सूरा अस-साफ्फात अरबी और हिंदी
सूरा अस-साफ्फात को पूरे हिंदी अनुवाद, उच्चारण और ऑडियो तिलावत के साथ पढ़ें। आयत-दर-आयत हिंदी अर्थ। (182 आयत — مكية). अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf.सूरा अस-साफ्फात पढ़ें और सुनें
🎧 आयत
M
Mishary Rashid Alafasy
✓
Mishary Rashid Alafasy
✓
M
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
A
Abdurrahman As-Sudais
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
M
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
A
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
A
Ali Al-Hudhaify
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
A
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
A
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
M
Muhammad Ayyoub
✓
Muhammad Ayyoub
✓
A
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Basfar
✓
A
Abdullah Al-Juhani
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
M
Maher Al Muaiqly
✓
Maher Al Muaiqly
✓
—
x1
رَّبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَرَبُّ الْمَشَارِقِ ٥
📖 अनुवाद
आयत 5
जो सारे आसमान ज़मीन का और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है (सबका) परवरदिगार है
إِنَّا زَيَّنَّا السَّمَاءَ الدُّنْيَا بِزِينَةٍ الْكَوَاكِبِ ٦
📖 अनुवाद
आयत 6
और (चाँद सूरज तारे के) तुलूउ व (गुरूब) के मक़ामात का भी मालिक है हम ही ने नीचे वाले आसमान को तारों की आरइश (जगमगाहट) से आरास्ता किया
وَحِفْظًا مِّن كُلِّ شَيْطَانٍ مَّارِدٍ ٧
📖 अनुवाद
आयत 7
और (तारों को) हर सरकश शैतान से हिफ़ाज़त के वास्ते (भी पैदा किया)
لَّا يَسَّمَّعُونَ إِلَى الْمَلَإِ الْأَعْلَىٰ وَيُقْذَفُونَ مِن كُلِّ جَانِبٍ ٨
📖 अनुवाद
आयत 8
कि अब शैतान आलमे बाला की तरफ़ कान भी नहीं लगा सकते और (जहाँ सुन गुन लेना चाहा तो) हर तरफ़ से खदेड़ने के लिए शहाब फेके जाते हैं
إِلَّا مَنْ خَطِفَ الْخَطْفَةَ فَأَتْبَعَهُ شِهَابٌ ثَاقِبٌ ١٠
📖 अनुवाद
आयत 10
मगर जो (शैतान शाज़ व नादिर फरिश्तों की) कोई बात उचक ले भागता है तो आग का दहकता हुआ तीर उसका पीछा करता है
فَاسْتَفْتِهِمْ أَهُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَم مَّنْ خَلَقْنَا ۚ إِنَّا خَلَقْنَاهُم مِّن طِينٍ لَّازِبٍ ١١
📖 अनुवाद
आयत 11
तो (ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि उनका पैदा करना ज्यादा दुश्वार है या उन (मज़कूरा) चीज़ों का जिनको हमने पैदा किया हमने तो उन लोगों को लसदार मिट्टी से पैदा किया
بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُونَ ١٢
📖 अनुवाद
आयत 12
बल्कि तुम (उन कुफ्फ़ार के इन्कार पर) ताज्जुब करते हो और वह लोग (तुमसे) मसख़रापन करते हैं
وَإِذَا رَأَوْا آيَةً يَسْتَسْخِرُونَ ١٤
📖 अनुवाद
आयत 14
और जब किसी मौजिजे क़ो देखते हैं तो (उससे) मसख़रापन करते हैं
وَقَالُوا إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ ١٥
📖 अनुवाद
आयत 15
और कहते हैं कि ये तो बस खुला हुआ जादू है
أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ ١٦
📖 अनुवाद
आयत 16
भला जब हम मर जाएँगे और ख़ाक और हड्डियाँ रह जाएँगे
أَوَآبَاؤُنَا الْأَوَّلُونَ ١٧
📖 अनुवाद
आयत 17
तो क्या हम या हमारे अगले बाप दादा फिर दोबारा क़ब्रों से उठा खड़े किए जाँएगे
فَإِنَّمَا هِيَ زَجْرَةٌ وَاحِدَةٌ فَإِذَا هُمْ يَنظُرُونَ ١٩
📖 अनुवाद
आयत 19
