अल-अहज़ाब · 8/73
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अहज़ाब
لِّيَسْأَلَ الصَّادِقِينَ عَن صِدْقِهِمْ ۚ وَأَعَدَّ لِلْكَافِرِينَ عَذَابًا أَلِيمًا ۝٨
Liyas`alas saadiqeena `an sidqihim; wa a`adda lilkaa fireena `azaaban aleemaa
📖 हिंदी अर्थ
ताकि (क़यामत के दिन) सच्चों (पैग़म्बरों) से उनकी सच्चाई तबलीग़े रिसालत का हाल दरियाफ्त करें और काफिरों के वास्ते तो उसने दर्दनाक अज़ाब तैयार ही कर रखा है।

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لِيَسْأَلَ الصَّادِقِينَ عَن صِدْقِهِمْ: ताकि वह सत्यवादी (पैग़ंबरों) से उनकी सच्चाई के बारे में पूछे।
  • وَأَعَدَّ لِلْكَافِرِينَ عَذَابًا أَلِيمًا: और उसने काफ़िरों के लिए दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने नबियों से एक पक्का और भारी अहद (वचन) लिया था, और यह सब कुछ इसलिए किया गया ताकि क़यामत के दिन अल्लाह अपने सच्चे नबियों से उनकी सच्चाई के बारे में पूछे — कि उन्होंने अपनी उम्मतों तक पैग़ाम कैसे पहुँचाया और उन्होंने उस पर कैसा अमल किया। हालाँकि अल्लाह को सब कुछ मालूम है, फिर भी यह पूछताछ काफ़िरों को शर्मिंदा करने और उन पर हुज्जत (प्रमाण) क़ायम करने के लिए होगी, ताकि उनके पास कोई बहाना न बचे। यह सवाल नबियों की तस्दीक़ और उनके मुक़ाम को बुलंद करने का ज़रिया भी होगा।

इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है कि उसने उन लोगों के लिए, जिन्होंने नबियों को झुठलाया और उन पर ईमान नहीं लाए, एक ऐसा अज़ाब तैयार कर रखा है जो बेहद दर्दनाक है — वह है जहन्नम की आग। यह अज़ाब उनके कुफ़्र और सरकशी का बदला होगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला ने अपने नबियों के ज़रिए हिदायत का रास्ता पूरा कर दिया है। अब हर इंसान के पास यह मौक़ा है कि वह ईमान लाकर जन्नत का हक़दार बने। अल्लाह ने सच्चे नबियों को इसलिए भेजा ताकि लोगों को अंधेरे से निकालकर रोशनी की तरफ लाएँ। जो लोग इस रहमत को क़बूल कर लेंगे, उनके लिए खुशख़बरी है, और जो इनकार करेंगे, उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है। यह आयत हमें अपने ईमान की हिफ़ाज़त करने और नबी ﷺ की सुन्नत पर चलने की तरग़ीब देती है, क्योंकि यही कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें सच्चे ईमान और अच्छे अमल की तौफ़ीक़ दे।



📜 आयत 6-10 — सूरा अल-अहज़ाब

6النَّبِيُّ أَوْلَىٰ بِالْمُؤْمِنِينَ مِنْ أَنفُسِهِمْ ۖ وَأَزْوَاجُهُ أُمَّهَاتُهُمْ ۗ وَأُولُو الْأَرْحَامِ بَعْضُهُمْ أَوْلَىٰ بِبَعْضٍ فِي كِتَابِ اللَّهِ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُهَاجِرِينَ إِلَّا أَن تَفْعَلُوا إِلَىٰ أَوْلِيَائِكُم مَّعْرُوفًا ۚ كَانَ ذَٰلِكَ فِي الْكِتَابِ مَسْطُورًا
नबी तो मोमिनीन से खुद उनकी जानों से भी बढ़कर हक़ रखते हैं (क्योंकि वह गोया उम्मत के मेहरबान बाप हैं) और उनकी बीवियाँ (गोया) उनकी माएँ हैं और मोमिनीन व मुहाजिरीन में से (जो लोग बाहम) क़राबतदार हैं। किताबें खुदा की रूह से (ग़ैरों की निस्बत) एक दूसरे के (तर्के के) ज्यादा हक़दार हैं मगर (जब) तुम अपने दोस्तों के साथ सुलूक करना चाहो (तो दूसरी बात है) ये तो किताबे (खुदा) में लिखा हुआ (मौजूद) है
7وَإِذْ أَخَذْنَا مِنَ النَّبِيِّينَ مِيثَاقَهُمْ وَمِنكَ وَمِن نُّوحٍ وَإِبْرَاهِيمَ وَمُوسَىٰ وَعِيسَى ابْنِ مَرْيَمَ ۖ وَأَخَذْنَا مِنْهُم مِّيثَاقًا غَلِيظًا
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब हमने और पैग़म्बरों से और ख़ास तुमसे और नूह और इबराहीम और मूसा और मरियम के बेटे ईसा से एहदो पैमाने लिया और उन लोगों से हमने सख्त एहद लिया था
8لِّيَسْأَلَ الصَّادِقِينَ عَن صِدْقِهِمْ ۚ وَأَعَدَّ لِلْكَافِرِينَ عَذَابًا أَلِيمًا
ताकि (क़यामत के दिन) सच्चों (पैग़म्बरों) से उनकी सच्चाई तबलीग़े रिसालत का हाल दरियाफ्त करें और काफिरों के वास्ते तो उसने दर्दनाक अज़ाब तैयार ही कर रखा है।
9يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اذْكُرُوا نِعْمَةَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ جَاءَتْكُمْ جُنُودٌ فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِيحًا وَجُنُودًا لَّمْ تَرَوْهَا ۚ وَكَانَ اللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرًا
(ऐ ईमानदारों खुदा की) उन नेअमतों को याद करो जो उसने तुम पर नाज़िल की हैं (जंगे खन्दक में) जब तुम पर (काफिरों का) लशकर (उमड़ के) आ पड़ा तो (हमने तुम्हारी मदद की) उन पर ऑंधी भेजी और (इसके अलावा फरिश्तों का ऐसा लश्कर भेजा) जिसको तुमने देखा तक नहीं और तुम जो कुछ कर रहे थे खुदा उसे खूब देख रहा था
10إِذْ جَاءُوكُم مِّن فَوْقِكُمْ وَمِنْ أَسْفَلَ مِنكُمْ وَإِذْ زَاغَتِ الْأَبْصَارُ وَبَلَغَتِ الْقُلُوبُ الْحَنَاجِرَ وَتَظُنُّونَ بِاللَّهِ الظُّنُونَا
जिस वक्त वह लोग तुम पर तुम्हारे ऊपर से आ पड़े और तुम्हारे नीचे की तरफ से भी पिल गए और जिस वक्त (उनकी कसरत से) तुम्हारी ऑंखें ख़ैरा हो गयीं थी और (ख़ौफ से) कलेजे मुँह को आ गए थे और ख़ुदा पर तरह-तरह के (बुरे) ख्याल करने लगे थे।
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीअवतरण स्थान
8आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 8

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Wednesday, September 30, 2026

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