अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَلاَ تُطِعِ: और आज्ञा मत मानो
- الْكَافِرِينَ: काफिरों (ईमान न लाने वालों) की
- الْمُنَافِقِينَ: मुनाफिकों (दिखावटी मुसलमानों) की
- وَدَعْ أَذَاهُمْ: और उनके अत्याचार/तकलीफ को छोड़ दो (सहन करो)
- وَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ: और अल्लाह पर भरोसा रखो
- وَكِيلًا: कार्य-साधक, भरोसेमंद संरक्षक
तफसीर (व्याख्या):
ऐ नबी! अल्लाह तआला आपको निर्देश देता है कि काफिरों और मुनाफिकों की बात मत मानो, चाहे वे आपको किसी भी काम के लिए उकसाएँ या आपको सत्य के मार्ग से रोकने की कोशिश करें। उनकी ओर से आने वाली तकलीफों और अत्याचारों को सहन करो और उनसे बदला लेने की जल्दी मत करो। यह सब्र और क्षमा का रास्ता अपनाना स्वयं उनके लिए ईमान लाने का कारण बन सकता है।
फिर अल्लाह तआला आपको सिखाता है कि सभी मामलों में अल्लाह पर भरोसा रखो और अपने कार्यों को उसे सौंप दो। वही आपके लिए काफी है, वही आपकी रक्षा करेगा, आपकी सहायता करेगा और आपके दुश्मनों के मुकाबले में आपको विजय प्रदान करेगा। अल्लाह पर भरोसा करना ही सबसे बड़ी ताकत है, क्योंकि वह सर्वशक्तिमान है और उसकी पकड़ से कोई बच नहीं सकता।
यह आयत हमें सिखाती है कि जब हम अल्लाह पर पूर्ण भरोसा कर लेते हैं, तो हमें किसी इंसान की परवाह नहीं रहती। चाहे दुश्मन कितने भी ताकतवर क्यों न हों, अल्लाह की मदद उसके ईमानदार बंदों के साथ होती है। यही वह रास्ता है जो हमें सच्ची कामयाबी तक पहुँचाता है — सब्र, क्षमा और अल्लाह पर भरोसा।
याद रखिए, अल्लाह तआला अपने बंदों से वादा करता है कि जो उस पर भरोसा करता है, वह उसके लिए हर मुश्किल का हल निकालता है और उसे हर बुराई से बचाता है। तो आइए, हम भी अपने जीवन के हर क्षेत्र में अल्लाह पर भरोसा करें और उसकी राह पर चलें — यही सच्ची सफलता का मार्ग है।
📜 आयत 46-50 — अल-अहज़ाब
अनुवाद — अल-अहज़ाब 48
सूरा अल-अहज़ाब आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) तुम (कहीं) काफिरों और मुनाफिक़ों की इताअत…सूरा आयत 48/73 — अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहज़ाब सुनें, अल-अहज़ाब अनुवाद, अल-अहज़ाब mp3, अल-अहज़ाब pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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