब है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَهْوَ الْحَدِيثِ (लहवुल हदीस): वह बातें और काम जो इंसान को अल्लाह की याद और उसकी इबादत से ग़ाफ़िल कर दें, बेकार और बेहूदा कहानियाँ, गाने-बाजे, और ऐसी चीज़ें जो इंसान को सच्चाई से भटका दें।
  • لِيُضِلَّ (लियुदिल्ल): ताकि वह लोगों को गुमराह करे।
  • سَبِيلِ اللَّهِ (सबीलिल्लाह): अल्लाह का रास्ता, यानी इस्लाम और सच्चा धर्म।
  • هُزُوًا (हुज़ुवन): मज़ाक़ और ठट्ठा उड़ाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का हाल बयान कर रहा है जो सच्चाई को दबाने और लोगों को रास्ते से भटकाने के लिए बेहूदा और मनोरंजक बातों को खरीदते हैं। यानी वे अपने पैसे, वक़्त और मेहनत को ऐसी चीज़ों में लगाते हैं जो इंसान को अल्लाह की याद से दूर करें और उसे सच्चे धर्म से विमुख कर दें। यह काम वे बिना किसी ज्ञान और सच्चाई के आधार पर करते हैं, सिर्फ़ लोगों को गुमराह करने के लिए। वे अल्लाह की आयतों और उसके रास्ते का मज़ाक़ उड़ाते हैं, उन्हें तुच्छ समझते हैं और उनका ठट्ठा करते हैं।

यह आयत उस समय के एक विशेष व्यक्ति (नज़्र बिन हारिस) के बारे में उतरी, जो लोगों को कहानियाँ सुनाकर और उन्हें मनोरंजन में लगाकर क़ुरआन की आयतों से विचलित करता था। वह कहता था कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तुम्हें आद और समूद की कहानियाँ सुनाते हैं, और मैं तुम्हें रुस्तम और फ़ारस के बादशाहों की कहानियाँ सुनाता हूँ। लोग उसकी बातों में मशग़ूल हो जाते और क़ुरआन सुनना छोड़ देते।

ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने बड़ी अपमानजनक और दर्दनाक यातना का वादा किया है, क्योंकि उन्होंने सच्चाई को ठुकराया और उसका मज़ाक़ उड़ाया। यह यातना उन्हें उनके इसी किए की सज़ा के रूप में दी जाएगी।

दावत और नसीहत:

यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपने वक़्त, धन और ऊर्जा को उन चीज़ों में लगाना चाहिए जो उसे अल्लाह के करीब लाएँ, न कि उन चीज़ों में जो उसे दूर करें। आज के दौर में भी बहुत से लोग ऐसे हैं जो बेहूदा मनोरंजन, गाने-बाजे, और झूठी कहानियों में अपना जीवन बर्बाद कर देते हैं और अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल हो जाते हैं। हमें चाहिए कि हम क़ुरआन और सुन्नत को अपना साथी बनाएँ, क्योंकि यही सच्ची राहनुमाई है। अल्लाह की आयतों का मज़ाक़ उड़ाने वालों का अंजाम बहुत बुरा है, और जो लोग उन्हें सुनकर अमल करते हैं, उनके लिए जन्नत और खुशियाँ हैं। आइए, हम उन लोगों में से न बनें जो सच्चाई को सुनकर भी उससे मुँह मोड़ लेते हैं, बल्कि हम उन लोगों में से बनें जो अल्लाह के रास्ते पर चलते हैं और दूसरों को भी इसी रास्ते की दावत देते हैं।



📜 आयत 4-8 — सूरा लुकमान

4الَّذِينَ يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَيُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَهُم بِالْآخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ
जो पाबन्दी से नमाज़ अदा करते हैं और ज़कात देते हैं और वही लोग आख़िरत का भी यक़ीन रखते हैं
5أُولَٰئِكَ عَلَىٰ هُدًى مِّن رَّبِّهِمْ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
यही लोग अपने परवरदिगार की हिदायत पर आमिल हैं और यही लोग (क़यामत में) अपनी दिली मुरादें पाएँगे
6وَمِنَ النَّاسِ مَن يَشْتَرِي لَهْوَ الْحَدِيثِ لِيُضِلَّ عَن سَبِيلِ اللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَيَتَّخِذَهَا هُزُوًا ۚ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مُّهِينٌ
और लोगों में बाज़ (नज़र बिन हारिस) ऐसा है जो बेहूदा क़िस्से (कहानियाँ) ख़रीदता है ताकि बग़ैर समझे बूझे (लोगों को) ख़ुदा की (सीधी) राह से भड़का दे और आयातें ख़ुदा से मसख़रापन करे ऐसे ही लोगों के लिए बड़ा रुसवा करने वाला अज़ाब है
7وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِ آيَاتُنَا وَلَّىٰ مُسْتَكْبِرًا كَأَن لَّمْ يَسْمَعْهَا كَأَنَّ فِي أُذُنَيْهِ وَقْرًا ۖ فَبَشِّرْهُ بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
और जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं तो शेख़ी के मारे मुँह फेरकर (इस तरह) चल देता है गोया उसने इन आयतों को सुना ही नहीं जैसे उसके दोनो कानों में ठेठी है तो (ऐ रसूल) तुम उसको दर्दनाक अज़ाब की (अभी से) खुशख़बरी दे दे
8إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ جَنَّاتُ النَّعِيمِ
बेशक जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे काम किए उनके लिए नेअमत के (हरे भरे बेहश्ती) बाग़ हैं कि यो उनमें हमेशा रहेंगे
लुकमानकुरान सूची
34आयत
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6आयत

अनुवाद — लुकमान 6

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Friday, October 2, 2026

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