और तुम ज़लील होगे और वह (क़यामत) तो एक ललकार होगी फिर तो वह लोग फ़ौरन ही (ऑंखे फाड़-फाड़ के) देखने लगेंगे
وَقَالُوا يَا وَيْلَنَا هَٰذَا يَوْمُ الدِّينِ ٢٠
📖 अनुवाद
आयत 20
और कहेंगे हाए अफसोस ये तो क़यामत का दिन है
هَٰذَا يَوْمُ الْفَصْلِ الَّذِي كُنتُم بِهِ تُكَذِّبُونَ ٢١
📖 अनुवाद
आयत 21
(जवाब आएगा) ये वही फैसले का दिन है जिसको तुम लोग (दुनिया में) झूठ समझते थे
۞ احْشُرُوا الَّذِينَ ظَلَمُوا وَأَزْوَاجَهُمْ وَمَا كَانُوا يَعْبُدُونَ ٢٢
📖 अनुवाद
आयत 22
(और फ़रिश्तों को हुक्म होगा कि) जो लोग (दुनिया में) सरकशी करते थे उनको और उनके साथियों को और खुदा को छोड़कर जिनकी परसतिश करते हैं
مِن دُونِ اللَّهِ فَاهْدُوهُمْ إِلَىٰ صِرَاطِ الْجَحِيمِ ٢٣
📖 अनुवाद
आयत 23
उनको (सबको) इकट्ठा करो फिर उन्हें जहन्नुम की राह दिखाओ
وَقِفُوهُمْ ۖ إِنَّهُم مَّسْئُولُونَ ٢٤
📖 अनुवाद
आयत 24
और (हाँ ज़रा) उन्हें ठहराओ तो उनसे कुछ पूछना है
مَا لَكُمْ لَا تَنَاصَرُونَ ٢٥
📖 अनुवाद
आयत 25
(अरे कमबख्तों) अब तुम्हें क्या होगा कि एक दूसरे की मदद नहीं करते
بَلْ هُمُ الْيَوْمَ مُسْتَسْلِمُونَ ٢٦
📖 अनुवाद
आयत 26
(जवाब क्या देंगे) बल्कि वह तो आज गर्दन झुकाए हुए हैं
وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ ٢٧
📖 अनुवाद
आयत 27
और एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे होकर बाहम पूछताछ करेंगे
قَالُوا إِنَّكُمْ كُنتُمْ تَأْتُونَنَا عَنِ الْيَمِينِ ٢٨
📖 अनुवाद
आयत 28
(और इन्सान शयातीन से) कहेंगे कि तुम ही तो हमारी दाहिनी तरफ से (हमें बहकाने को) चढ़ आते थे
قَالُوا بَل لَّمْ تَكُونُوا مُؤْمِنِينَ ٢٩
📖 अनुवाद
आयत 29
वह जवाब देगें (हम क्या जानें) तुम तो खुद ईमान लाने वाले न थे
وَمَا كَانَ لَنَا عَلَيْكُم مِّن سُلْطَانٍ ۖ بَلْ كُنتُمْ قَوْمًا طَاغِينَ ٣٠
📖 अनुवाद
आयत 30
और (साफ़ तो ये है कि) हमारी तुम पर कुछ हुकूमत तो थी नहीं बल्कि तुम खुद सरकश लोग थे
فَحَقَّ عَلَيْنَا قَوْلُ رَبِّنَا ۖ إِنَّا لَذَائِقُونَ ٣١
📖 अनुवाद
आयत 31
फिर अब तो लोगों पर हमारे परवरदिगार का (अज़ाब का) क़ौल पूरा हो गया कि अब हम सब यक़ीनन अज़ाब का मज़ा चखेंगे
فَأَغْوَيْنَاكُمْ إِنَّا كُنَّا غَاوِينَ ٣٢
📖 अनुवाद
आयत 32
हम खुद गुमराह थे तो तुम को भी गुमराह किया
فَإِنَّهُمْ يَوْمَئِذٍ فِي الْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ ٣٣
📖 अनुवाद
आयत 33
ग़रज़ ये लोग सब के सब उस दिन अज़ाब में शरीक होगें
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِالْمُجْرِمِينَ ٣٤
📖 अनुवाद
आयत 34
और हम तो गुनाहगारों के साथ यूँ ही किया करते हैं ये लोग ऐसे (शरीर) थे
إِنَّهُمْ كَانُوا إِذَا قِيلَ لَهُمْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ يَسْتَكْبِرُونَ ٣٥
📖 अनुवाद
आयत 35
कि जब उनसे कहा जाता था कि खुदा के सिवा कोई माबूद नहीं तो अकड़ा करते थे
وَيَقُولُونَ أَئِنَّا لَتَارِكُو آلِهَتِنَا لِشَاعِرٍ مَّجْنُونٍ ٣٦
📖 अनुवाद
आयत 36
और ये लोग कहते थे कि क्या एक पागल शायर के लिए हम अपने माबूदों को छोड़ बैठें (अरे कम्बख्तों ये शायर या पागल नहीं)
بَلْ جَاءَ بِالْحَقِّ وَصَدَّقَ الْمُرْسَلِينَ ٣٧
📖 अनुवाद
आयत 37
बल्कि ये तो हक़ बात लेकर आया है और (अगले) पैग़म्बरों की तसदीक़ करता है
إِنَّكُمْ لَذَائِقُو الْعَذَابِ الْأَلِيمِ ٣٨
📖 अनुवाद
आयत 38
तुम लोग (अगर न मानोगे) तो ज़रूर दर्दनाक अज़ाब का मज़ा चखोगे
وَمَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ٣٩
📖 अनुवाद
