अज़-ज़ुमर · 26/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुमर
فَأَذَاقَهُمُ اللَّهُ الْخِزْيَ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَلَعَذَابُ الْآخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ ۝٢٦
Fa azaaqahumul laahul khizya fil hayaatid dunyaa wa la`azaabul Aakirati akbar; law kaanoo ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
तो खुदा ने उन्हें (इसी) दुनिया की ज़िन्दगी में रूसवाई की लज्ज़त चखा दी और आख़ेरत का अज़ाब तो यक़ीनी उससे कहीं बढ़कर है काश ये लोग ये बात जानते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अज़ाक़हुमुल्लाहु अल-ख़िज़्य: अल्लाह ने उन्हें अपमान, ज़िल्लत और रुसवाई का मज़ा चखाया।
  • अल-ख़िज़्य: वह अपमान और शर्मिंदगी जो किसी को उसके गुनाहों की सज़ा के तौर पर दुनिया में मिलती है।
  • अल-आख़िराह: आख़िरत का दिन, यानी क़ियामत का दिन।
  • अकबर: बहुत बड़ा, सबसे भारी और सख्त।
  • लौ कानू या'लमून: अगर वे जानते (समझते)।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन पिछली उम्मतों का ज़िक्र कर रहे हैं जिन्होंने अपने नबियों को झुठलाया और उनकी नसीहत को क़बूल नहीं किया। उन्होंने हक़ को नकारा और गुमराही पर अड़े रहे, तो अल्लाह ने उन्हें उनके किए की सज़ा दी। उन पर अज़ाब भेजा और उन्हें दुनिया ही में ज़िल्लत, रुसवाई, अपमान और तबाही का मज़ा चखाया। किसी को क़त्ल किया गया, किसी को क़ैद किया गया, किसी को मुसीबतों में डाला गया — यह सब उनके कुफ़्र और झुठलाने का नतीजा था।

लेकिन अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि यह दुनिया का अज़ाब तो बहुत छोटा है, और जो अज़ाब उनके लिए आख़िरत में तैयार किया गया है, वह इससे कहीं बड़ा, सख्त और हमेशा रहने वाला है। दुनिया की सज़ा चाहे जितनी भी भयानक हो, वह ख़त्म होने वाली है, लेकिन आख़िरत का अज़ाब हमेशा रहेगा, और उसकी शिद्दत का अंदाज़ा कोई नहीं लगा सकता।

अगर उन लोगों को यह इल्म होता कि उनका अंजाम क्या होने वाला है, तो वे ज़रूर अपने कुफ़्र से बाज़ आते और नबियों की बात मान लेते। लेकिन उनकी नादानी और हठधर्मी ने उन्हें अंधा कर दिया, और वे अज़ाब के हक़दार बने।


दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत और सबक़ है। अल्लाह तआला ने हमें बताया कि सच्चाई को झुठलाने और नबियों की बात न मानने का अंजाम क्या होता है। हमें चाहिए कि हम क़ुरआन और सुन्नत पर अमल करें, नबी ﷺ की सीख को अपनाएँ, और उन लोगों के हाल से सबक़ लें जो अल्लाह की नाफ़रमानी की वजह से तबाह हो गए। यह दुनिया की ज़िंदगी बहुत छोटी है, और आख़िरत की ज़िंदगी हमेशा की है। अगर हम आज अल्लाह की इबादत करें और उसके हुक्मों पर चलें, तो हमें दुनिया में भी इज़्ज़त मिलेगी और आख़िरत में भी जन्नत की नेमतें मिलेंगी। अल्लाह तआला हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में से न बनाए जो अज़ाब के हक़दार हैं। आमीन।



📜 आयत 24-28 — सूरा अज़-ज़ुमर

24أَفَمَن يَتَّقِي بِوَجْهِهِ سُوءَ الْعَذَابِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ وَقِيلَ لِلظَّالِمِينَ ذُوقُوا مَا كُنتُمْ تَكْسِبُونَ
तो क्या जो शख्स क़यामत के दिन अपने मुँह को बड़े अज़ाब की सिपर बनाएगा (नाज़ी के बराबर हो सकता है) और ज़ालिमों से कहा जाएगा कि तुम (दुनिया में) जैसा कुछ करते थे अब उसके मज़े चखो
25كَذَّبَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ فَأَتَاهُمُ الْعَذَابُ مِنْ حَيْثُ لَا يَشْعُرُونَ
जो लोग उनसे पहले गुज़र गए उन्होंने भी (पैग़म्बरों को) झुठलाया तो उन पर अज़ाब इस तरह आ पहुँचा कि उन्हें ख़बर भी न हुई
26فَأَذَاقَهُمُ اللَّهُ الْخِزْيَ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَلَعَذَابُ الْآخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ
तो खुदा ने उन्हें (इसी) दुनिया की ज़िन्दगी में रूसवाई की लज्ज़त चखा दी और आख़ेरत का अज़ाब तो यक़ीनी उससे कहीं बढ़कर है काश ये लोग ये बात जानते
27وَلَقَدْ ضَرَبْنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ لَّعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
और हमने तो इस क़ुरान में लोगों के (समझाने के) वास्ते हर तरह की मिसाल बयान कर दी है ताकि ये लोग नसीहत हासिल करें
28قُرْآنًا عَرَبِيًّا غَيْرَ ذِي عِوَجٍ لَّعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ
(हम ने तो साफ और सलीस) एक अरबी कुरान (नाज़िल किया) जिसमें ज़रा भी कजी (पेचीदगी) नहीं
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीRevelation
26आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 26

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Tuesday, September 8, 2026

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