Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَهْوَ الْحَدِيثِ (लहवुल हदीस): वह बातें और काम जो इंसान को अल्लाह की याद और उसकी इबादत से ग़ाफ़िल कर दें, बेकार और बेहूदा कहानियाँ, गाने-बाजे, और ऐसी चीज़ें जो इंसान को सच्चाई से भटका दें।
- لِيُضِلَّ (लियुदिल्ल): ताकि वह लोगों को गुमराह करे।
- سَبِيلِ اللَّهِ (सबीलिल्लाह): अल्लाह का रास्ता, यानी इस्लाम और सच्चा धर्म।
- هُزُوًا (हुज़ुवन): मज़ाक़ और ठट्ठा उड़ाना।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का हाल बयान कर रहा है जो सच्चाई को दबाने और लोगों को रास्ते से भटकाने के लिए बेहूदा और मनोरंजक बातों को खरीदते हैं। यानी वे अपने पैसे, वक़्त और मेहनत को ऐसी चीज़ों में लगाते हैं जो इंसान को अल्लाह की याद से दूर करें और उसे सच्चे धर्म से विमुख कर दें। यह काम वे बिना किसी ज्ञान और सच्चाई के आधार पर करते हैं, सिर्फ़ लोगों को गुमराह करने के लिए। वे अल्लाह की आयतों और उसके रास्ते का मज़ाक़ उड़ाते हैं, उन्हें तुच्छ समझते हैं और उनका ठट्ठा करते हैं।
यह आयत उस समय के एक विशेष व्यक्ति (नज़्र बिन हारिस) के बारे में उतरी, जो लोगों को कहानियाँ सुनाकर और उन्हें मनोरंजन में लगाकर क़ुरआन की आयतों से विचलित करता था। वह कहता था कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तुम्हें आद और समूद की कहानियाँ सुनाते हैं, और मैं तुम्हें रुस्तम और फ़ारस के बादशाहों की कहानियाँ सुनाता हूँ। लोग उसकी बातों में मशग़ूल हो जाते और क़ुरआन सुनना छोड़ देते।
ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने बड़ी अपमानजनक और दर्दनाक यातना का वादा किया है, क्योंकि उन्होंने सच्चाई को ठुकराया और उसका मज़ाक़ उड़ाया। यह यातना उन्हें उनके इसी किए की सज़ा के रूप में दी जाएगी।
दावत और नसीहत:
यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपने वक़्त, धन और ऊर्जा को उन चीज़ों में लगाना चाहिए जो उसे अल्लाह के करीब लाएँ, न कि उन चीज़ों में जो उसे दूर करें। आज के दौर में भी बहुत से लोग ऐसे हैं जो बेहूदा मनोरंजन, गाने-बाजे, और झूठी कहानियों में अपना जीवन बर्बाद कर देते हैं और अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल हो जाते हैं। हमें चाहिए कि हम क़ुरआन और सुन्नत को अपना साथी बनाएँ, क्योंकि यही सच्ची राहनुमाई है। अल्लाह की आयतों का मज़ाक़ उड़ाने वालों का अंजाम बहुत बुरा है, और जो लोग उन्हें सुनकर अमल करते हैं, उनके लिए जन्नत और खुशियाँ हैं। आइए, हम उन लोगों में से न बनें जो सच्चाई को सुनकर भी उससे मुँह मोड़ लेते हैं, बल्कि हम उन लोगों में से बनें जो अल्लाह के रास्ते पर चलते हैं और दूसरों को भी इसी रास्ते की दावत देते हैं।
📜 आयत 4-8 — सूरा लुकमान
अनुवाद — लुकमान 6
सूरा लुकमान आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और लोगों में बाज़ (नज़र बिन हारिस) ऐसा है जो…सूरा आयत 6/34 — सूरा लुकमान لقمان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा लुकमान सुनें, सूरा लुकमान अनुवाद, सूरा लुकमान mp3, सूरा लुकमान pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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