आयत 39
और तुम्हें तो उसके किये का बदला दिया जाएगा जो (जो दुनिया में) करते रहे
أُولَٰئِكَ لَهُمْ رِزْقٌ مَّعْلُومٌ ٤١
📖 अनुवाद
आयत 41
उनके वास्ते (बेहिश्त में) एक मुक़र्रर रोज़ी होगी
يُطَافُ عَلَيْهِم بِكَأْسٍ مِّن مَّعِينٍ ٤٥
📖 अनुवाद
आयत 45
उनमें साफ सफेद बुर्राक़ शराब के जाम का दौर चल रहा होगा
لَا فِيهَا غَوْلٌ وَلَا هُمْ عَنْهَا يُنزَفُونَ ٤٧
📖 अनुवाद
आयत 47
(और फिर) न उस शराब में ख़ुमार की वजह से) दर्द सर होगा और न वह उस (के पीने) से मतवाले होंगे
وَعِندَهُمْ قَاصِرَاتُ الطَّرْفِ عِينٌ ٤٨
📖 अनुवाद
आयत 48
और उनके पहलू में (शर्म से) नीची निगाहें करने वाली बड़ी बड़ी ऑंखों वाली परियाँ होगी
كَأَنَّهُنَّ بَيْضٌ مَّكْنُونٌ ٤٩
📖 अनुवाद
आयत 49
(उनकी) गोरी-गोरी रंगतों में हल्की सी सुर्ख़ी ऐसी झलकती होगी
فَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ ٥٠
📖 अनुवाद
आयत 50
गोया वह अन्डे हैं जो छिपाए हुए रखे हो
قَالَ قَائِلٌ مِّنْهُمْ إِنِّي كَانَ لِي قَرِينٌ ٥١
📖 अनुवाद
आयत 51
फिर एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे पाकर बाहम बातचीत करते करते उनमें से एक कहने वाला बोल उठेगा कि (दुनिया में) मेरा एक दोस्त था
يَقُولُ أَإِنَّكَ لَمِنَ الْمُصَدِّقِينَ ٥٢
📖 अनुवाद
आयत 52
और (मुझसे) कहा करता था कि क्या तुम भी क़यामत की तसदीक़ करने वालों में हो
أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَدِينُونَ ٥٣
📖 अनुवाद
आयत 53
(भला जब हम मर जाएँगे) और (सड़ गल कर) मिट्टी और हव्ी (होकर) रह जाएँगे तो क्या हमको दोबारा ज़िन्दा करके हमारे (आमाल का) बदला दिया जाएगा
فَاطَّلَعَ فَرَآهُ فِي سَوَاءِ الْجَحِيمِ ٥٥
📖 अनुवाद
आयत 55
तो क्या तुम लोग भी (मेरे साथ उसे झांक कर देखोगे) ग़रज़ झाँका तो उसे बीच जहन्नुम में (पड़ा हुआ) देखा
قَالَ تَاللَّهِ إِن كِدتَّ لَتُرْدِينِ ٥٦
📖 अनुवाद
आयत 56
(ये देख कर बेसाख्ता) बोल उठेगा कि खुदा की क़सम तुम तो मुझे भी तबाह करने ही को थे
وَلَوْلَا نِعْمَةُ رَبِّي لَكُنتُ مِنَ الْمُحْضَرِينَ ٥٧
📖 अनुवाद
आयत 57
और अगर मेरे परवरदिगार का एहसान न होता तो मैं भी (इस वक्त) तेरी तरह जहन्नुम में गिरफ्तार किया गया होता
أَفَمَا نَحْنُ بِمَيِّتِينَ ٥٨
📖 अनुवाद
आयत 58
(अब बताओ) क्या (मैं तुम से न कहता था) कि हम को इस पहली मौत के सिवा फिर मरना नहीं है
إِلَّا مَوْتَتَنَا الْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ ٥٩
📖 अनुवाद
आयत 59
और न हम पर (आख़ेरत) में अज़ाब होगा
إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ ٦٠
📖 अनुवाद
आयत 60
(तो तुम्हें यक़ीन न होता था) ये यक़ीनी बहुत बड़ी कामयाबी है
لِمِثْلِ هَٰذَا فَلْيَعْمَلِ الْعَامِلُونَ ٦١
📖 अनुवाद
आयत 61
ऐसी (ही कामयाबी) के वास्ते काम करने वालों को कारगुज़ारी करनी चाहिए
أَذَٰلِكَ خَيْرٌ نُّزُلًا أَمْ شَجَرَةُ الزَّقُّومِ ٦٢
📖 अनुवाद
आयत 62
भला मेहमानी के वास्ते ये (सामान) बेहतर है या थोहड़ का दरख्त (जो जहन्नुमियों के वास्ते होगा)
إِنَّا جَعَلْنَاهَا فِتْنَةً لِّلظَّالِمِينَ ٦٣
📖 अनुवाद
आयत 63
जिसे हमने यक़ीनन ज़ालिमों की आज़माइश के लिए बनाया है
إِنَّهَا شَجَرَةٌ تَخْرُجُ فِي أَصْلِ الْجَحِيمِ ٦٤
📖 अनुवाद
आयत 64
ये वह दरख्त हैं जो जहन्नुम की तह में उगता है
طَلْعُهَا كَأَنَّهُ رُءُوسُ الشَّيَاطِينِ ٦٥
📖 अनुवाद
आयत 65
उसके फल ऐसे (बदनुमा) हैं गोया (हू बहू) साँप के फन जिसे छूते दिल डरे
فَإِنَّهُمْ لَآكِلُونَ مِنْهَا فَمَالِئُونَ مِنْهَا الْبُطُونَ ٦٦
