अज़-ज़ुमर · 25/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
كَذَّبَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ فَأَتَاهُمُ الْعَذَابُ مِنْ حَيْثُ لَا يَشْعُرُونَ ۝٢٥
Kazzabal lazeena min qablihim fa ataahumul `azaabu min haisu laa yash`uroon
📖 हिंदी अर्थ
जो लोग उनसे पहले गुज़र गए उन्होंने भी (पैग़म्बरों को) झुठलाया तो उन पर अज़ाब इस तरह आ पहुँचा कि उन्हें ख़बर भी न हुई
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَذَّبَ: झुठलाया, असत्य कहा
  • الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ: उनसे पहले के लोग (पिछली उम्मतें)
  • فَأَتَاهُمُ الْعَذَابُ: तो उनके पास अज़ाब (यातना) आया
  • مِنْ حَيْثُ لَا يَشْعُرُونَ: ऐसी जगह से (ऐसे रास्ते से) जिसका उन्हें एहसास भी नहीं था

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला नबी करीम ﷺ और उनकी उम्मत को एक बहुत बड़ा सबक़ सिखा रहे हैं। अल्लाह फ़रमाता है कि ऐ नबी! आपसे पहले भी कई क़ौमें थीं—जैसे आद, समूद, फ़िरऔन की क़ौम और दूसरी उम्मतें—जिन्होंने अपने नबियों को झुठलाया। उन्होंने सोचा कि हम ताक़तवर हैं, हमारे पास धन-दौलत और सामर्थ्य है, कोई हमारा क्या बिगाड़ लेगा? लेकिन अल्लाह का अज़ाब उन पर इस तरह आया कि उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था। न उन्होंने कोई आहट सुनी, न कोई निशानी देखी—अचानक तबाही आई और सब कुछ ख़त्म कर दिया।

यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है कि जब कोई क़ौम हद से गुज़र जाती है और अपने रसूलों को झुठलाती है, तो अल्लाह उन्हें उस रास्ते से पकड़ता है जिसका उन्हें वहम-गुमान भी नहीं होता। वे सोचते हैं कि सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन अल्लाह की पकड़ उनके लिए तैयार होती है। यही हाल इन मक्का के मुशरिकों का है—वे भी अपने नबी को झुठला रहे हैं, और अगर वे अपनी इस हरकत से बाज़ नहीं आए, तो उन पर भी वही अज़ाब आ सकता है जो पिछली उम्मतों पर आया।

इस आयत में एक और बड़ी हक़ीक़त बताई गई है: अल्लाह का अज़ाब अक्सर उस वक़्त आता है जब इंसान बिल्कुल बेख़बर होता है। इंसान अपनी तदबीर और ताक़त पर भरोसा करता है, लेकिन अल्लाह की तदबीर सबसे बलंद है। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह अल्लाह के अज़ाब से डरे, अपने गुनाहों से तौबा करे, और नबियों की लाई हुई राह पर चले। जो लोग अल्लाह के दीन को झुठलाते हैं, उनका अंजाम बुरा होता है—दुनिया में भी और आख़िरत में भी।

याद रखिए! अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत भी बहुत बड़ी है। जो बंदा अपनी ग़लती पर पछताए और अल्लाह की तरफ़ लौट आए, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है। यही वह रास्ता है जो हमें अज़ाब से बचाता है और जन्नत तक पहुँचाता है। आइए, हम सब इस आयत से सबक़ लें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ।

🎧 सुनें

📜 आयत 23-27 — अज़-ज़ुमर

23اللَّهُ نَزَّلَ أَحْسَنَ الْحَدِيثِ كِتَابًا مُّتَشَابِهًا مَّثَانِيَ تَقْشَعِرُّ مِنْهُ جُلُودُ الَّذِينَ يَخْشَوْنَ رَبَّهُمْ ثُمَّ تَلِينُ جُلُودُهُمْ وَقُلُوبُهُمْ إِلَىٰ ذِكْرِ اللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ هُدَى اللَّهِ يَهْدِي بِهِ مَن يَشَاءُ ۚ وَمَن يُضْلِلِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِنْ هَادٍ
ये लोग सरीही गुमराही में (पड़े) हैं ख़ुदा ने बहुत ही अच्छा कलाम (यावी ये) किताब नाज़िल फरमाई (जिसकी आयतें) एक दूसरे से मिलती जुलती हैं और (एक बात कई-कई बार) दोहराई गयी है उसके सुनने से उन लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं जो अपने परवरदिगार से डरते हैं फिर उनके जिस्म नरम हो जाते हैं और उनके दिल खुदा की याद की तरफ बा इतमेनान मुतावज्जे हो जाते हैं ये खुदा की हिदायत है इसी से जिसकी चाहता है हिदायत करता है और खुदा जिसको गुमराही में छोड़ दे तो उसको कोई राह पर लाने वाला नहीं
24أَفَمَن يَتَّقِي بِوَجْهِهِ سُوءَ الْعَذَابِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ وَقِيلَ لِلظَّالِمِينَ ذُوقُوا مَا كُنتُمْ تَكْسِبُونَ
तो क्या जो शख्स क़यामत के दिन अपने मुँह को बड़े अज़ाब की सिपर बनाएगा (नाज़ी के बराबर हो सकता है) और ज़ालिमों से कहा जाएगा कि तुम (दुनिया में) जैसा कुछ करते थे अब उसके मज़े चखो
25كَذَّبَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ فَأَتَاهُمُ الْعَذَابُ مِنْ حَيْثُ لَا يَشْعُرُونَ
जो लोग उनसे पहले गुज़र गए उन्होंने भी (पैग़म्बरों को) झुठलाया तो उन पर अज़ाब इस तरह आ पहुँचा कि उन्हें ख़बर भी न हुई
26فَأَذَاقَهُمُ اللَّهُ الْخِزْيَ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَلَعَذَابُ الْآخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ
तो खुदा ने उन्हें (इसी) दुनिया की ज़िन्दगी में रूसवाई की लज्ज़त चखा दी और आख़ेरत का अज़ाब तो यक़ीनी उससे कहीं बढ़कर है काश ये लोग ये बात जानते
27وَلَقَدْ ضَرَبْنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ لَّعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
और हमने तो इस क़ुरान में लोगों के (समझाने के) वास्ते हर तरह की मिसाल बयान कर दी है ताकि ये लोग नसीहत हासिल करें
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अनुवाद — अज़-ज़ुमर 25

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Tuesday, August 18, 2026

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