अस-साफ्फात · 182/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
وَالْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ ۝١٨٢
Walhamdu lillaahi Rabbil `aalameen
📖 हिंदी अर्थ
और कुल तारीफ खुदा ही के लिए सज़ावार हैं जो सारे जहाँन का पालने वाला है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الْحَمْدُ: समस्त प्रशंसा और स्तुति, जो प्रेम और सम्मान के साथ हो।
  • رَبِّ الْعَالَمِينَ: समस्त संसारों (सृष्टियों) का पालनहार, पोषणहार और प्रबंधक।

व्याख्या:

यह आयत सूरह अस-साफ्फात की अंतिम आयत है, जिसमें अल्लाह तआला अपनी महान शक्ति और अपने नबियों की सहायता का वर्णन करने के बाद यह घोषणा करता है कि समस्त प्रशंसा और स्तुति केवल अल्लाह ही के लिए है। वह अकेला ही इसका हकदार है, उसका कोई साझीदार नहीं। यह प्रशंसा उसे इस लोक (दुनिया) में भी प्राप्त है और आख़िरत (परलोक) में भी, क्योंकि वही सबका पालनहार, पोषणहार और प्रबंधक है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ने अपने नबियों की सहायता की, उनके शत्रुओं को विनष्ट किया, और यह सब उसकी रहमत और कृपा का परिणाम है। इसलिए, हर हालत में — चाहे सुख हो या दुख, विजय हो या परीक्षा — हमें अल्लाह की प्रशंसा करनी चाहिए और उसका शुक्र अदा करना चाहिए।

दृष्टिकोण (उपदेश):

यह आयत हमें यह शिक्षा देती है कि जीवन के हर क्षण में अल्लाह की प्रशंसा करना चाहिए। जब हम अपने दिल से यह स्वीकार करते हैं कि सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, तो हमारा दिल विनम्र हो जाता है, हमारा अहंकार समाप्त होता है, और हम अल्लाह के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करते हैं। यह हमें सिखाता है कि सफलता और असफलता, दोनों में अल्लाह की योजना पर भरोसा रखें, क्योंकि वही सबका रब है। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत की ओर ले जाता है, जहाँ हमेशा की ज़िंदगी में भी यही प्रशंसा दोहराई जाएगी — "अल्हम्दुलिल्लाहि रब्बिल आलमीन।"

इस आयत को पढ़कर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने जीवन के हर पहलू में अल्लाह के प्रति आभारी रहेंगे, उसकी आज्ञाओं का पालन करेंगे, और उसकी रहमत की कामना करते हुए उसकी प्रशंसा करते रहेंगे। यही सच्ची सफलता है — अल्लाह की रज़ा प्राप्त करना और उसकी प्रशंसा में जीवन बिताना।



📜 आयत 180-182 — सूरा अस-साफ्फात

180سُبْحَانَ رَبِّكَ رَبِّ الْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ
ये लोग जो बातें (खुदा के बारे में) बनाया करते हैं उनसे तुम्हारा परवरदिगार इज्ज़त का मालिक पाक साफ है
181وَسَلَامٌ عَلَى الْمُرْسَلِينَ
और पैग़म्बरों पर (दुरूद) सलाम हो
182وَالْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
और कुल तारीफ खुदा ही के लिए सज़ावार हैं जो सारे जहाँन का पालने वाला है
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
182आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 182

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Thursday, October 1, 2026

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