📖 अनुवाद
आयत 66
फिर ये (जहन्नुमी लोग) यक़ीनन उसमें से खाएँगे फिर उसी से अपने पेट भरेंगे
ثُمَّ إِنَّ لَهُمْ عَلَيْهَا لَشَوْبًا مِّنْ حَمِيمٍ ٦٧
📖 अनुवाद
आयत 67
फिर उसके ऊपर से उन को खूब खौलता हुआ पानी (पीप वग़ैरह में) मिला मिलाकर पीने को दिया जाएगा
ثُمَّ إِنَّ مَرْجِعَهُمْ لَإِلَى الْجَحِيمِ ٦٨
📖 अनुवाद
आयत 68
फिर (खा पीकर) उनको जहन्नुम की तरफ यक़ीनन लौट जाना होगा
إِنَّهُمْ أَلْفَوْا آبَاءَهُمْ ضَالِّينَ ٦٩
📖 अनुवाद
आयत 69
उन लोगों ने अपन बाप दादा को गुमराह पाया था
وَلَقَدْ ضَلَّ قَبْلَهُمْ أَكْثَرُ الْأَوَّلِينَ ٧١
📖 अनुवाद
आयत 71
और उनके क़ब्ल अगलों में से बहुतेरे गुमराह हो चुके
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا فِيهِم مُّنذِرِينَ ٧٢
📖 अनुवाद
आयत 72
उन लोगों के डराने वाले (पैग़म्बरों) को भेजा था
فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُنذَرِينَ ٧٣
📖 अनुवाद
आयत 73
ज़रा देखो तो कि जो लोग डराए जा चुके थे उनका क्या बुरा अन्जाम हुआ
إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ ٧٤
📖 अनुवाद
आयत 74
मगर (हाँ) खुदा के निरे खरे बन्दे (महफूज़ रहे)
وَلَقَدْ نَادَانَا نُوحٌ فَلَنِعْمَ الْمُجِيبُونَ ٧٥
📖 अनुवाद
आयत 75
और नूह ने (अपनी कौम से मायूस होकर) हमें ज़रूर पुकारा था (देखो हम) क्या खूब जवाब देने वाले थे
وَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ ٧٦
📖 अनुवाद
आयत 76
और हमने उनको और उनके लड़के वालों को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी
وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُ هُمُ الْبَاقِينَ ٧٧
📖 अनुवाद
आयत 77
और हमने (उनमें वह बरकत दी कि) उनकी औलाद को (दुनिया में) बरक़रार रखा
وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ ٧٨
📖 अनुवाद
आयत 78
और बाद को आने वाले लोगों में उनका अच्छा चर्चा बाक़ी रखा
سَلَامٌ عَلَىٰ نُوحٍ فِي الْعَالَمِينَ ٧٩
📖 अनुवाद
आयत 79
कि सारी खुदायी में (हर तरफ से) नूह पर सलाम है
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ ٨٠
📖 अनुवाद
आयत 80
हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं
إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ ٨١
📖 अनुवाद
आयत 81
इसमें शक नहीं कि नूह हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों से थे
۞ وَإِنَّ مِن شِيعَتِهِ لَإِبْرَاهِيمَ ٨٣
📖 अनुवाद
आयत 83
और यक़ीनन उन्हीं के तरीक़ो पर चलने वालों में इबराहीम (भी) ज़रूर थे
إِذْ جَاءَ رَبَّهُ بِقَلْبٍ سَلِيمٍ ٨٤
📖 अनुवाद
आयत 84
जब वह अपने परवरदिगार (कि इबादत) की तरफ (पहलू में) ऐसा दिल लिए हुए बढ़े जो (हर ऐब से पाक था
إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِ مَاذَا تَعْبُدُونَ ٨٥
📖 अनुवाद
आयत 85
जब उन्होंने अपने (मुँह बोले) बाप और अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग किस चीज़ की परसतिश करते हो
أَئِفْكًا آلِهَةً دُونَ اللَّهِ تُرِيدُونَ ٨٦
📖 अनुवाद
आयत 86
क्या खुदा को छोड़कर दिल से गढ़े हुए माबूदों की तमन्ना रखते हो
فَمَا ظَنُّكُم بِرَبِّ الْعَالَمِينَ ٨٧
📖 अनुवाद
आयत 87
फिर सारी खुदाई के पालने वाले के साथ तुम्हारा क्या ख्याल है
فَنَظَرَ نَظْرَةً فِي النُّجُومِ ٨٨
📖 अनुवाद
आयत 88
फिर (एक ईद में उन लोगों ने चलने को कहा) तो इबराहीम ने सितारों की तरफ़ एक नज़र देखा
فَتَوَلَّوْا عَنْهُ مُدْبِرِينَ ٩٠
📖 अनुवाद
आयत 90
तो वह लोग इबराहीम के पास से पीठ फेर फेर कर हट गए
