अन-निसा · 22/176
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-निसा
وَلَا تَنكِحُوا مَا نَكَحَ آبَاؤُكُم مِّنَ النِّسَاءِ إِلَّا مَا قَدْ سَلَفَ ۚ إِنَّهُ كَانَ فَاحِشَةً وَمَقْتًا وَسَاءَ سَبِيلًا ۝٢٢
Wa laa tankihoo maa nakaha aabaaa`ukum minan nisaaa`i illaa maa qad salaf; inahoo kaana faahishatanw wa maqtanw wa saaa`a sabeelaa
📖 हिंदी अर्थ
और जिन औरतों से तुम्हारे बाप दादाओं से (निकाह) जमाअ (अगरचे ज़िना) किया हो तुम उनसे निकाह न करो मगर जो हो चुका (वह तो हो चुका) वह बदकारी और ख़ुदा की नाख़ुशी की बात ज़रूर थी और बहुत बुरा तरीक़ा था

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَنكِحُوا – विवाह करो
  • مَا نَكَحَ آبَاؤُكُم – जिन स्त्रियों से तुम्हारे बापों ने विवाह किया
  • إِلَّا مَا قَدْ سَلَفَ – परन्तु जो पहले (जाहिलियत के समय में) हो चुका है, उस पर मुख़ाहिज़ा (पकड़) नहीं है
  • فَاحِشَةً – अत्यंत बुरा काम, घोर अश्लीलता
  • مَقْتًا – अत्यधिक घृणा और क्रोध का कारण, जिससे अल्लाह नाराज़ होता है
  • سَاءَ سَبِيلًا – बहुत बुरा रास्ता और तरीक़ा

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मुसलमानों को एक बहुत बड़े गुनाह से रोक रहे हैं—वह यह कि कोई व्यक्ति अपने बाप की बीवी से (चाहे बाप ने उससे विवाह किया हो या सिर्फ़ निकाह का इक़रार किया हो) शादी न करे। यह हुक्म इसलिए दिया गया कि इस्लाह से पहले जाहिलियत के दौर में यह बुरा रिवाज मौजूद था कि बेटा अपने बाप के मरने के बाद उसकी बीवी से शादी कर लेता था। इस्लाम ने इस घिनौनी प्रथा को पूरी तरह ख़त्म कर दिया।

अल्लाह फ़रमाता है: "और उन स्त्रियों से विवाह न करो जिनसे तुम्हारे बापों ने विवाह किया हो, परन्तु जो पहले हो चुका है (उस पर मुख़ाहिज़ा नहीं)।" यानी जो लोग जाहिलियत के दौर में ऐसा कर चुके हैं, उनसे पूछ-गढ़ नहीं की जाएगी, बशर्ते वे इस्लाम लाने के बाद तौबा कर लें। लेकिन अब से यह हमेशा के लिए हराम है।

फिर अल्लाह इसके कारण बताते हैं: "बेशक यह अत्यंत बुरा काम है, अल्लाह को सख़्त नाराज़ करने वाला है, और बहुत ही बुरा रास्ता है।" यानी यह काम इतना घिनौना है कि इससे अल्लाह का क्रोध भड़कता है, क्योंकि यह बाप के सम्मान और इज़्ज़त के ख़िलाफ़ है। बाप की बीवी बाप के लिए इज़्ज़त की चीज़ है, और बेटे का उससे विवाह करना बाप की बेइज़्ज़ती और परिवार में बिखराव का कारण बनता है। इसलिए अल्लाह ने इसे "फ़ाहिशा" (घोर अश्लीलता) और "मक़्त" (अल्लाह की नाराज़गी का कारण) क़रार दिया।

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम ने परिवार की पवित्रता, रिश्तों की पाकीज़गी और बुज़ुर्गों के सम्मान की कितनी बड़ी रक्षा की है। अल्लाह ने उन सभी रिश्तों को हराम किया है जो समाज में फूट, बेइज़्ज़ती और अश्लीलता पैदा करते हैं। यह हुक्म सिर्फ़ एक रस्म को ख़त्म करने के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज को पाकीज़गी और नेकी की राह पर चलाने के लिए है।

आज भी अगर हम इस्लाम के इन पाक हुक्मों पर अमल करें, तो हमारे परिवारों में मुहब्बत, इज़्ज़त और सुकून बरक़रार रहेगा। अल्लाह ने हर उस चीज़ से रोका है जो इंसान के लिए नुक़सानदेह है, और हर उस चीज़ की इजाज़त दी है जो फ़ायदेमंद है। यही इस्लाम की हमदर्दी और रहमत है कि वह हमें पाक रास्ते पर चलाता है। आइए, हम अल्लाह के इन हुक्मों को दिल से क़ुबूल करें और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ ढालें।



