अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَنكِحُوا – विवाह करो
- مَا نَكَحَ آبَاؤُكُم – जिन स्त्रियों से तुम्हारे बापों ने विवाह किया
- إِلَّا مَا قَدْ سَلَفَ – परन्तु जो पहले (जाहिलियत के समय में) हो चुका है, उस पर मुख़ाहिज़ा (पकड़) नहीं है
- فَاحِشَةً – अत्यंत बुरा काम, घोर अश्लीलता
- مَقْتًا – अत्यधिक घृणा और क्रोध का कारण, जिससे अल्लाह नाराज़ होता है
- سَاءَ سَبِيلًا – बहुत बुरा रास्ता और तरीक़ा
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मुसलमानों को एक बहुत बड़े गुनाह से रोक रहे हैं—वह यह कि कोई व्यक्ति अपने बाप की बीवी से (चाहे बाप ने उससे विवाह किया हो या सिर्फ़ निकाह का इक़रार किया हो) शादी न करे। यह हुक्म इसलिए दिया गया कि इस्लाह से पहले जाहिलियत के दौर में यह बुरा रिवाज मौजूद था कि बेटा अपने बाप के मरने के बाद उसकी बीवी से शादी कर लेता था। इस्लाम ने इस घिनौनी प्रथा को पूरी तरह ख़त्म कर दिया।
अल्लाह फ़रमाता है: "और उन स्त्रियों से विवाह न करो जिनसे तुम्हारे बापों ने विवाह किया हो, परन्तु जो पहले हो चुका है (उस पर मुख़ाहिज़ा नहीं)।" यानी जो लोग जाहिलियत के दौर में ऐसा कर चुके हैं, उनसे पूछ-गढ़ नहीं की जाएगी, बशर्ते वे इस्लाम लाने के बाद तौबा कर लें। लेकिन अब से यह हमेशा के लिए हराम है।
फिर अल्लाह इसके कारण बताते हैं: "बेशक यह अत्यंत बुरा काम है, अल्लाह को सख़्त नाराज़ करने वाला है, और बहुत ही बुरा रास्ता है।" यानी यह काम इतना घिनौना है कि इससे अल्लाह का क्रोध भड़कता है, क्योंकि यह बाप के सम्मान और इज़्ज़त के ख़िलाफ़ है। बाप की बीवी बाप के लिए इज़्ज़त की चीज़ है, और बेटे का उससे विवाह करना बाप की बेइज़्ज़ती और परिवार में बिखराव का कारण बनता है। इसलिए अल्लाह ने इसे "फ़ाहिशा" (घोर अश्लीलता) और "मक़्त" (अल्लाह की नाराज़गी का कारण) क़रार दिया।
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम ने परिवार की पवित्रता, रिश्तों की पाकीज़गी और बुज़ुर्गों के सम्मान की कितनी बड़ी रक्षा की है। अल्लाह ने उन सभी रिश्तों को हराम किया है जो समाज में फूट, बेइज़्ज़ती और अश्लीलता पैदा करते हैं। यह हुक्म सिर्फ़ एक रस्म को ख़त्म करने के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज को पाकीज़गी और नेकी की राह पर चलाने के लिए है।
आज भी अगर हम इस्लाम के इन पाक हुक्मों पर अमल करें, तो हमारे परिवारों में मुहब्बत, इज़्ज़त और सुकून बरक़रार रहेगा। अल्लाह ने हर उस चीज़ से रोका है जो इंसान के लिए नुक़सानदेह है, और हर उस चीज़ की इजाज़त दी है जो फ़ायदेमंद है। यही इस्लाम की हमदर्दी और रहमत है कि वह हमें पाक रास्ते पर चलाता है। आइए, हम अल्लाह के इन हुक्मों को दिल से क़ुबूल करें और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ ढालें।
📜 आयत 20-24 — अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 22
सूरा अन-निसा आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन औरतों से तुम्हारे बाप दादाओं से (निकाह) जमाअ…सूरा आयत 22/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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