فَرَاغَ إِلَىٰ آلِهَتِهِمْ فَقَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ ٩١
📖 अनुवाद
आयत 91
(बस) फिर तो इबराहीम चुपके से उनके बुतों की तरफ मुतावज्जे हुए और (तान से) कहा तुम्हारे सामने इतने चढ़ाव रखते हैं
فَأَقْبَلُوا إِلَيْهِ يَزِفُّونَ ٩٤
📖 अनुवाद
आयत 94
फिर तो इबराहीम दाहिने हाथ से मारते हुए उन पर पिल पड़े (और तोड़-फोड़ कर एक बड़े बुत के गले में कुल्हाड़ी डाल दी)
قَالَ أَتَعْبُدُونَ مَا تَنْحِتُونَ ٩٥
📖 अनुवाद
आयत 95
जब उन लोगों को ख़बर हुई तो इबराहीम के पास दौड़ते हुए पहुँचे
وَاللَّهُ خَلَقَكُمْ وَمَا تَعْمَلُونَ ٩٦
📖 अनुवाद
आयत 96
इबराहीम ने कहा (अफ़सोस) तुम लोग उसकी परसतिश करते हो जिसे तुम लोग खुद तराश कर बनाते हो
قَالُوا ابْنُوا لَهُ بُنْيَانًا فَأَلْقُوهُ فِي الْجَحِيمِ ٩٧
📖 अनुवाद
आयत 97
हालाँकि तुमको और जिसको तुम लोग बनाते हो (सबको) खुदा ही ने पैदा किया है (ये सुनकर) वह लोग (आपस में कहने लगे) इसके लिए (भट्टी की सी) एक इमारत बनाओ
فَأَرَادُوا بِهِ كَيْدًا فَجَعَلْنَاهُمُ الْأَسْفَلِينَ ٩٨
📖 अनुवाद
आयत 98
और (उसमें आग सुलगा कर उसी दहकती हुई आग में इसको डाल दो) फिर उन लोगों ने इबराहीम के साथ मक्कारी करनी चाही
وَقَالَ إِنِّي ذَاهِبٌ إِلَىٰ رَبِّي سَيَهْدِينِ ٩٩
📖 अनुवाद
आयत 99
तो हमने (आग सर्द गुलज़ार करके) उन्हें नीचा दिखाया और जब (आज़र ने) इबराहीम को निकाल दिया तो बोले मैं अपने परवरदिगार की तरफ जाता हूँ
رَبِّ هَبْ لِي مِنَ الصَّالِحِينَ ١٠٠
📖 अनुवाद
आयत 100
वह अनक़रीब ही मुझे रूबरा कर देगा (फिर ग़रज की) परवरदिगार मुझे एक नेको कार (फरज़न्द) इनायत फरमा
فَبَشَّرْنَاهُ بِغُلَامٍ حَلِيمٍ ١٠١
📖 अनुवाद
आयत 101
तो हमने उनको एक बड़े नरम दिले लड़के (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी
فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ السَّعْيَ قَالَ يَا بُنَيَّ إِنِّي أَرَىٰ فِي الْمَنَامِ أَنِّي أَذْبَحُكَ فَانظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَا أَبَتِ افْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِي إِن شَاءَ اللَّهُ مِنَ الصَّابِرِينَ ١٠٢
📖 अनुवाद
आयत 102
फिर जब इस्माईल अपने बाप के साथ दौड़ धूप करने लगा तो (एक दफा) इबराहीम ने कहा बेटा खूब मैं (वही के ज़रिये क्या) देखता हूँ कि मैं तो खुद तुम्हें ज़िबाह कर रहा हूँ तो तुम भी ग़ौर करो तुम्हारी इसमें क्या राय है इसमाईल ने कहा अब्बा जान जो आपको हुक्म हुआ है उसको (बे तअम्मुल) कीजिए अगर खुदा ने चाहा तो मुझे आप सब्र करने वालों में से पाएगे
فَلَمَّا أَسْلَمَا وَتَلَّهُ لِلْجَبِينِ ١٠٣
📖 अनुवाद
आयत 103
फिर जब दोनों ने ये ठान ली और बाप ने बेटे को (ज़िबाह करने के लिए) माथे के बल लिटाया
قَدْ صَدَّقْتَ الرُّؤْيَا ۚ إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ ١٠٥
📖 अनुवाद
आयत 105
तुमने अपने ख्वाब को सच कर दिखाया अब तुम दोनों को बड़े मरतबे मिलेगें हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर देते हैं
إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْبَلَاءُ الْمُبِينُ ١٠٦
📖 अनुवाद
आयत 106
इसमें शक नहीं कि ये यक़ीनी बड़ा सख्त और सरीही इम्तिहान था
وَفَدَيْنَاهُ بِذِبْحٍ عَظِيمٍ ١٠٧
📖 अनुवाद
आयत 107
और हमने इस्माईल का फ़िदया एक ज़िबाहे अज़ीम (बड़ी कुर्बानी) क़रार दिया
وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ ١٠٨
📖 अनुवाद
आयत 108
और हमने उनका अच्छा चर्चा बाद को आने वालों में बाक़ी रखा है
