अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِتُنذِرَ: ताकि आप डराएँ (सचेत करें)
- قَوْمًا: एक क़ौम (समुदाय) को
- مَّا أُنذِرَ آبَاؤُهُمْ: जिनके पूर्वजों को (पहले) डराया नहीं गया था (कोई नबी नहीं आया था)
- غَافِلُونَ: बेख़बर, लापरवाह, ग़फ़लत में डूबे हुए
विस्तृत तफ़सीर:
यह आयत उस महान उद्देश्य को बयान करती है जिसके लिए यह क़ुरआन आप (ﷺ) पर उतारा गया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने यह क़ुरआन आप पर इसलिए नाज़िल किया ताकि आप उन लोगों को डराएँ और सचेत करें जिनके पूर्वजों के पास पहले कोई नबी या रसूल नहीं आया था — यानी अरब की क़ौम, ख़ासकर क़ुरैश। उनके पास आपसे पहले कोई आसमानी किताब या नबी नहीं पहुँचा था, इसलिए वे ईमान और हिदायत से बिल्कुल बेख़बर और ग़फ़लत में पड़े हुए थे।
यह आयत हमें सिखाती है कि जिस क़ौम तक अल्लाह का पैग़ाम नहीं पहुँचता, वह स्वाभाविक रूप से ग़फ़लत और अज्ञानता में डूब जाती है। इसलिए अल्लाह ने अपने रसूल (ﷺ) को रहमत बनाकर भेजा ताकि वे उन्हें अंधेरे से निकालकर रोशनी की ओर लाएँ।
इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि जिन लोगों तक दीन की दावत नहीं पहुँची है, उन तक पहुँचाना हमारी ज़िम्मेदारी है। जिस तरह रसूल (ﷺ) ने ग़ाफ़िल क़ौम को जगाया, उसी तरह आज हम पर भी फ़र्ज़ है कि हम अपने समाज में फैली ग़फ़लत को दूर करें और लोगों को अल्लाह की याद और ईमान की ओर बुलाएँ। यह आयत दावत और तब्लीग़ की अहमियत पर एक मज़बूत दलील है — कि इल्म रखने वालों पर वाजिब है कि वे लोगों को जगाएँ और उन्हें अल्लाह के दीन की ओर बुलाएँ।
और ख़ुशख़बरी की बात यह है कि जिस क़ौम को यह नेमत मिली कि उनके पास रसूल (ﷺ) आए और उन्होंने दावत दी, उनके लिए यह सबसे बड़ी रहमत है। आज हमारे पास यह क़ुरआन मौजूद है जो हर ज़माने के लिए हिदायत है। हमें चाहिए कि हम इसे पढ़ें, समझें और इस पर अमल करें, ताकि हम उन लोगों में से हों जो ग़फ़लत से बचे और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें।
📜 आयत 4-8 — यासीन
अनुवाद — यासीन 6
सूरा यासीन आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि तुम उन लोगों को (अज़ाबे खुदा से) डराओ जिनके…सूरा आयत 6/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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