📜 आयत 20-24 — सूरा अन-निसा

20وَإِنْ أَرَدتُّمُ اسْتِبْدَالَ زَوْجٍ مَّكَانَ زَوْجٍ وَآتَيْتُمْ إِحْدَاهُنَّ قِنطَارًا فَلَا تَأْخُذُوا مِنْهُ شَيْئًا ۚ أَتَأْخُذُونَهُ بُهْتَانًا وَإِثْمًا مُّبِينًا
और अगर तुम एक बीवी (को तलाक़ देकर उस) की जगह दूसरी बीवी (निकाह करके) तबदील करना चाहो तो अगरचे तुम उनमें से एक को (जिसे तलाक़ देना चाहते हो) बहुत सा माल दे चुके हो तो तुम उनमें से कुछ (वापस न लो) क्या तुम्हारी यही गैरत है कि (ख्वाह मा ख्वाह) बोहतान बॉधकर या सरीही जुर्म लगाकर वापस ले लो
21وَكَيْفَ تَأْخُذُونَهُ وَقَدْ أَفْضَىٰ بَعْضُكُمْ إِلَىٰ بَعْضٍ وَأَخَذْنَ مِنكُم مِّيثَاقًا غَلِيظًا
और क्या तुम उसको (वापस लोगे हालॉकि तुममें से) एक दूसरे के साथ ख़िलवत कर चुका है और बीवियॉ तुमसे (निकाह के वक्त नुक़फ़ा वगैरह का) पक्का क़रार ले चुकी हैं
22وَلَا تَنكِحُوا مَا نَكَحَ آبَاؤُكُم مِّنَ النِّسَاءِ إِلَّا مَا قَدْ سَلَفَ ۚ إِنَّهُ كَانَ فَاحِشَةً وَمَقْتًا وَسَاءَ سَبِيلًا
और जिन औरतों से तुम्हारे बाप दादाओं से (निकाह) जमाअ (अगरचे ज़िना) किया हो तुम उनसे निकाह न करो मगर जो हो चुका (वह तो हो चुका) वह बदकारी और ख़ुदा की नाख़ुशी की बात ज़रूर थी और बहुत बुरा तरीक़ा था
23حُرِّمَتْ عَلَيْكُمْ أُمَّهَاتُكُمْ وَبَنَاتُكُمْ وَأَخَوَاتُكُمْ وَعَمَّاتُكُمْ وَخَالَاتُكُمْ وَبَنَاتُ الْأَخِ وَبَنَاتُ الْأُخْتِ وَأُمَّهَاتُكُمُ اللَّاتِي أَرْضَعْنَكُمْ وَأَخَوَاتُكُم مِّنَ الرَّضَاعَةِ وَأُمَّهَاتُ نِسَائِكُمْ وَرَبَائِبُكُمُ اللَّاتِي فِي حُجُورِكُم مِّن نِّسَائِكُمُ اللَّاتِي دَخَلْتُم بِهِنَّ فَإِن لَّمْ تَكُونُوا دَخَلْتُم بِهِنَّ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ وَحَلَائِلُ أَبْنَائِكُمُ الَّذِينَ مِنْ أَصْلَابِكُمْ وَأَن تَجْمَعُوا بَيْنَ الْأُخْتَيْنِ إِلَّا مَا قَدْ سَلَفَ ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ غَفُورًا رَّحِيمًا
(मुसलमानों हसबे जेल) औरतें तुम पर हराम की गयी हैं तुम्हारी माएं (दादी नानी वगैरह सब) और तुम्हारी बेटियॉ (पोतियॉ) नवासियॉ (वगैरह) और तुम्हारी बहनें और तुम्हारी फुफियॉ और तुम्हारी ख़ालाएं और भतीजियॉ और भंजियॉ और तुम्हारी वह माएं जिन्होंने तुमको दूध पिलाया है और तुम्हारी रज़ाई (दूध शरीक) बहनें और तुम्हारी बीवीयों की माँए और वह (मादर ज़िलो) लड़कियां जो तुम्हारी गोद में परवरिश पा चुकी हो और उन औरतों (के पेट) से (पैदा हुई) हैं जिनसे तुम हमबिस्तरी कर चुके हो हाँ अगर तुमने उन बीवियों से (सिर्फ निकाह किया हो) हमबिस्तरी न की तो अलबत्ता उन मादरज़िलों (लड़कियों से) निकाह (करने में) तुम पर कुछ गुनाह नहीं है और तुम्हारे सुलबी लड़को (पोतों नवासों वगैरह) की बीवियॉ (बहुएं) और दो बहनों से एक साथ निकाह करना मगर जो हो चुका (वह माफ़ है) बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
24۞ وَالْمُحْصَنَاتُ مِنَ النِّسَاءِ إِلَّا مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ ۖ كِتَابَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ ۚ وَأُحِلَّ لَكُم مَّا وَرَاءَ ذَٰلِكُمْ أَن تَبْتَغُوا بِأَمْوَالِكُم مُّحْصِنِينَ غَيْرَ مُسَافِحِينَ ۚ فَمَا اسْتَمْتَعْتُم بِهِ مِنْهُنَّ فَآتُوهُنَّ أُجُورَهُنَّ فَرِيضَةً ۚ وَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ فِيمَا تَرَاضَيْتُم بِهِ مِن بَعْدِ الْفَرِيضَةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلِيمًا حَكِيمًا
और शौहरदार औरतें मगर वह औरतें जो (जिहाद में कुफ्फ़ार से) तुम्हारे कब्ज़े में आ जाएं हराम नहीं (ये) ख़ुदा का तहरीरी हुक्म (है जो) तुमपर (फ़र्ज़ किया गया) है और उन औरतों के सिवा (और औरतें) तुम्हारे लिए जायज़ हैं बशर्ते कि बदकारी व ज़िना नहीं बल्कि तुम इफ्फ़त या पाकदामिनी की ग़रज़ से अपने माल (व मेहर) के बदले (निकाह करना) चाहो हॉ जिन औरतों से तुमने मुताअ किया हो तो उन्हें जो मेहर मुअय्यन किया है दे दो और मेहर के मुक़र्रर होने के बाद अगर आपस में (कम व बेश पर) राज़ी हो जाओ तो उसमें तुमपर कुछ गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा (हर चीज़ से) वाक़िफ़ और मसलेहतों का पहचानने वाला है
अन-निसाकुरान सूची
176आयत
मदनीअवतरण स्थान
22आयत

अनुवाद — अन-निसा 22

सूरा अन-निसा आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन औरतों से तुम्हारे बाप दादाओं से (निकाह) जमाअ…

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Wednesday, September 30, 2026

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