سَلَامٌ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ ١٠٩
📖 अनुवाद
आयत 109
कि (सारी खुदायी में) इबराहीम पर सलाम (ही सलाम) हैं
إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ ١١١
📖 अनुवाद
आयत 111
बेशक इबराहीम हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों में थे
وَبَشَّرْنَاهُ بِإِسْحَاقَ نَبِيًّا مِّنَ الصَّالِحِينَ ١١٢
📖 अनुवाद
आयत 112
और हमने इबराहीम को इसहाक़ (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी थी
وَبَارَكْنَا عَلَيْهِ وَعَلَىٰ إِسْحَاقَ ۚ وَمِن ذُرِّيَّتِهِمَا مُحْسِنٌ وَظَالِمٌ لِّنَفْسِهِ مُبِينٌ ١١٣
📖 अनुवाद
आयत 113
जो एक नेकोसार नबी थे और हमने खुद इबराहीम पर और इसहाक़ पर अपनी बरकत नाज़िल की और इन दोनों की नस्ल में बाज़ तो नेकोकार और बाज़ (नाफरमानी करके) अपनी जान पर सरीही सितम ढ़ाने वाला
وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَارُونَ ١١٤
📖 अनुवाद
आयत 114
और हमने मूसा और हारून पर बहुत से एहसानात किए हैं
وَنَجَّيْنَاهُمَا وَقَوْمَهُمَا مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ ١١٥
📖 अनुवाद
आयत 115
और खुद दोनों को और इनकी क़ौम को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी
وَنَصَرْنَاهُمْ فَكَانُوا هُمُ الْغَالِبِينَ ١١٦
📖 अनुवाद
आयत 116
और (फिरऔन के मुक़ाबले में) हमने उनकी मदद की तो (आख़िर) यही लोग ग़ालिब रहे
وَآتَيْنَاهُمَا الْكِتَابَ الْمُسْتَبِينَ ١١٧
📖 अनुवाद
आयत 117
और हमने उन दोनों को एक वाज़ेए उलम तालिब किताब (तौरेत) अता की
وَهَدَيْنَاهُمَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ ١١٨
📖 अनुवाद
आयत 118
और दोनों को सीधी राह की हिदायत फ़रमाई
وَتَرَكْنَا عَلَيْهِمَا فِي الْآخِرِينَ ١١٩
📖 अनुवाद
आयत 119
और बाद को आने वालों में उनका ज़िक्रे ख़ैर बाक़ी रखा
سَلَامٌ عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَارُونَ ١٢٠
📖 अनुवाद
आयत 120
कि (हर जगह) मूसा और हारून पर सलाम (ही सलाम) है
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ ١٢١
📖 अनुवाद
आयत 121
हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं
إِنَّهُمَا مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ ١٢٢
📖 अनुवाद
आयत 122
बेशक ये दोनों हमारे (ख़ालिस ईमानदार बन्दों में से थे)
وَإِنَّ إِلْيَاسَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ ١٢٣
📖 अनुवाद
आयत 123
और इसमें शक नहीं कि इलियास यक़ीनन पैग़म्बरों में से थे
إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ أَلَا تَتَّقُونَ ١٢٤
📖 अनुवाद
आयत 124
जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते
أَتَدْعُونَ بَعْلًا وَتَذَرُونَ أَحْسَنَ الْخَالِقِينَ ١٢٥
📖 अनुवाद
आयत 125
क्या तुम लोग बाल (बुत) की परसतिश करते हो और खुदा को छोड़े बैठे हो जो सबसे बेहतर पैदा करने वाला है
اللَّهَ رَبَّكُمْ وَرَبَّ آبَائِكُمُ الْأَوَّلِينَ ١٢٦
📖 अनुवाद
आयत 126
और (जो) तुम्हारा परवरदिगार और तुम्हारे अगले बाप दादाओं का (भी) परवरदिगार है
فَكَذَّبُوهُ فَإِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ ١٢٧
📖 अनुवाद
आयत 127
तो उसे लोगों ने झुठला दिया तो ये लोग यक़ीनन (जहन्नुम) में गिरफ्तार किए जाएँगे
وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ ١٢٩
📖 अनुवाद
आयत 129
और हमने उनका ज़िक्र ख़ैर बाद को आने वालों में बाक़ी रखा
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ ١٣١
