लुकमान · 5/34
अनुवाद उच्चारण — लुकमान
أُولَٰئِكَ عَلَىٰ هُدًى مِّن رَّبِّهِمْ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ ۝٥
Ulaaa`ika `alaa hudam mir Rabbihim wa ulaaa`ika humul muflihoon
📖 हिंदी अर्थ
यही लोग अपने परवरदिगार की हिदायत पर आमिल हैं और यही लोग (क़यामत में) अपनी दिली मुरादें पाएँगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • هُدًى: मार्गदर्शन, सत्य का ज्ञान, वह प्रकाश जो मनुष्य को सही रास्ता दिखाए।
  • رَبِّهِمْ: उनके पालनहार (अल्लाह) की ओर से।
  • الْمُفْلِحُونَ: सफलता पाने वाले, कामयाब लोग, जिन्होंने अपना लक्ष्य प्राप्त कर लिया और हर भय से सुरक्षित हो गए।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों की विशेषता बयान कर रही है जिनका ज़िक्र पिछली आयात में किया गया—जो नमाज़ क़ायम करते हैं, ज़कात देते हैं और आख़िरत पर यक़ीन रखते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यही लोग अपने रब की ओर से स्पष्ट मार्गदर्शन (हिदायत) पर हैं। यह हिदायत कोई अंधी परंपरा या मनगढ़ंत बात नहीं, बल्कि अल्लाह की ओर से उतारा गया नूर और सच्चाई है जो उनके दिलों को रोशन करती है और उनके कदमों को सीधे रास्ते पर जमा देती है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और यही लोग सच्चे कामयाब (मुफ़्लिह) हैं।" यानी दुनिया और आख़िरत दोनों में उन्हें सफलता मिलेगी। दुनिया में उन्हें इत्मिनान, सुकून और अल्लाह की मदद हासिल होगी, और आख़िरत में उन्हें जन्नत मिलेगी—जो हर मुश्किल से निजात और हर ख्वाहिश की तकमील है। वे उस चीज़ को पा लेंगे जो वे चाहते हैं और उस चीज़ से बच जाएँगे जिससे वे डरते हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि सच्ची कामयाबी सिर्फ़ अल्लाह की हिदायत पर चलने में है। जो लोग नमाज़, ज़कात और आख़िरत के यक़ीन को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाते हैं, अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। वह उन्हें अपने रब की तरफ़ से रोशनी देता है जो उनके हर कदम को सही दिशा दिखाती है। यह वादा अल्लाह का है—और अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह इन आयात में बताई गई सिफ़ात (गुणों) को अपनाए, ताकि वह भी उन कामयाब लोगों में शामिल हो जाए जिनका ज़िक्र अल्लाह ने अपनी किताब में किया है। यही वह रास्ता है जो दुनिया की परेशानियों से निजात और आख़िरत की सदा की खुशियों तक पहुँचाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 3-7 — लुकमान

3هُدًى وَرَحْمَةً لِّلْمُحْسِنِينَ
जो (अज़सरतापा) उन लोगों के लिए हिदायत व रहमत है
4الَّذِينَ يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَيُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَهُم بِالْآخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ
जो पाबन्दी से नमाज़ अदा करते हैं और ज़कात देते हैं और वही लोग आख़िरत का भी यक़ीन रखते हैं
5أُولَٰئِكَ عَلَىٰ هُدًى مِّن رَّبِّهِمْ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
यही लोग अपने परवरदिगार की हिदायत पर आमिल हैं और यही लोग (क़यामत में) अपनी दिली मुरादें पाएँगे
6وَمِنَ النَّاسِ مَن يَشْتَرِي لَهْوَ الْحَدِيثِ لِيُضِلَّ عَن سَبِيلِ اللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَيَتَّخِذَهَا هُزُوًا ۚ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مُّهِينٌ
और लोगों में बाज़ (नज़र बिन हारिस) ऐसा है जो बेहूदा क़िस्से (कहानियाँ) ख़रीदता है ताकि बग़ैर समझे बूझे (लोगों को) ख़ुदा की (सीधी) राह से भड़का दे और आयातें ख़ुदा से मसख़रापन करे ऐसे ही लोगों के लिए बड़ा रुसवा करने वाला अज़ाब है
7وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِ آيَاتُنَا وَلَّىٰ مُسْتَكْبِرًا كَأَن لَّمْ يَسْمَعْهَا كَأَنَّ فِي أُذُنَيْهِ وَقْرًا ۖ فَبَشِّرْهُ بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
और जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं तो शेख़ी के मारे मुँह फेरकर (इस तरह) चल देता है गोया उसने इन आयतों को सुना ही नहीं जैसे उसके दोनो कानों में ठेठी है तो (ऐ रसूल) तुम उसको दर्दनाक अज़ाब की (अभी से) खुशख़बरी दे दे
लुकमानकुरान सूची
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अनुवाद — लुकमान 5

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Tuesday, August 18, 2026

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