अल-अहज़ाब · 47/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
وَبَشِّرِ الْمُؤْمِنِينَ بِأَنَّ لَهُم مِّنَ اللَّهِ فَضْلًا كَبِيرًا ۝٤٧
Wa bashshiril mu`mineena bi annna lahum minal laahi fadlan kabeera
📖 हिंदी अर्थ
और तुम मोमिनीन को खुशख़बरी दे दो कि उनके लिए खुदा की तरफ से बहुत बड़ी (मेहरबानी और) बख्शिश है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَشِّرْ – खुशखबरी दो, शुभ सूचना दो।
  • الْمُؤْمِنِينَ – ईमानवालों को, जो अल्लाह और उसके रसूल पर सच्चे दिल से ईमान रखते हैं।
  • فَضْلًا كَبِيرًا – बहुत बड़ा अनुग्रह, विशाल उपकार, अत्यधिक दया और इनाम।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उन सच्चे ईमानवालों को, जो अल्लाह और उसके रसूल पर दिल से ईमान रखते हैं और उसके आदेशों पर अमल करते हैं, खुशखबरी सुना दें कि उनके लिए अल्लाह की ओर से बहुत बड़ा अनुग्रह और विशाल इनाम तैयार है। यह फ़ज़्ल (अनुग्रह) केवल दुनिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दुनिया में अल्लाह की मदद, नुसरत और कामयाबी भी शामिल है, और आख़िरत में जन्नत के बाग़, अल्लाह की रज़ा और उसकी रहमत का दीदार भी शामिल है। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी टूटता नहीं। यह उसका महान उपकार है जो वह अपने ईमानवाले बंदों को देता है, जो उनके अमल का बदला नहीं, बल्कि उसकी अपनी दया और कृपा है।

यह खुशखबरी ईमानवालों के दिलों को सुकून और खुशी देती है, उनके क़दमों को मज़बूत करती है और उन्हें अल्लाह की राह में और ज़्यादा सब्र और इस्तिक़ामत (स्थिरता) पर प्रोत्साहित करती है। जब एक मुसलमान को यह यक़ीन हो जाए कि उसकी मेहनत और ईमान बेकार नहीं जाएगा, बल्कि अल्लाह के पास उसके लिए बड़ा इनाम है, तो उसका दिल अल्लाह की मुहब्बत से भर जाता है और वह अपने रब की इबादत में और भी रूचि लेता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि ईमानवालों को एक-दूसरे को खुशखबरी देनी चाहिए, अच्छी बातों से एक-दूसरे का हौसला बढ़ाना चाहिए, और अल्लाह की रहमत और उसके इनाम की उम्मीद हमेशा दिल में रखनी चाहिए। अल्लाह अपने बंदों पर बहुत दयालु है, और वह चाहता है कि उसके बंदे उसकी रहमत से निराश न हों। यही ईमान की असली खुशखबरी है — कि अल्लाह के पास उसके ईमानवाले बंदों के लिए वह कुछ है जो आँखों ने देखा नहीं, कानों ने सुना नहीं, और किसी इंसान के दिल ने सोचा भी नहीं।

तो ऐ ईमानवालों! इस खुशखबरी को ग़नीमत समझो, अल्लाह की राह पर साबित क़दम रहो, और उसके वादे पर पूरा भरोसा रखो। अल्लाह की रहमत और उसका फ़ज़्ल उन लोगों के लिए है जो उस पर ईमान लाते हैं और उसकी इबादत में जुटे रहते हैं। यही कामयाबी है, और यही सच्ची खुशी है।



📜 आयत 45-49 — अल-अहज़ाब

45يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ إِنَّا أَرْسَلْنَاكَ شَاهِدًا وَمُبَشِّرًا وَنَذِيرًا
ऐ नबी हमने तुमको (लोगों का) गवाह और (नेकों को बेहश्त की) खुशख़बरी देने वाला और बदों को अज़ाब से डराने वाला
46وَدَاعِيًا إِلَى اللَّهِ بِإِذْنِهِ وَسِرَاجًا مُّنِيرًا
और खुदा की तरफ उसी के हुक्म से बुलाने वाला और (ईमान व हिदायत का) रौशन चिराग़ बनाकर भेजा
47وَبَشِّرِ الْمُؤْمِنِينَ بِأَنَّ لَهُم مِّنَ اللَّهِ فَضْلًا كَبِيرًا
और तुम मोमिनीन को खुशख़बरी दे दो कि उनके लिए खुदा की तरफ से बहुत बड़ी (मेहरबानी और) बख्शिश है
48وَلَا تُطِعِ الْكَافِرِينَ وَالْمُنَافِقِينَ وَدَعْ أَذَاهُمْ وَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ وَكِيلًا
और (ऐ रसूल) तुम (कहीं) काफिरों और मुनाफिक़ों की इताअत न करना और उनकी ईज़ारसानी का ख्याल छोड़ दो और खुदा पर भरोसा रखो और कारसाज़ी में खुदा काफ़ी है
49يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا نَكَحْتُمُ الْمُؤْمِنَاتِ ثُمَّ طَلَّقْتُمُوهُنَّ مِن قَبْلِ أَن تَمَسُّوهُنَّ فَمَا لَكُمْ عَلَيْهِنَّ مِنْ عِدَّةٍ تَعْتَدُّونَهَا ۖ فَمَتِّعُوهُنَّ وَسَرِّحُوهُنَّ سَرَاحًا جَمِيلًا
ऐ ईमानवालों जब तुम मोमिना औरतों से (बग़ैर मेहर मुक़र्रर किये) निकाह करो उसके बाद उन्हें अपने हाथ लगाने से पहले ही तलाक़ दे दो तो फिर तुमको उनपर कोई हक़ नहीं कि (उनसे) इद्दा पूरा कराओ उनको तो कुछ (कपड़े रूपये वग़ैरह) देकर उनवाने शाइस्ता से रूख़सत कर दो
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीRevelation
47आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 47

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Tuesday, August 18, 2026

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