📖 अनुवाद
आयत 131
हम यक़ीनन नेकी करने वालों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं
إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ ١٣٢
📖 अनुवाद
आयत 132
बेशक वह हमारे (ख़ालिस) ईमानदार बन्दों में थे
وَإِنَّ لُوطًا لَّمِنَ الْمُرْسَلِينَ ١٣٣
📖 अनुवाद
आयत 133
और इसमें भी शक नहीं कि लूत यक़ीनी पैग़म्बरों में से थे
إِذْ نَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ أَجْمَعِينَ ١٣٤
📖 अनुवाद
आयत 134
जब हमने उनको और उनके लड़के वालों सब को नजात दी
إِلَّا عَجُوزًا فِي الْغَابِرِينَ ١٣٥
📖 अनुवाद
आयत 135
मगर एक (उनकी) बूढ़ी बीबी जो पीछे रह जाने वालों ही में थीं
وَإِنَّكُمْ لَتَمُرُّونَ عَلَيْهِم مُّصْبِحِينَ ١٣٧
📖 अनुवाद
आयत 137
और ऐ अहले मक्का तुम लोग भी उन पर से (कभी) सुबह को और (कभी) शाम को (आते जाते गुज़रते हो)
وَإِنَّ يُونُسَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ ١٣٩
📖 अनुवाद
आयत 139
और इसमें शक नहीं कि यूनुस (भी) पैग़म्बरों में से थे
إِذْ أَبَقَ إِلَى الْفُلْكِ الْمَشْحُونِ ١٤٠
📖 अनुवाद
आयत 140
(वह वक्त याद करो) जब यूनुस भाग कर एक भरी हुई कश्ती के पास पहुँचे
فَسَاهَمَ فَكَانَ مِنَ الْمُدْحَضِينَ ١٤١
📖 अनुवाद
आयत 141
तो (अहले कश्ती ने) कुरआ डाला तो (उनका ही नाम निकला) यूनुस ने ज़क उठायी (और दरिया में गिर पड़े)
فَالْتَقَمَهُ الْحُوتُ وَهُوَ مُلِيمٌ ١٤٢
📖 अनुवाद
आयत 142
तो उनको एक मछली निगल गयी और यूनुस खुद (अपनी) मलामत कर रहे थे
فَلَوْلَا أَنَّهُ كَانَ مِنَ الْمُسَبِّحِينَ ١٤٣
📖 अनुवाद
आयत 143
फिर अगर यूनुस (खुदा की) तसबीह (व ज़िक्र) न करते
لَلَبِثَ فِي بَطْنِهِ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ ١٤٤
📖 अनुवाद
आयत 144
तो रोज़े क़यामत तक मछली के पेट में रहते
۞ فَنَبَذْنَاهُ بِالْعَرَاءِ وَهُوَ سَقِيمٌ ١٤٥
📖 अनुवाद
आयत 145
फिर हमने उनको (मछली के पेट से निकाल कर) एक खुले मैदान में डाल दिया
وَأَنبَتْنَا عَلَيْهِ شَجَرَةً مِّن يَقْطِينٍ ١٤٦
📖 अनुवाद
आयत 146
और (वह थोड़ी देर में) बीमार निढाल हो गए थे और हमने उन पर साये के लिए एक कद्दू का दरख्त उगा दिया
وَأَرْسَلْنَاهُ إِلَىٰ مِائَةِ أَلْفٍ أَوْ يَزِيدُونَ ١٤٧
📖 अनुवाद
आयत 147
और (इसके बाद) हमने एक लाख बल्कि (एक हिसाब से) ज्यादा आदमियों की तरफ (पैग़म्बर बना कर भेजा)
فَآمَنُوا فَمَتَّعْنَاهُمْ إِلَىٰ حِينٍ ١٤٨
📖 अनुवाद
आयत 148
तो वह लोग (उन पर) ईमान लाए फिर हमने (भी) एक ख़ास वक्त तक उनको चैन से रखा
فَاسْتَفْتِهِمْ أَلِرَبِّكَ الْبَنَاتُ وَلَهُمُ الْبَنُونَ ١٤٩
📖 अनुवाद
आयत 149
तो (ऐ रसूल) उन कुफ्फ़ार से पूछो कि क्या तुम्हारे परवरदिगार के लिए बेटियाँ हैं और उनके लिए बेटे
أَمْ خَلَقْنَا الْمَلَائِكَةَ إِنَاثًا وَهُمْ شَاهِدُونَ ١٥٠
📖 अनुवाद
आयत 150
(क्या वाक़ई) हमने फरिश्तों की औरतें बनाया है और ये लोग (उस वक्त) मौजूद थे
أَلَا إِنَّهُم مِّنْ إِفْكِهِمْ لَيَقُولُونَ ١٥١
📖 अनुवाद
आयत 151
ख़बरदार (याद रखो कि) ये लोग यक़ीनन अपने दिल से गढ़-गढ़ के कहते हैं कि खुदा औलाद वाला है
أَصْطَفَى الْبَنَاتِ عَلَى الْبَنِينَ ١٥٣
📖 अनुवाद
आयत 153
क्या खुदा ने (अपने लिए) बेटियों को बेटों पर तरजीह दी है
مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ ١٥٤
📖 अनुवाद
आयत 154
(अरे कम्बख्तों) तुम्हें क्या जुनून हो गया है तुम लोग (बैठे-बैठे) कैसा फैसला करते हो
أَمْ لَكُمْ سُلْطَانٌ مُّبِينٌ ١٥٦
📖 अनुवाद
आयत 156
