अज़-ज़ुमर · 61/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुमर
وَيُنَجِّي اللَّهُ الَّذِينَ اتَّقَوْا بِمَفَازَتِهِمْ لَا يَمَسُّهُمُ السُّوءُ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ ۝٦١
Wa yunajjil laahul lazee nat taqaw bimafaazatihim laa yamassuhumus sooo`u wa laa hum uahzanoon
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग परहेज़गार हैं ख़ुदा उन्हें उनकी कामयाबी (और सआदत) के सबब निजात देगा कि उन्हें तकलीफ छुएगी भी नहीं और न यह लोग (किसी तरह) रंजीदा दिल होंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُنَجِّي: नजात देना, मुक्त करना।
  • اتَّقَوْا: जिन्होंने तक़वा अपनाया, यानी अल्लाह के आदेशों का पालन किया और उसकी मनाही से बचे।
  • بِمَفَازَتِهِمْ: उनकी कामयाबी की जगह के कारण, यानी जन्नत जो उनकी सफलता और कामयाबी का स्थान है।
  • السُّوءُ: बुराई, तकलीफ़, अज़ाब।
  • يَحْزَنُونَ: ग़मगीन होंगे, उदास होंगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने उन बंदों को, जिन्होंने उसका तक़वा अपनाया—यानी उसके हुक्मों पर अमल किया और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचे रहे—जहन्नम के अज़ाब से नजात देकर उनकी कामयाबी की जगह यानी जन्नत में दाखिल करेगा। यह उनकी उसी तक़वा की बदौलत होगा, जो उनके लिए कामयाबी का ज़रिया बना। उन्हें अज़ाब की कोई तकलीफ़ नहीं छूएगी, न ही दुनिया के खोए हुए मामूली सुखों का कोई ग़म उन्हें होगा। वे हर बुराई से महफूज़ होंगे और हर ग़म से पाक। यह अल्लाह का वादा है जो कभी नहीं टूटता।

दावती पहलू:

यह आयत मोमिनों के लिए खुशखबरी है कि तक़वा (परहेज़गारी) ही असली कामयाबी की कुंजी है। जो इंसान दुनिया में अल्लाह से डरकर ज़िंदगी गुज़ारता है, अल्लाह उसे आख़िरत की हर तकलीफ़ से बचाएगा और उसे ऐसी जगह पहुँचाएगा जहाँ न कोई दर्द है, न कोई ग़म। यह वादा हमें सिखाता है कि दुनिया की चिंताओं और मुश्किलों के बावजूद अगर हम अल्लाह की राह पर चलें, तो उसकी रहमत हमारे लिए काफी है। आओ, हम अपनी ज़िंदगी को तक़वा की रोशनी में ढालें, ताकि उस दिन हम भी उन खुशनसीबों में शामिल हों जिन्हें न कोई डर होगा और न कोई ग़म।



📜 आयत 59-63 — सूरा अज़-ज़ुमर

59بَلَىٰ قَدْ جَاءَتْكَ آيَاتِي فَكَذَّبْتَ بِهَا وَاسْتَكْبَرْتَ وَكُنتَ مِنَ الْكَافِرِينَ
उस वक्त ख़ुदा कहेगा ( हाँ ) हाँ तेरे पास मेरी आयतें पहुँची तो तूने उन्हें झुठलाया और शेख़ी कर बैठा और तू भी काफिरों में से था (अब तेरी एक न सुनी जाएगी)
60وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ تَرَى الَّذِينَ كَذَبُوا عَلَى اللَّهِ وُجُوهُهُم مُّسْوَدَّةٌ ۚ أَلَيْسَ فِي جَهَنَّمَ مَثْوًى لِّلْمُتَكَبِّرِينَ
और जिन लोगों ने ख़ुदा पर झूठे बोहतान बाँधे - तुम क़यामत के दिन देखोगे उनके चेहरे सियाह होंगे क्या गुरूर करने वालों का ठिकाना जहन्नुम में नहीं है (ज़रूर है)
61وَيُنَجِّي اللَّهُ الَّذِينَ اتَّقَوْا بِمَفَازَتِهِمْ لَا يَمَسُّهُمُ السُّوءُ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
और जो लोग परहेज़गार हैं ख़ुदा उन्हें उनकी कामयाबी (और सआदत) के सबब निजात देगा कि उन्हें तकलीफ छुएगी भी नहीं और न यह लोग (किसी तरह) रंजीदा दिल होंगे
62اللَّهُ خَالِقُ كُلِّ شَيْءٍ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ وَكِيلٌ
ख़ुदा ही हर चीज़ का जानने वाला है और वही हर चीज़ का निगेहबान है
63لَّهُ مَقَالِيدُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ وَالَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِ اللَّهِ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
सारे आसमान व ज़मीन की कुन्जियाँ उसके पास है और जो लोग उसकी आयतों से इन्कार कर बैठें वही घाटे में रहेगें
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीअवतरण स्थान
61आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 61

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Saturday, October 3, 2026

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