अस-साफ्फात · 181/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
وَسَلَامٌ عَلَى الْمُرْسَلِينَ ۝١٨١
Wa salaamun `alalmursaleen
📖 हिंदी अर्थ
और पैग़म्बरों पर (दुरूद) सलाम हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَلَامٌ (सलाम): अल्लाह की ओर से शांति, सुरक्षा और सम्मान की दुआ।
  • الْمُرْسَلِينَ (अल-मुरसलीन): वे पैगंबर जिन्हें अल्लाह ने अपनी उम्मतों की ओर संदेशवाहक बनाकर भेजा।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपने सभी पैगंबरों और रसूलों पर सलाम और शांति भेज रहा है। यह एक ऐसा सम्मान है जो केवल अल्लाह की ओर से उसके चुने हुए बंदों को मिलता है। यहाँ "सलाम" का अर्थ है अल्लाह की ओर से उन्हें हर प्रकार की बुराई, कष्ट और अपमान से सुरक्षित रखना, और उन्हें शांति और सम्मान प्रदान करना।

यह आयत उन सभी नबियों और रसूलों के लिए एक सामान्य दुआ और प्रशंसा है, जिन्होंने अल्लाह का संदेश पहुँचाने में अपना पूरा जीवन लगा दिया। आदम (अलैहिस्सलाम) से लेकर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तक, हर उस नबी को यह सलाम शामिल है जिसने एकेश्वरवाद (तौहीद) का संदेश पहुँचाया और अपनी उम्मत को सीधे रास्ते पर चलने की शिक्षा दी।

यहाँ विशेष रूप से उन रसूलों का ज़िक्र किया गया है जो अल्लाह की ओर से विशेष शरीयत (कानून) और किताब लेकर आए। यह सलाम उनके लिए एक स्थायी सम्मान है, जो क़यामत तक जारी रहेगा। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी भुलाता नहीं, और उनकी मेहनत और त्याग का अच्छा बदला देता है।

दावती पहलू:

यह आयत हमारे दिलों में पैगंबरों के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना पैदा करती है। जब अल्लाह खुद अपने रसूलों पर सलाम भेजता है, तो हमें भी चाहिए कि हम उनके तरीकों को अपनाएँ और उनके बताए रास्ते पर चलें। यह सलाम हमें याद दिलाता है कि सच्ची शांति और सफलता उसी रास्ते में है जो अल्लाह के रसूलों ने दिखाया। हमें भी अपने जीवन में उनके आदर्शों को अपनाकर अल्लाह की रहमत और सलाम के हक़दार बनने की कोशिश करनी चाहिए। यह आयत हमें आशा देती है कि जो लोग अल्लाह के धर्म की सेवा करते हैं, उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में सम्मान और शांति मिलती है।



📜 आयत 179-182 — सूरा अस-साफ्फात

179وَأَبْصِرْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ
और देखते रहो ये लोग तो खुद अनक़रीब ही अपना अन्जाम देख लेगें
180سُبْحَانَ رَبِّكَ رَبِّ الْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ
ये लोग जो बातें (खुदा के बारे में) बनाया करते हैं उनसे तुम्हारा परवरदिगार इज्ज़त का मालिक पाक साफ है
181وَسَلَامٌ عَلَى الْمُرْسَلِينَ
और पैग़म्बरों पर (दुरूद) सलाम हो
182وَالْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
और कुल तारीफ खुदा ही के लिए सज़ावार हैं जो सारे जहाँन का पालने वाला है
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
181आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 181

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Friday, October 2, 2026

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