या तुम्हारे पास (इसकी) कोई वाज़ेए व रौशन दलील है
فَأْتُوا بِكِتَابِكُمْ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ١٥٧
📖 अनुवाद
आयत 157
तो अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो अपनी किताब पेश करो
وَجَعَلُوا بَيْنَهُ وَبَيْنَ الْجِنَّةِ نَسَبًا ۚ وَلَقَدْ عَلِمَتِ الْجِنَّةُ إِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ ١٥٨
📖 अनुवाद
आयत 158
और उन लोगों ने खुदा और जिन्नात के दरमियान रिश्ता नाता मुक़र्रर किया है हालाँकि जिन्नात बखूबी जानते हैं कि वह लोग यक़ीनी (क़यामत में बन्दों की तरह) हाज़िर किए जाएँगे
سُبْحَانَ اللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ ١٥٩
📖 अनुवाद
आयत 159
ये लोग जो बातें बनाया करते हैं इनसे खुदा पाक साफ़ है
إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ ١٦٠
📖 अनुवाद
आयत 160
मगर खुदा के निरे खरे बन्दे (ऐसा नहीं कहते)
وَمَا مِنَّا إِلَّا لَهُ مَقَامٌ مَّعْلُومٌ ١٦٤
📖 अनुवाद
आयत 164
और फरिश्ते या आइम्मा तो ये कहते हैं कि मैं हर एक का एक दरजा मुक़र्रर है
وَإِنَّا لَنَحْنُ الصَّافُّونَ ١٦٥
📖 अनुवाद
आयत 165
और हम तो यक़ीनन (उसकी इबादत के लिए) सफ बाँधे खड़े रहते हैं
لَوْ أَنَّ عِندَنَا ذِكْرًا مِّنَ الْأَوَّلِينَ ١٦٨
📖 अनुवाद
आयत 168
कि अगर हमारे पास भी अगले लोगों का तज़किरा (किसी किताबे खुदा में) होता
لَكُنَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ ١٦٩
📖 अनुवाद
आयत 169
तो हम भी खुदा के निरे खरे बन्दे ज़रूर हो जाते
فَكَفَرُوا بِهِ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ ١٧٠
📖 अनुवाद
आयत 170
(मगर जब किताब आयी) तो उन लोगों ने उससे इन्कार किया ख़ैर अनक़रीब (उसका नतीजा) उन्हें मालूम हो जाएगा
وَلَقَدْ سَبَقَتْ كَلِمَتُنَا لِعِبَادِنَا الْمُرْسَلِينَ ١٧١
📖 अनुवाद
आयत 171
और अपने ख़ास बन्दों पैग़म्बरों से हमारी बात पक्की हो चुकी है
إِنَّهُمْ لَهُمُ الْمَنصُورُونَ ١٧٢
📖 अनुवाद
आयत 172
कि इन लोगों की (हमारी बारगाह से) यक़ीनी मदद की जाएगी
فَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ ١٧٤
📖 अनुवाद
आयत 174
तो (ऐ रसूल) तुम उनसे एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो
وَأَبْصِرْهُمْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ ١٧٥
📖 अनुवाद
आयत 175
और इनको देखते रहो तो ये लोग अनक़रीब ही (अपना नतीजा) देख लेगे
أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ ١٧٦
📖 अनुवाद
आयत 176
तो क्या ये लोग हमारे अज़ाब की जल्दी कर रहे हैं
فَإِذَا نَزَلَ بِسَاحَتِهِمْ فَسَاءَ صَبَاحُ الْمُنذَرِينَ ١٧٧
📖 अनुवाद
आयत 177
फिर जब (अज़ाब) उनकी अंगनाई में उतर पडेग़ा तो जो लोग डराए जा चुके हैं उनकी भी क्या बुरी सुबह होगी
وَأَبْصِرْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ ١٧٩
📖 अनुवाद
आयत 179
और देखते रहो ये लोग तो खुद अनक़रीब ही अपना अन्जाम देख लेगें
سُبْحَانَ رَبِّكَ رَبِّ الْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ ١٨٠
📖 अनुवाद
आयत 180
ये लोग जो बातें (खुदा के बारे में) बनाया करते हैं उनसे तुम्हारा परवरदिगार इज्ज़त का मालिक पाक साफ है
وَالْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ ١٨٢
📖 अनुवाद
आयत 182
और कुल तारीफ खुदा ही के लिए सज़ावार हैं जो सारे जहाँन का पालने वाला है
पढ़ें सूरा अस-साफ्फात हिंदी अनुवाद – अरबी पाठ और ऑडियो
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए

